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RBI News: 7 सितंबर को 7 लाख करोड़ रुपये का VRRR ऑक्शन, बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी पर RBI की नजर

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | RBI 7 सितंबर को 7 लाख करोड़ रुपये का 30 दिन का VRRR ऑक्शन करेगा। जानिए ऑक्शन का समय, पैसा वापस लेने के नियम और E-Kuber से जुड़ी पूरी जानकारी।

नई दिल्ली, 5 सितंबर। बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक महत्वपूर्ण तरलता प्रबंधन कदम उठाया है। RBI सोमवार, 7 सितंबर 2026 को 7 लाख करोड़ रुपये का 30-दिन का वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो यानी VRRR ऑक्शन आयोजित करेगा। RBI की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक यह ऑक्शन सुबह 9:30 बजे से 10 बजे तक होगा और इसमें बैंकों को अपनी अतिरिक्त राशि केंद्रीय बैंक के पास रखने का अवसर मिलेगा।

इस ऑपरेशन की निर्धारित मैच्योरिटी 7 अक्टूबर 2026 रखी गई है। यानी ऑक्शन में RBI के पास रखी गई रकम सामान्य स्थिति में 30 दिन बाद बैंकों को वापस मिलेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त तरलता को कुछ समय के लिए अवशोषित करना और मनी मार्केट की स्थितियों को संतुलित रखना है।

7 लाख करोड़ रुपये की बड़ी राशि पर होगी बोली

RBI ने इस VRRR ऑक्शन के लिए 7,00,000 करोड़ रुपये की राशि अधिसूचित की है। 30 दिन की अवधि वाला यह ऑपरेशन सामान्य दैनिक नकदी प्रबंधन से अलग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए बड़ी मात्रा में अतिरिक्त फंड को अपेक्षाकृत लंबी अवधि के लिए RBI के पास रखा जा सकेगा। आधिकारिक प्रेस रिलीज में बताया गया है कि यह फैसला मौजूदा और बदलती हुई liquidity conditions की समीक्षा के बाद लिया गया है।

VRRR को आसान भाषा में समझें तो जब बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से ज्यादा नकदी उपलब्ध होती है, तब RBI विभिन्न मौद्रिक साधनों के जरिए उस अतिरिक्त रकम को अस्थायी रूप से अपने पास आकर्षित करता है। इससे बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त पैसे की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी RBI के पास रखेंगे

ऑक्शन में भाग लेने वाले बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी को RBI के पास रखने के लिए बोली लगाएंगे। यह रकम बैंकिंग सिस्टम से स्थायी रूप से बाहर नहीं जाएगी, बल्कि निर्धारित अवधि के लिए केंद्रीय बैंक के पास रहेगी। मैच्योरिटी की तारीख पर बैंक को मूल रकम के साथ लागू नियमों के अनुसार अर्जित ब्याज भी प्राप्त होगा।

इस तरह का ऑपरेशन RBI को बाजार में नकदी की उपलब्धता और अल्पकालिक ब्याज दरों को संतुलित रखने में मदद करता है। खास तौर पर तब, जब बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त liquidity मौजूद हो और उसका प्रभाव overnight money market rates पर पड़ सकता हो।

30 दिन का VRRR क्यों अहम?

7 सितंबर का VRRR ऑपरेशन 30 दिनों के tenor के कारण खास महत्व रखता है। छोटी अवधि के liquidity operations की तुलना में इसमें बैंक अपनी अतिरिक्त राशि को लंबी अवधि के लिए RBI के पास रखेंगे।

इसका मतलब यह नहीं है कि RBI बैंकिंग सिस्टम से पैसा स्थायी रूप से निकाल रहा है। यह एक अस्थायी liquidity absorption operation है। 7 अक्टूबर को तय अवधि पूरी होने पर रकम वापस की जाएगी।

RBI ने पहले भी VRRR जैसे ऑपरेशनों का इस्तेमाल बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त liquidity को संतुलित करने के लिए किया है। मौद्रिक नीति के स्तर पर ऐसे कदमों का उद्देश्य बाजार में धन की उपलब्धता को परिस्थितियों के अनुरूप बनाए रखना होता है।

मैच्योरिटी से पहले भी पैसा निकाल सकेंगे बैंक

इस बार बैंकों को एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त सुविधा भी दी गई है। यदि किसी बैंक को 7 अक्टूबर से पहले RBI के पास रखी रकम की जरूरत पड़ती है तो वह premature reversal का अनुरोध कर सकता है।

खास बात यह है कि बैंक को पूरी रकम एक साथ वापस लेने की बाध्यता नहीं होगी। RBI ने partial reversal की अनुमति भी दी है। यानी आवश्यकता के अनुसार बैंक अपनी जमा रकम का केवल एक हिस्सा भी समय से पहले वापस ले सकता है।

इससे बैंकों को अपनी liquidity जरूरतों के हिसाब से अधिक लचीलापन मिलेगा। यदि किसी बैंक की फंडिंग जरूरत अचानक बढ़ती है तो उसे पूरे 30 दिन की अवधि समाप्त होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

