:
Breaking News

रसोई पर महंगाई की दोहरी मार, चीनी-प्याज और खाद्य तेल महंगे; आलू-टमाटर ने दी राहत

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | चीनी, प्याज और खाद्य तेल महंगे होने से रसोई का बजट बढ़ा है। वहीं टमाटर और आलू सस्ते हुए हैं। जानिए पिछले एक साल में जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम में कितना बदलाव हुआ।

डेस्क, 17 अगस्त।रसोई के मासिक बजट पर महंगाई का असर एक बार फिर साफ दिखाई देने लगा है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी वस्तुओं के दाम पिछले एक साल में बढ़े हैं। खास तौर पर चीनी, प्याज और खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी ने घरेलू खर्च को प्रभावित किया है। दूसरी ओर आलू और टमाटर की कीमतों में कमी ने उपभोक्ताओं को कुछ राहत जरूर दी है। दालों और अनाज की स्थिति भी एक जैसी नहीं है। कुछ दालें महंगी हुई हैं, जबकि कुछ की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है।

भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग के Price Monitoring System के 16 अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश में जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अलग-अलग रुख देखने को मिल रहा है। विभाग देशभर के बाजार केंद्रों से रोजाना कीमतों का आंकड़ा जुटाकर आवश्यक वस्तुओं की निगरानी करता है।

चीनी ने बढ़ाई घर के बजट की चिंता

चीनी की कीमत में पिछले एक साल के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 16 अगस्त को अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 51.51 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। एक साल पहले यह कीमत 46.38 रुपये प्रति किलो थी। यानी सालाना आधार पर चीनी करीब 11.06 प्रतिशत महंगी हुई है।

बड़े शहरों में भी कीमतों में अंतर देखने को मिला। रांची में चीनी 57 रुपये किलो तक पहुंची, जबकि चेन्नई में 54 रुपये, मुंबई में 53 रुपये और दिल्ली में 50 रुपये किलो दर्ज की गई। इसका सीधा असर उन परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ता है जिनके घर में चाय, नाश्ता और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी का नियमित इस्तेमाल होता है।

प्याज के दाम भी चढ़े

रसोई की दूसरी महत्वपूर्ण वस्तु प्याज भी पिछले साल की तुलना में महंगा हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 16 अगस्त को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 35.85 रुपये किलो रही। एक साल पहले यह 28.09 रुपये किलो थी। इस हिसाब से प्याज की कीमत में करीब 27.63 प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी हुई।

शहरों में कीमत अलग-अलग रही। दिल्ली में प्याज 45 रुपये किलो, चेन्नई में 50 रुपये, रांची में 37 रुपये और मुंबई में 33 रुपये किलो दर्ज किया गया। यानी उपभोक्ताओं को बाजार और शहर के हिसाब से अलग कीमत चुकानी पड़ रही है।

टमाटर ने दी बड़ी राहत

जहां प्याज महंगा हुआ है, वहीं टमाटर की कीमत में उल्लेखनीय गिरावट आई है। 16 अगस्त को टमाटर की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 36.91 रुपये किलो रही। एक साल पहले यह 53.43 रुपये किलो थी। इस तरह सालाना आधार पर टमाटर करीब 30.92 प्रतिशत सस्ता हुआ।

थोक बाजार में गिरावट और ज्यादा रही। 16 अगस्त को टमाटर की अखिल भारतीय औसत थोक कीमत 2,841.50 रुपये प्रति क्विंटल थी, जबकि एक साल पहले यह 4,300.82 रुपये प्रति क्विंटल थी। यानी थोक भाव में करीब 33.93 प्रतिशत की कमी आई।

चार प्रमुख शहरों की बात करें तो दिल्ली में टमाटर 45 रुपये, मुंबई और चेन्नई में 38-38 रुपये तथा रांची में 43 रुपये किलो दर्ज किया गया।

आलू भी हुआ सस्ता

आलू ने भी आम उपभोक्ता को राहत दी है। इसकी अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 21.75 रुपये किलो रही, जबकि एक साल पहले यह 25.72 रुपये किलो थी। यानी आलू की कीमत करीब 15.44 प्रतिशत कम हुई।

हालांकि शहरों में इसका भाव काफी अलग रहा। दिल्ली में आलू 23 रुपये, मुंबई में 25 रुपये, चेन्नई में 40 रुपये और रांची में 20 रुपये किलो दर्ज किया गया। इससे साफ है कि राष्ट्रीय औसत कीमत बाजार की स्थानीय स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाती।

खाद्य तेलों ने बढ़ाया रसोई का खर्च

रसोई के बजट पर सबसे बड़ा दबाव खाद्य तेलों की कीमतों से पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों में सूरजमुखी तेल की कीमत में सबसे तेज सालाना वृद्धि दिखाई देती है। 16 अगस्त को इसकी अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 190.79 रुपये किलो थी, जबकि एक साल पहले यह 161.09 रुपये थी। यानी करीब 18.44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

मूंगफली तेल की औसत कीमत 206.49 रुपये किलो और सरसों तेल की 197.39 रुपये किलो रही। सोया तेल 164.67 रुपये किलो दर्ज किया गया।

