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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच शेयर बाजार में सतर्क कारोबार, जानिए आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल

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29 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत हल्की गिरावट और मामूली बढ़त के साथ हुई। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी बाजारों के रुझान का असर देखने को मिला।

भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सप्ताह की शुरुआत सोमवार 29 जून 2026 को बेहद सावधानी भरे माहौल में हुई। शुरुआती कारोबार में बाजार ने बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन कुछ ही समय बाद निवेशकों की सतर्कता के कारण सेंसेक्स दबाव में आ गया। वहीं निफ्टी ने मामूली मजबूती बनाए रखते हुए 24 हजार के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास कारोबार किया।

बाजार में इस सुस्ती की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। खासकर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ी तनातनी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इस तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है।

सोमवार की सुबह शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 48 अंकों की मामूली गिरावट के साथ 77,052 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स हल्की बढ़त के साथ 24,069 के स्तर के करीब बना रहा।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल निवेशक बड़ी तेजी के बजाय बाजार की दिशा को समझने की कोशिश कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले दिनों में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।

सोमवार के कारोबार में कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। इटरनल और ट्रेंट जैसे शेयर शुरुआती कारोबार में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहे। वहीं कुछ क्षेत्रों में निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।

बाजार की मौजूदा स्थिति को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार की बुनियाद अभी भी मजबूत बनी हुई है। घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती, रुपये की स्थिर स्थिति और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद बाजार को समर्थन दे रही है।

विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24 हजार का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो आगे तेजी की संभावना मजबूत हो सकती है। वहीं वैश्विक तनाव बढ़ने या तेल की कीमतों में तेज उछाल आने पर बाजार में दबाव देखा जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी भारतीय शेयर बाजार को मिले-जुले लेकिन सकारात्मक संकेत मिले हैं। अमेरिका के प्रमुख शेयर बाजारों के फ्यूचर्स में तेजी देखने को मिली, जबकि एशियाई बाजारों में भी कई इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।

हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। चीन का शंघाई कंपोजिट और ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख इंडेक्स भी मामूली तेजी में रहा। जापान का बाजार हालांकि ज्यादा बदलाव के बिना स्थिर नजर आया।

यूरोपीय बाजारों से भी शुरुआती संकेत सकारात्मक रहे हैं। इससे वैश्विक निवेशकों के बीच भरोसा बना हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।

भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी चिंता का विषय हो सकती है। तेल महंगा होने से महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।

बाजार जानकारों का मानना है कि यदि ईरान-अमेरिका तनाव कम होता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार स्थिर रहते हैं तो भारतीय शेयर बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है। इसके अलावा घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में सुधार भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

आने वाले कारोबारी दिनों में निवेशकों की नजर रिजर्व बैंक की नीतियों, कंपनियों के प्रदर्शन और वैश्विक बाजारों के रुख पर रहेगी। फिलहाल बाजार में तेजी और गिरावट के बीच संतुलित कारोबार जारी रहने की संभावना है।

कुल मिलाकर 29 जून की शुरुआत भले ही धीमी रही हो, लेकिन मजबूत घरेलू संकेतों और वैश्विक बाजारों के समर्थन के कारण भारतीय शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक उम्मीदें बनी हुई हैं।

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शेयर बाजार हमेशा घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित होता है। मौजूदा समय में ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की कीमतों ने निवेशकों को सतर्क जरूर किया है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती बाजार के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है।

निवेशकों को किसी भी फैसले से पहले बाजार की स्थिति, कंपनियों के प्रदर्शन और वैश्विक घटनाक्रम को ध्यान में रखना चाहिए। अचानक उतार-चढ़ाव के बीच धैर्य और सही रणनीति महत्वपूर्ण होती है।

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