E-Kuber पोर्टल से करना होगा आवेदन

समय से पहले रकम वापस लेने के लिए संबंधित बैंक को RBI के E-Kuber पोर्टल के माध्यम से अनुरोध करना होगा। RBI के मुताबिक यह सुविधा मुंबई में कार्यदिवसों के दौरान सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्ध रहेगी।

पोर्टल पर अनुरोध दर्ज करने के बाद बैंक को इसकी सूचना RBI के Financial Markets Operations Department को ईमेल के जरिए भी देनी होगी। आधिकारिक निर्देशों के मुताबिक premature reversal का settlement अनुरोध किए जाने वाले दिन के बाद आने वाले अगले working day की शुरुआत में किया जाएगा।

दो working days पहले देना होगा अनुरोध

RBI ने premature reversal के लिए समय सीमा भी स्पष्ट कर दी है। बैंक मूल reversal date से कम से कम दो working days पहले अपना अनुरोध कर सकते हैं।

7 अक्टूबर 2026 इस VRRR ऑपरेशन की मूल reversal date है। इसलिए बैंक को यदि उससे पहले रकम निकालनी है तो निर्धारित समय सीमा का ध्यान रखना होगा। यह व्यवस्था अचानक और अंतिम क्षण में किए जाने वाले अनुरोधों को नियंत्रित करने के साथ settlement प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

मूल रकम के साथ मिलेगा अर्जित ब्याज

Premature reversal की स्थिति में बैंक के RBI में मौजूद current account में उस समय तक की principal amount और accrued interest जमा किया जाएगा, जितने समय तक पैसा RBI के पास रहा होगा।

इसके साथ ही ऑपरेशन से जुड़े collateral securities की वापसी भी RBI के निर्धारित operational mechanism के अनुसार होगी। इस तरह बैंक को अपनी liquidity जरूरत के अनुसार रकम वापस लेने का विकल्प मिलता है, जबकि RBI की liquidity management व्यवस्था भी व्यवस्थित रहती है।

फरवरी 2020 के ऑपरेशनल नियम रहेंगे लागू

RBI ने साफ किया है कि इस VRRR ऑक्शन के संचालन से जुड़े नियम वही रहेंगे जो फरवरी 2020 में जारी किए गए operational guidelines में निर्धारित किए गए थे। यानी इस बार premature reversal की सुविधा को अलग से शामिल किया गया है, जबकि ऑक्शन के मूल संचालन के लिए पहले से तय framework ही लागू रहेगा।

बाजार और बैंकिंग सिस्टम पर क्या असर?

इस कदम को मुख्य रूप से liquidity management के नजरिए से देखा जा रहा है। जब बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त पैसा होता है तो उसका एक हिस्सा RBI के पास रखने से बाजार में उपलब्ध surplus liquidity अस्थायी रूप से कम हो सकती है।

हालांकि इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि आम बैंक ग्राहकों के लिए लोन या जमा दरों में तत्काल बदलाव हो जाएगा। VRRR मुख्य रूप से RBI और बैंकों के बीच liquidity management का उपकरण है। इसके असर को समझने के लिए बाजार की प्रतिक्रिया, बैंकिंग सिस्टम की liquidity और अल्पकालिक ब्याज दरों में होने वाले बदलावों को देखना होगा।

RBI की मौजूदा व्यवस्था में liquidity management का उद्देश्य यही है कि बैंकिंग सिस्टम में जरूरत के मुताबिक पर्याप्त धन उपलब्ध रहे, लेकिन अतिरिक्त liquidity इतनी अधिक न हो कि वह बाजार की ब्याज दरों और मौद्रिक नीति के संचालन को प्रभावित करने लगे।

कुल मिलाकर 7 सितंबर का 7 लाख करोड़ रुपये का VRRR ऑक्शन बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी को 30 दिनों के लिए व्यवस्थित करने की दिशा में RBI का बड़ा कदम है। साथ ही premature withdrawal और partial reversal की सुविधा बैंकों को अपनी तत्काल liquidity जरूरतों के मुताबिक रकम प्रबंधित करने की अतिरिक्त स्वतंत्रता देती है। RBI के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार ऑक्शन 7 सितंबर को सुबह 9:30 से 10 बजे तक होगा और सामान्य स्थिति में रकम 7 अक्टूबर को reverse होगी।

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बाजार के लिए इसका मतलब

बैंकिंग सिस्टम में liquidity की मात्रा मौद्रिक नीति के transmission के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। बहुत ज्यादा surplus cash रहने पर overnight market rates पर दबाव आ सकता है, जबकि जरूरत से कम liquidity होने पर बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है। ऐसे में VRRR जैसे उपकरण RBI को दोनों स्थितियों के बीच संतुलन बनाने का अवसर देते हैं।

7 लाख करोड़ रुपये की घोषित राशि अपने आप में बड़ी है, लेकिन वास्तविक absorption इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक ऑक्शन में कितनी राशि के लिए बोली लगाते हैं। इसलिए बाजार के लिए केवल notified amount ही नहीं, बल्कि auction में मिलने वाली वास्तविक bids और उनके rate को भी देखना महत्वपूर्ण होगा।

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