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Crude Oil Price Today: होर्मुज में तनाव कम, ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर तक आने के संकेत, भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद

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Alam Ki Khabar: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम होने और खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति सामान्य होने के बाद ब्रेंट क्रूड में बड़ी गिरावट के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

वैश्विक कच्चे तेल बाजार में एक बार फिर राहत के संकेत दिखाई देने लगे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भू-राजनीतिक तनाव कम होने और खाड़ी देशों से तेल निर्यात लगभग सामान्य होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात बने रहे तो वर्ष 2026 के अंत तक ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

हाल के दिनों में मध्य पूर्व में तनाव कम होने से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका लगभग समाप्त हो गई है। इसके साथ ही सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने अपने तेल निर्यात को तेजी से युद्ध-पूर्व स्तर के करीब पहुंचा दिया है। दूसरी ओर चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था में कच्चे तेल की मांग अपेक्षा से कमजोर बनी हुई है। मांग में कमी और आपूर्ति में बढ़ोतरी के कारण वैश्विक बाजार में सप्लाई सरप्लस की स्थिति बनने लगी है, जिससे कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से युद्ध के दौरान तेल की कीमतों में आई तेजी पूरी तरह खत्म हो चुकी है। कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने भी अपने अनुमान संशोधित करते हुए संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में तेल बाजार पर अतिरिक्त आपूर्ति का दबाव बना रह सकता है।

सऊदी अरब ने अपने प्रमुख रास तनुरा टर्मिनल से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल की लोडिंग दोबारा शुरू कर दी है और निर्यात क्षमता युद्ध-पूर्व स्तर के लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात भी अपने निर्यात को पहले के स्तर पर बहाल करने में सफल रहा है। अनुमान है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से अब प्रतिदिन एक करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल की आवाजाही हो रही है, जिससे वैश्विक बाजार में पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष के दौरान जिन देशों और रिफाइनरियों ने वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों का सहारा लिया था, वे व्यवस्थाएं अभी भी काफी हद तक बनी हुई हैं। ऐसे में सामान्य होती समुद्री आवाजाही के साथ बाजार में अतिरिक्त तेल उपलब्ध होने से कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।

भारत के लिए यह स्थिति राहत भरी मानी जा रही है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर पड़ने वाला वित्तीय दबाव कम होगा। इससे कंपनियों को पहले हुए घाटे की भरपाई करने में मदद मिल सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं तो केंद्र सरकार भी पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में राहत देने पर विचार कर सकती है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने का सीधा लाभ देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। इससे उद्योगों की लागत भी घटेगी और आम उपभोक्ताओं को भी राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि तेल बाजार पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर रहता है। यदि भविष्य में मध्य पूर्व में फिर से तनाव बढ़ता है या किसी बड़े उत्पादक देश की आपूर्ति प्रभावित होती है तो कीमतों में दोबारा तेजी आ सकती है। फिलहाल बाजार का रुख अतिरिक्त आपूर्ति और कमजोर मांग की ओर इशारा कर रहा है।

यह भी पढ़ें: • कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव से जुड़े सभी बड़े अपडेट पढ़ें – alamkikhabar.com • अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अर्थव्यवस्था की खबरें – alamkikhabar.com • पेट्रोल-डीजल और महंगाई से जुड़ी ताजा खबरें – alamkikhabar.com

क्या है पूरा मामला? • होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम हुआ। • सऊदी अरब और यूएई ने तेल निर्यात बढ़ाया। • चीन की मांग कमजोर बनी हुई है। • बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति बनने की संभावना। • ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर प्रति बैरल तक आने का अनुमान। • भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद बढ़ी।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे रहती हैं तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी राहत मिल सकती है। इससे परिवहन, कृषि और उद्योग क्षेत्र की लागत घटने के साथ महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

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