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Business News: Swan Defence के शेयर 4.1% चढ़े, ₹1,897 करोड़ के टैंकर ऑर्डर की दौड़ में आगे

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | स्वान डिफेंस एंड हेवी इंडस्ट्रीज के शेयर 12 अक्टूबर को 4.1% चढ़कर ₹2,850 पर पहुंचे। कंपनी ₹1,897 करोड़ के प्रस्तावित प्रोडक्ट टैंकर ऑर्डर में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनी।

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026, आलम की खबर: जहाज निर्माण क्षेत्र में कारोबार बढ़ाने की संभावनाओं के बीच स्वान डिफेंस एंड हेवी इंडस्ट्रीज के शेयरों में सोमवार को तेजी दर्ज की गई। कंपनी का शेयर बीएसई पर 4.1 प्रतिशत उछलकर ₹2,850 तक पहुंच गया, जबकि कारोबार के दौरान इसने ₹2,874.55 का इंट्राडे स्तर भी छुआ। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शेयर ने इस दौरान अपना नया 52-सप्ताह का उच्च स्तर बनाया।

शेयरों में तेजी की प्रमुख वजह कंपनी का करीब ₹1,897 करोड़ के प्रस्तावित प्रोडक्ट टैंकर निर्माण ऑर्डर के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरना है। हालांकि, सबसे कम बोली लगाने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी को अंतिम रूप से ठेका मिल चुका है। अनुबंध पर अंतिम फैसला और हस्ताक्षर होना अभी बाकी है।

चार मीडियम-रेंज टैंकर बनाने का प्रस्ताव

प्रस्तावित ऑर्डर के तहत सरकारी कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के नेतृत्व वाले प्रस्तावित संयुक्त उद्यम के लिए चार मीडियम-रेंज प्रोडक्ट टैंकर तैयार किए जाने हैं। योजना में दो जहाजों का पक्का ऑर्डर और दो अतिरिक्त जहाजों के विकल्प शामिल बताए गए हैं।

इन टैंकरों को डुअल-फ्यूल तकनीक के अनुकूल तैयार करने की योजना है। प्रत्येक जहाज की माल ढुलाई क्षमता लगभग 17,000 से 18,000 टन बताई गई है। डुअल-फ्यूल तकनीक वाले जहाज एक से अधिक प्रकार के ईंधन का इस्तेमाल करने में सक्षम बनाए जाते हैं।

यदि प्रस्तावित अनुबंध स्वान डिफेंस को मिलता है, तो इससे कंपनी की ऑर्डर बुक और भविष्य के कारोबार को मजबूती मिल सकती है। साथ ही, देश में जहाज निर्माण की क्षमता बढ़ाने की कोशिशों को भी सहारा मिल सकता है।

बोली में कोचीन शिपयार्ड से कम कीमत

9 अक्टूबर को बोलियां खोले जाने के बाद स्वान डिफेंस एंड हेवी इंडस्ट्रीज की बोली प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, कंपनी ने प्रति जहाज लगभग 48.9 मिलियन डॉलर की कीमत पेश की, जो सरकारी कंपनी कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड की बोली से करीब 4 मिलियन डॉलर कम बताई गई है।

कम बोली के कारण कंपनी इस प्रक्रिया में आगे रही है। फिर भी, अंतिम चयन केवल बोली की कीमत पर निर्भर करेगा या नहीं, यह संबंधित कंपनी और प्रस्तावित संयुक्त उद्यम की आगे की प्रक्रिया से स्पष्ट होगा।

करीब 25 साल बाद देश में टैंकर निर्माण की संभावना

इस प्रस्ताव की अहमियत केवल एक कंपनी के संभावित कारोबार तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह करीब 25 साल के अंतराल के बाद भारत में ऑयल टैंकर निर्माण को दोबारा गति देने का अवसर बन सकता है।

भारत में जहाज निर्माण क्षेत्र को मजबूत करने से घरेलू शिपयार्ड, तकनीकी विशेषज्ञता और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को फायदा मिल सकता है। यदि परियोजना आगे बढ़ती है, तो यह बड़े समुद्री जहाजों के निर्माण में भारतीय कंपनियों की भूमिका बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

हालांकि, यह लाभ तभी वास्तविक रूप लेगा जब ऑर्डर को अंतिम मंजूरी मिलेगी और निर्माण का काम शुरू होगा।

दक्षिण कोरियाई कंपनी के साथ तकनीकी सहयोग

स्वान डिफेंस एंड हेवी इंडस्ट्रीज के पास जहाज निर्माण के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग का भी आधार है। कंपनी का दक्षिण कोरिया की प्रमुख शिपबिल्डिंग कंपनी सैमसंग हेवी इंडस्ट्रीज के साथ तकनीकी समझौता बताया गया है। इस तरह का सहयोग जहाजों की डिजाइन, निर्माण प्रक्रिया और तकनीकी मानकों से जुड़ी विशेषज्ञता हासिल करने में मदद कर सकता है।

कंपनी ने 2024 में नए प्रबंधन के तहत दोबारा अपना कामकाज शुरू किया था। इसके बाद से उसे जहाज निर्माण से जुड़े कई ऑर्डर मिलने की जानकारी सामने आई है। प्रस्तावित टैंकर परियोजना इसी कारोबारी विस्तार की अगली कड़ी साबित हो सकती है।

अमोनिया बल्क कैरियर का ऑर्डर भी अहम

कंपनी को एनर्जी वन लिमिटेड से चार डुअल-फ्यूल अमोनिया बल्क कैरियर बनाने का ऑर्डर मिलने की भी जानकारी दी गई है। इस सौदे का कुल मूल्य 240 मिलियन डॉलर से 280 मिलियन डॉलर के बीच बताया गया है।

बल्क कैरियर ऐसे जहाज होते हैं जिनका इस्तेमाल बड़ी मात्रा में थोक सामग्री ले जाने के लिए किया जाता है। वहीं, अमोनिया और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल के अनुकूल जहाजों की मांग भविष्य में समुद्री परिवहन के ऊर्जा विकल्पों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन सकती है।

यदि कंपनी प्रस्तावित टैंकर ऑर्डर भी हासिल कर लेती है, तो उसके जहाज निर्माण कारोबार में विविधता और विस्तार की संभावना बढ़ सकती है।

निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?

शेयर में तेजी और संभावित बड़े ऑर्डर ने कंपनी को बाजार में चर्चा में ला दिया है। लेकिन निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनना अंतिम ठेका मिलने की गारंटी नहीं है। परियोजना की मंजूरी, अनुबंध की शर्तें, निर्माण लागत, समय-सीमा और कंपनी की वित्तीय स्थिति आगे के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।

शेयर का नया 52-सप्ताह का उच्च स्तर भी भविष्य में तेजी जारी रहने की गारंटी नहीं देता। निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले निवेशकों को कंपनी के आधिकारिक खुलासों और जोखिमों का मूल्यांकन करना चाहिए।

निष्कर्ष: स्वान डिफेंस एंड हेवी इंडस्ट्रीज के लिए ₹1,897 करोड़ का प्रस्तावित टैंकर ऑर्डर कारोबार बढ़ाने का बड़ा अवसर हो सकता है। फिलहाल कंपनी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में आगे है, लेकिन अंतिम अनुबंध और उसके बाद की प्रगति ही तय करेगी कि यह अवसर वास्तविक ऑर्डर में बदलता है या नहीं।

डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है, निवेश सलाह नहीं। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले आधिकारिक कंपनी घोषणाओं और अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

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