सालाना तुलना में पाम तेल करीब 14.02 प्रतिशत, सोया तेल 11.92 प्रतिशत और मूंगफली तेल 10.06 प्रतिशत महंगा हुआ। सरसों तेल की कीमत में भी करीब 4.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

खाद्य तेलों की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ तेल की खरीद तक सीमित नहीं रहता। घर में बनने वाले लगभग हर पकवान में तेल के इस्तेमाल के कारण इसका प्रभाव पूरे महीने के रसोई खर्च पर पड़ता है।

दालों में मिली-जुली तस्वीर

दालों के मामले में तस्वीर कुछ संतुलित है। अरहर दाल की औसत खुदरा कीमत 121.82 रुपये किलो रही और इसमें सालाना करीब 3.97 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। उड़द दाल भी करीब 6.60 प्रतिशत महंगी हुई।

इसके उलट चना दाल की कीमत में लगभग 2 प्रतिशत, मूंग दाल में 0.38 प्रतिशत और मसूर दाल में 1.15 प्रतिशत की मामूली कमी दर्ज की गई। यानी दालों की कीमतों में एकतरफा तेजी नहीं है, लेकिन उपभोक्ताओं को सभी प्रमुख दालों में राहत भी नहीं मिली है।

चावल महंगा, गेहूं में मामूली राहत

अनाज की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिला है। चावल की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 44.96 रुपये किलो दर्ज की गई। एक साल पहले यह 42.22 रुपये थी। इस तरह चावल करीब 6.49 प्रतिशत महंगा हुआ।

गेहूं की कीमत 31.47 रुपये किलो रही और इसमें सालाना करीब 0.57 प्रतिशत की मामूली कमी आई। वहीं गेहूं के आटे की औसत कीमत 37.49 रुपये किलो रही, जो एक साल पहले की तुलना में करीब 1.08 प्रतिशत अधिक है।

रसोई के बजट की असली तस्वीर क्या है?

सरकारी आंकड़ों से यह तस्वीर सामने आती है कि खाद्य महंगाई का असर हर वस्तु पर एक जैसा नहीं है। तेल, चीनी और प्याज जैसी रोजमर्रा की चीजें महंगी हुई हैं, जबकि टमाटर और आलू में बड़ी गिरावट आई है। दालों और अनाज में भी कीमतों का रुख अलग-अलग रहा है।

उपभोक्ता मामले विभाग आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की दैनिक निगरानी करता है और कीमतों में असामान्य उतार-चढ़ाव की स्थिति में उपलब्धता तथा बाजार हस्तक्षेप जैसे उपायों पर नजर रखता है। विभाग के अनुसार कीमतों पर मौसम, उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय बाजार जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।

इस समय आम परिवार के लिए राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि आलू और टमाटर जैसी प्रमुख सब्जियों के दाम पिछले साल से नीचे हैं। लेकिन खाद्य तेल और चीनी जैसी लगातार इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की बढ़ी कीमतें इस राहत को पूरी तरह महसूस नहीं होने दे रही हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में रसोई के बजट पर सबसे ज्यादा नजर खाद्य तेल, चीनी और प्याज की कीमतों पर रहेगी।

यह भी पढ़ें

बिहार में महंगाई और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं से जुड़ी पिछली खबरें Alam Ki Khabar पर पढ़ें।

बिहार के बाजार और आम लोगों से जुड़ी आर्थिक खबरों के लिए Alam Ki Khabar से जुड़े रहें।

महंगाई का असर सिर्फ कीमतों में नहीं, परिवार की पूरी योजना पर पड़ता है

रसोई की महंगाई को सिर्फ किसी एक वस्तु के दाम से नहीं समझा जा सकता। एक परिवार महीने की शुरुआत में तेल, चीनी, दाल, चावल, आटा और सब्जियों का बजट बनाता है। इनमें से कुछ वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं तो परिवार को कहीं न कहीं खर्च कम करना पड़ता है।

ताजा आंकड़े राहत और चिंता दोनों की तस्वीर दिखाते हैं। टमाटर और आलू सस्ते हुए हैं, लेकिन खाद्य तेल और चीनी जैसी वस्तुओं की कीमत बढ़ी है। खासकर तेल की कीमत में बदलाव का असर व्यापक होता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल लगभग हर घर की रसोई में होता है।

नीति स्तर पर जरूरी है कि कीमतों की निगरानी के साथ आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत रखा जाए। उत्पादन, भंडारण, परिवहन और बाजार तक सामान पहुंचने की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर व्यवधान का असर अंततः उपभोक्ता की जेब पर पड़ता है। इसलिए महंगाई पर नियंत्रण के लिए केवल खुदरा बाजार पर नजर रखना पर्याप्त नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करना जरूरी है।

आम उपभोक्ता के लिए भी अलग-अलग बाजारों में कीमतों की तुलना करना और मौसमी सब्जियों का इस्तेमाल बढ़ाना घरेलू बजट को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है। हालांकि मूल समाधान स्थिर आपूर्ति और उचित कीमतों में ही है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *