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Stock Market News: बाजार में दिनभर रही जबरदस्त हलचल, सेंसेक्स-निफ्टी सपाट बंद, RBI के फैसले पर टिकी उम्मीदें

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भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, पश्चिम एशिया में तनाव और RBI की मौद्रिक नीति से पहले निवेशक सतर्क रहे। सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ बंद हुए।

भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को निवेशकों की धड़कनें बढ़ाए रखीं। कारोबार की शुरुआत से लेकर समापन तक बाजार में अनिश्चितता और अस्थिरता का माहौल बना रहा। कभी तेज गिरावट तो कभी मजबूत रिकवरी देखने को मिली, लेकिन दिन के अंत में प्रमुख सूचकांक लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए। वैश्विक परिस्थितियों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर निवेशकों की सतर्कता बाजार की चाल में साफ दिखाई दी।

दिनभर के कारोबार में निवेशकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाजार की दिशा को समझने की रही। शुरुआती कारोबार में दबाव के बीच बाजार कमजोर दिखाई दिया, लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी आने से प्रमुख सूचकांक संभल गए। अंतिम घंटों में चुनिंदा शेयरों में हुई खरीदारी ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचा लिया।

विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल बाजार ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां निवेशक बड़े फैसले लेने से बच रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक का परिणाम है, जिसका असर आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाई चिंता

हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी निकाले जाने का असर भारतीय बाजार पर दिखाई दे रहा है। विदेशी फंडों की बिकवाली ने बाजार की तेजी को सीमित कर दिया है। निवेशकों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण विदेशी निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की यह रणनीति भारतीय बाजार के लिए अल्पकालिक दबाव पैदा कर रही है। हालांकि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी बाजार को सहारा दे रही है, जिससे बड़ी गिरावट फिलहाल टल रही है।

पश्चिम एशिया के हालात पर नजर

वैश्विक बाजारों में इस समय सबसे अधिक चर्चा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर सीधे ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। भारत जैसे आयात-आधारित देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतें बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।

निवेशकों को आशंका है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे ऊर्जा कीमतों में तेजी आ सकती है। यही वजह है कि भारतीय बाजार में निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं।

हालांकि कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली, जिससे बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली। फिर भी निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर बनी हुई है।

RBI की बैठक बनी सबसे बड़ा फैक्टर

शुक्रवार को आने वाले भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत फैसले को लेकर बाजार में विशेष उत्सुकता है। निवेशकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक के रुख से आने वाले महीनों की आर्थिक दिशा का संकेत मिलेगा।

यदि आरबीआई विकास को प्राथमिकता देते हुए सकारात्मक संकेत देता है तो बाजार में नई खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाने की स्थिति में निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशक किसी बड़े दांव से बच रहे हैं और नीति निर्णय के बाद ही नई रणनीति बनाएंगे।

इन शेयरों ने दिखाई मजबूती

दिनभर की अस्थिरता के बीच कुछ कंपनियों के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया। उपभोक्ता क्षेत्र, बैंकिंग और चुनिंदा आईटी कंपनियों में खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों की मजबूती ने बाजार को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बैंकिंग सेक्टर में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। इसके अलावा उपभोक्ता मांग से जुड़ी कंपनियों में भी निवेशकों की रुचि देखने को मिली। इन क्षेत्रों की मजबूती ने बाजार को संतुलित बनाए रखा।

कुछ दिग्गज कंपनियों पर रहा दबाव

दूसरी ओर कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। सूचना प्रौद्योगिकी, सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कुछ शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। वैश्विक मांग को लेकर चिंता और मुनाफावसूली इसके प्रमुख कारण रहे।

विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक इस समय केवल उन्हीं कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं जिनके वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाएं मजबूत दिखाई दे रही हैं।

वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेत

एशियाई शेयर बाजारों में गुरुवार को दबाव देखने को मिला। कई प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। अमेरिकी बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में कमजोरी के साथ बंद हुए थे।

हालांकि यूरोप के कुछ बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर मिले-जुले संकेतों के कारण भारतीय निवेशक भी सतर्क बने रहे।

आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ कारोबारी सत्र बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि आरबीआई का रुख निवेशकों की उम्मीदों के अनुरूप रहता है तो बाजार नई तेजी की ओर बढ़ सकता है। दूसरी तरफ वैश्विक तनाव और विदेशी पूंजी निकासी जारी रहने पर दबाव बना रह सकता है।

लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय धैर्य रखने का है। मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति भविष्य में बेहतर परिणाम दे सकती है।

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