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CII बिजनेस समिट 2026 में गौतम अडानी का बड़ा बयान, ऊर्जा और डिजिटल सुरक्षा को बताया 21वीं सदी की सबसे बड़ी ताकत

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नई दिल्ली में CII बिजनेस समिट 2026 में गौतम अडानी ने ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल शक्ति को भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बताया। भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने पर चर्चा हुई।

राजधानी नई दिल्ली में आयोजित Confederation of Indian Industry के वार्षिक बिजनेस समिट 2026 में इस बार वैश्विक अर्थव्यवस्था, उद्योग और समाज के भविष्य पर गहन मंथन देखने को मिला। इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का विषय “The Future – Global Economy, Industry, Society” रखा गया है, जिसमें भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।

इस सम्मेलन में देश के प्रमुख उद्योगपतियों, नीति निर्माताओं और वैश्विक निवेशकों की मौजूदगी रही। इसी दौरान Gautam Adani ने मंच से संबोधित करते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

अपने संबोधन में Gautam Adani ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और वैश्विक तनावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वही देश आगे बढ़ेगा जो ऊर्जा और तकनीक दोनों पर मजबूत पकड़ बनाए रखेगा।

उन्होंने मध्य-पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी रणनीतिक जगहों पर अस्थिरता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थिति वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर रही है। ऐसे में देशों को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने होंगे।

अडानी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि आज दुनिया “फ्लैट” नहीं बल्कि “फ्रैक्चर्ड” हो चुकी है, यानी अब वैश्विक व्यवस्था कई हिस्सों में बंटी हुई है। ऐसे माहौल में सप्लाई चेन केवल दक्षता के आधार पर नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका ने पहले ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की कोशिश की और अब वह कंप्यूटिंग और टेक्नोलॉजी में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। वहीं चीन ने औद्योगिक क्षमता के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्राथमिकता दी है।

Gautam Adani ने कहा कि यदि 1947 की आजादी राजनीतिक स्वतंत्रता थी, तो 21वीं सदी की असली आजादी ऊर्जा और इंटेलिजेंस पर अधिकार से जुड़ी होगी। यानी जो देश अपनी ऊर्जा जरूरतों और डिजिटल तकनीक पर नियंत्रण रखेगा, वही भविष्य की दिशा तय करेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में ऊर्जा उत्पादन क्षमता में बड़ा विस्तार किया है और अब देश 500 गीगावाट से अधिक बिजली उत्पादन क्षमता पार कर चुका है, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है।

इस दौरान उन्होंने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर जोर देते हुए कहा कि वर्ष 2035 तक “Sovereign AI” और डिजिटल इकोसिस्टम पर करीब 100 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी। उनका लक्ष्य भारत को वैश्विक एआई हब के रूप में स्थापित करना है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में डेटा सेंटर और एआई सिस्टम को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी, इसलिए ग्रीन एनर्जी आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना बेहद जरूरी है। इससे पर्यावरण संतुलन भी बना रहेगा और तकनीकी विकास भी तेज होगा।

सम्मेलन में मौजूद उद्योग जगत के अन्य विशेषज्ञों ने भी भारत की आर्थिक प्रगति और निवेश अवसरों पर अपने विचार साझा किए। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में तेजी से एक मजबूत केंद्र के रूप में उभर रहा है।

Confederation of Indian Industry का यह शिखर सम्मेलन न केवल उद्योग जगत के लिए बल्कि नीति निर्धारकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है, जहां भारत के भविष्य की आर्थिक दिशा पर रणनीतिक चर्चा की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मेलन भारत को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक स्थिति को और मजबूत करेंगे।

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