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Restaurant Service Charge News: बिना सहमति सर्विस चार्ज वसूला तो करें शिकायत, जानिए ग्राहकों के अधिकार

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Alam Ki Khabar: रेस्टोरेंट के बिल में बिना सहमति सर्विस चार्ज जोड़ना ग्राहकों के अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है। जानिए सर्विस चार्ज से जुड़े नियम और शिकायत की पूरी प्रक्रिया।

नई दिल्ली, 20 जुलाई।होटल और रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद बिल चुकाते समय यदि आपकी अनुमति के बिना सर्विस चार्ज जोड़ दिया जाता है, तो अब आपको सतर्क रहने की जरूरत है। उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े नियम स्पष्ट करते हैं कि सर्विस चार्ज अनिवार्य नहीं है और किसी भी ग्राहक से उसकी सहमति के बिना इसकी वसूली नहीं की जा सकती। हाल के दिनों में कई प्रतिष्ठानों के खिलाफ इसी प्रकार की शिकायतों पर कार्रवाई भी की गई है।

उपभोक्ता अधिकारों की निगरानी करने वाली एजेंसियों के अनुसार कुछ रेस्टोरेंट ग्राहकों के बिल में 5 से 10 प्रतिशत तक सर्विस चार्ज स्वतः जोड़ रहे थे। कई उपभोक्ता इसे जीएसटी समझकर भुगतान कर देते थे, जबकि दोनों पूरी तरह अलग हैं। जीएसटी सरकार द्वारा निर्धारित कर है, जबकि सर्विस चार्ज रेस्टोरेंट द्वारा लिया जाने वाला वैकल्पिक शुल्क है, जिसे देना या न देना पूरी तरह ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करता है।

यदि किसी रेस्टोरेंट के बिल में आपकी अनुमति के बिना सर्विस चार्ज जोड़ा गया है, तो आप बिल से इसे हटाने की मांग कर सकते हैं। केवल सर्विस चार्ज देने से इनकार करने के आधार पर रेस्टोरेंट आपको सेवा देने से मना नहीं कर सकता। यदि आपकी बात नहीं मानी जाती है, तो आप इसकी शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर दर्ज करा सकते हैं।

शिकायत दर्ज कराने के लिए ग्राहक 1915 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन के मोबाइल एप अथवा आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत करते समय बिल और भुगतान की रसीद अपने पास सुरक्षित रखना आवश्यक है, ताकि जरूरत पड़ने पर उसे प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन का बिल चुकाने से पहले उसे ध्यान से पढ़ना चाहिए। यदि उसमें कोई ऐसा शुल्क शामिल है जिसे लेकर सहमति नहीं दी गई है, तो उसी समय आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। जागरूक उपभोक्ता ही अपने अधिकारों की बेहतर तरीके से रक्षा कर सकते हैं।

उपभोक्ता जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

बिल का भुगतान करने से पहले उसकी जांच करना हर ग्राहक की जिम्मेदारी है। छोटे-छोटे अधिकारों की जानकारी आपको अनावश्यक भुगतान से बचा सकती है और उपभोक्ता व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बना सकती है।

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