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Business News: जीएसटी नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, गिरफ्तारी से ITC और रिफंड तक प्रस्तावों पर चर्चा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | 57वीं GST Council Meeting में गिरफ्तारी, ITC, रिफंड और टैक्स प्रक्रिया आसान करने के प्रस्तावों पर चर्चा

नई दिल्ली, 8 अक्टूबर: 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में इस बार टैक्स की दरों में बड़े फेरबदल के बजाय कारोबारियों के लिए जीएसटी व्यवस्था को आसान बनाने पर फोकस रहने की उम्मीद है। बैठक में गिरफ्तारी के अधिकार, आपराधिक मुकदमे की सीमा, इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC, रिफंड और रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बदलाव के प्रस्तावों पर चर्चा की जा सकती है।

टैक्स दरों से ज्यादा नियमों को आसान बनाने पर जोर

जीएसटी व्यवस्था के अगले चरण में सरकार का ध्यान कारोबारियों के अनुपालन का बोझ घटाने पर है। प्रस्तावों का उद्देश्य ऐसी प्रक्रियाओं को कम करना है, जिनमें नियमित कारोबार करने वालों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई या विभागीय हस्तक्षेप का सामना करना पड़ता है।

जीएसटी लागू होने के शुरुआती वर्षों में सरकार का प्रमुख ध्यान टैक्स नेटवर्क को मजबूत करने, अधिक कारोबारियों को व्यवस्था से जोड़ने और टैक्स चोरी रोकने पर रहा। अब डिजिटल लेनदेन, ई-इनवॉयस और टैक्स रिटर्न से जुड़े बड़े डेटा के उपलब्ध होने के बाद जोखिम के आधार पर कार्रवाई की व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।

गिरफ्तारी के अधिकार में बदलाव का प्रस्ताव

बैठक में जीएसटी से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव पर विचार हो सकता है। प्रस्ताव के अनुसार जीएसटी अधिकारियों द्वारा गिरफ्तारी के लिए न्यायिक अनुमति को जरूरी बनाया जा सकता है।

इसके अलावा आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा को मौजूदा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किए जाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है।

इस बदलाव का असर छोटे और अपेक्षाकृत कम गंभीर टैक्स विवादों पर पड़ सकता है। गंभीर टैक्स चोरी और बड़े वित्तीय मामलों में कार्रवाई का प्रावधान हालांकि बना रहेगा।

ईमानदार कारोबारियों को राहत देने की कोशिश

जीएसटी परिषद के सामने ऐसे प्रस्ताव भी रखे जा सकते हैं, जिनका मकसद सप्लायर की गलती का खामियाजा ईमानदार खरीदार को भुगतने से रोकना है।

कई मामलों में खरीदार अपनी तरफ से खरीद और भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर देता है, लेकिन सप्लायर की ओर से रिटर्न या टैक्स जमा करने में हुई गड़बड़ी के कारण खरीदार का ITC प्रभावित हो जाता है। प्रस्तावित बदलावों के जरिए ऐसी परिस्थितियों में वास्तविक रूप से नियमों का पालन करने वाले कारोबारियों को राहत देने की व्यवस्था पर विचार हो सकता है।

ITC का दायरा बढ़ाने पर भी नजर

इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC से जुड़े नियमों में बदलाव कारोबारियों के लिए अहम हो सकता है। ITC के जरिए कारोबारी अपनी खरीद पर चुकाए गए GST को अपनी टैक्स देनदारी के साथ समायोजित कर सकते हैं।

मोटर वाहनों और समूह बीमा जैसे कुछ कारोबारी खर्चों पर ITC से जुड़ी पाबंदियों में राहत देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है। अगर ऐसे प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो कंपनियों की लागत कम होने के साथ कारोबार में फंसी पूंजी पर दबाव घट सकता है।

अटके टैक्स क्रेडिट से भी मिल सकती है राहत

कुछ कारोबार में इनपुट पर लगने वाला GST तैयार उत्पाद पर लगने वाले टैक्स से अधिक होता है। इससे कारोबारी के खाते में ITC जमा होता रहता है और उसकी कार्यशील पूंजी लंबे समय तक फंसी रह सकती है।

ऐसी स्थिति को इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से जोड़ा जाता है। परिषद में ऐसे मामलों में इनपुट सेवाओं पर जमा टैक्स क्रेडिट के रिफंड से संबंधित नियमों को आसान बनाने पर विचार हो सकता है।

इसका फायदा उन कारोबारियों को मिल सकता है, जिनका पैसा लगातार ITC के रूप में अटका रहता है।

रिफंड की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी

जीएसटी रिफंड को तेजी से जारी करने के लिए तकनीक आधारित व्यवस्था पर भी जोर दिया जा सकता है। सरकार ऐसे पात्र दावों को तेजी से निपटाने की व्यवस्था पर विचार कर रही है, जिनमें जोखिम कम हो और डिजिटल रिकॉर्ड से जानकारी का सत्यापन आसानी से किया जा सके।

रिफंड में तेजी का सीधा फायदा कारोबारियों की कार्यशील पूंजी पर पड़ेगा। विशेष रूप से निर्यातकों के लिए टैक्स रिफंड जल्दी मिलने से कारोबार में लगी रकम जल्द वापस आ सकेगी।

प्रस्तावित व्यवस्था में रिफंड प्रक्रिया को तय समयसीमा में पूरा करने और कम जोखिम वाले मामलों में मानवीय हस्तक्षेप घटाने पर जोर दिया जा सकता है।

रजिस्ट्रेशन और अनुपालन भी हो सकता है आसान

जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल बनाने और छोटे कारोबारियों के लिए अनुपालन का बोझ कम करने के प्रस्ताव भी बैठक के एजेंडे में शामिल हो सकते हैं।

सरकार का जोर यह हो सकता है कि सामान्य मामलों में डिजिटल सिस्टम के जरिए प्रक्रिया पूरी हो जाए और अधिकारियों की जांच केवल जोखिम वाले मामलों तक सीमित रहे।

रिटर्न, नोटिस और टैक्स विवादों से संबंधित प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने पर चर्चा होने की संभावना है।

GST 2.0 का अगला चरण माना जा रहा बदलाव

जीएसटी व्यवस्था में पहले चरण के दौरान टैक्स दरों और टैक्स ढांचे को सरल बनाने पर जोर रहा। अब अगले चरण में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने, तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने और कारोबारियों की लागत कम करने की दिशा में बदलाव प्रस्तावित किए जा रहे हैं।

हालांकि परिषद के सामने रखे गए प्रस्तावों को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अंतिम निर्णय परिषद की मंजूरी और उसके बाद जारी होने वाली अधिसूचनाओं के आधार पर ही लागू होंगे।

अगर इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो जीएसटी व्यवस्था में कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान होने, ITC से जुड़ी परेशानियां कम होने और रिफंड तेजी से मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।

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