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WEF रिपोर्ट: 2040 तक दुनिया के लिए बड़ा संकट बन सकती है बढ़ती आवासीय लागत, आम परिवारों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव

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Alam Ki Khabar | विश्व आर्थिक मंच (WEF) की रिपोर्ट के अनुसार 21 देशों में बढ़ती आवासीय लागत वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संकट 2040 तक बना रह सकता है।

नई दिल्ली, 13 जुलाई।विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ताजा रिपोर्ट ने दुनिया भर में तेजी से बढ़ती आवासीय लागत को लेकर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार 21 देशों में घर खरीदने और किराए पर रहने का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम लोगों का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है। रिपोर्ट का कहना है कि यह केवल अस्थायी आर्थिक समस्या नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक संरचनात्मक चुनौती है, जो वर्ष 2040 तक वैश्विक वित्तीय स्थिरता पर असर डाल सकती है। अध्ययन में शामिल 21 देशों में से 20 देशों के नागरिक अपनी मासिक आय का 33 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल किराया या गृह ऋण की किस्त चुकाने में खर्च कर रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति किसी भी परिवार के लिए संतुलित जीवन-यापन की सीमा से अधिक है। रिपोर्ट में भारत, नाइजीरिया और कोलंबिया जैसे देशों का भी उल्लेख किया गया है, जहां कई परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा केवल आवास पर खर्च हो जाता है। रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों में पिछले वर्षों के दौरान संपत्ति की कीमतों में गिरावट आने के बावजूद आम लोगों के लिए घर खरीदना आसान नहीं हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि केवल संपत्ति की कीमत कम होने से आवास की समस्या का समाधान नहीं होता। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में युवाओं पर आर्थिक दबाव और बढ़ेगा। उन्हें अपने रहने का खर्च उठाने के साथ भविष्य के लिए बचत और परिवार के बुजुर्गों की देखभाल की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इसी कारण कई विकसित देशों में बड़ी संख्या में युवा अपने माता-पिता के साथ रहने को मजबूर हो रहे हैं। विश्व आर्थिक मंच ने यह भी चेतावनी दी है कि लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण कुछ युवा अधिक कमाई की उम्मीद में जोखिम भरे निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो वित्तीय बाजारों के लिए भी नई चुनौती बन सकता है। रिपोर्ट में इस समस्या के समाधान के लिए साझा आवास मॉडल, किफायती आवास योजनाओं को बढ़ावा देने और पहली बार घर खरीदने वालों के लिए आसान ऋण व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी नीतियां लागू नहीं की गईं तो आने वाले वर्षों में आवासीय संकट सामाजिक और आर्थिक असमानता को और गहरा सकता है।

बढ़ती आवासीय लागत पर चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि किफायती आवास केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं बल्कि आर्थिक स्थिरता का भी महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए सरकारों को ऐसी नीतियां अपनानी होंगी, जिनसे आम लोगों के लिए घर खरीदना और किराए पर रहना आसान हो सके।

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