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कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर पार, अमेरिका-ईरान तनाव से बाजार धड़ाम, सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट

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अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर खुले और प्रमुख कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखी गई।

हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी दबाव देखने को मिला और बाजार की शुरुआत ही लाल निशान पर हुई। लगातार वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की धारणा को कमजोर कर दिया, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा। बुधवार को भी बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी, जहां सेंसेक्स 756.84 अंक टूटकर 78,516.49 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 198.50 अंक की गिरावट के साथ 24,378.10 पर बंद हुआ था।

गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भी दबाव जारी रहा और प्रमुख सूचकांक लगातार गिरावट में दिखे। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 577.71 अंक यानी 0.74 प्रतिशत टूटकर 77,938.78 के स्तर पर आ गया। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 156.45 अंक यानी 0.64 प्रतिशत गिरकर 24,221.65 पर कारोबार करता नजर आया। बाजार में यह गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक घटनाक्रमों से भी प्रभावित रही।

गिरावट के पीछे बड़े कारण

शेयर बाजार में इस तेज गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में कोई ठोस प्रगति नहीं होने के कारण पश्चिम एशिया में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है, जो 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।

तेल बाजार में यह तेजी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने और वैश्विक विकास दर पर दबाव पड़ने की आशंका है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और एशियाई बाजारों में कमजोरी ने भी भारतीय बाजार को नीचे खींचा।

प्रमुख शेयरों में दबाव

गिरावट के इस दौर में सेंसेक्स की कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।

Tech Mahindra, Eternal, InterGlobe Aviation, Mahindra & Mahindra, Asian Paints और Infosys जैसे शेयर प्रमुख रूप से दबाव में रहे।

हालांकि कुछ ही कंपनियों ने बाजार को सपोर्ट दिया, जिनमें Sun Pharmaceutical Industries और Power Grid Corporation of India शामिल रहीं, लेकिन यह बढ़त भी बाजार की बड़ी गिरावट को रोक नहीं सकी।

विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में अनिश्चितता ही सबसे बड़ा कारक बनी हुई है।

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर के पार जाना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड 100 से 106 डॉलर के दायरे में बना हुआ है, जिससे आपूर्ति संकट की आशंका और बढ़ गई है।

वहीं जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार का कहना है कि बाजार में दिशा को लेकर फिलहाल कोई स्पष्टता नहीं है। युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव लंबा खिंच रहा है, जिससे वैश्विक विकास और भारत की अर्थव्यवस्था दोनों पर दबाव बढ़ रहा है।

लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के अनुसार, पश्चिम एशिया की घटनाएं सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम ऊर्जा मार्गों पर तनाव से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।

एशियाई बाजारों में भी कमजोरी

भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई शेयर बाजारों में भी गिरावट का माहौल देखने को मिला।

दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक सभी दबाव में कारोबार करते दिखे।

इसके विपरीत अमेरिकी बाजार बुधवार को हल्की बढ़त के साथ बंद हुए थे, लेकिन उसका सकारात्मक असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर नहीं दिखा।

कच्चे तेल की कीमतें बनी मुख्य चिंता

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.36 प्रतिशत बढ़कर 103.3 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। यह स्तर निवेशकों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है क्योंकि तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

बाजार में दबाव का एक और बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली रही। बुधवार को एफआईआई ने लगभग 2,078 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए, जिससे बाजार में अतिरिक्त दबाव बढ़ गया।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर देखा जाए तो भारतीय शेयर बाजार फिलहाल वैश्विक घटनाओं के प्रभाव में है। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार की दिशा को कमजोर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

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