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Business News: RBI के रेपो रेट बढ़ाते ही 6 सरकारी बैंकों ने बदली लेंडिंग दरें, होम लोन पर क्या होगा असर?

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | RBI के रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद SBI, PNB समेत छह सरकारी बैंकों की लेंडिंग दरों में बदलाव। जानें होम लोन और EMI पर क्या असर पड़ सकता है।

बिजनेस डेस्क


नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026। देश के प्रमुख सरकारी बैंकों की लेंडिंग दरों में बदलाव के बाद होम लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए ब्याज दरों की तुलना करना जरूरी हो गया है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक ने अक्टूबर में अपनी संबंधित लेंडिंग दरों में संशोधन किया है। इसका असर उन ग्राहकों पर भी पड़ सकता है जिनका होम लोन संबंधित बेंचमार्क से जुड़ा हुआ है।


SBI ने 15 अक्टूबर से बदली दरें


भारतीय स्टेट बैंक ने 15 अक्टूबर 2026 से अपनी एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड लेंडिंग रेट (EBLR) को 7.90 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.15 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) 7.50 प्रतिशत से बढ़कर 7.75 प्रतिशत हो गई है।


PNB और बैंक ऑफ इंडिया की दरों में भी बढ़ोतरी


पंजाब नेशनल बैंक ने 8 अक्टूबर से अपनी रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट 8.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.35 प्रतिशत कर दी है। बैंक ऑफ इंडिया ने भी 7 अक्टूबर से अपनी संबंधित लेंडिंग दर को 8.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.35 प्रतिशत किया है।


इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक में बदलाव


इंडियन बैंक की रेपो आधारित लेंडिंग दर 7.95 प्रतिशत से बढ़कर 8.20 प्रतिशत बताई गई है। बैंक ऑफ बड़ौदा की बेंचमार्क रिटेल लोन लेंडिंग रेट 8 अक्टूबर से 8.15 प्रतिशत हो गई है। वहीं, केनरा बैंक ने 9 अक्टूबर से अपनी रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट संशोधित कर 8.25 प्रतिशत कर दी है।


इन बैंकों की होम लोन दरें कितनी हैं?


उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, छह सरकारी बैंकों की शुरुआती होम लोन ब्याज दरें इस प्रकार बताई गई हैं:


- भारतीय स्टेट बैंक (SBI): 7.25 प्रतिशत

- पंजाब नेशनल बैंक (PNB): 7.45 प्रतिशत

- बैंक ऑफ इंडिया: 7.35 प्रतिशत

- इंडियन बैंक: 7.15 प्रतिशत

- बैंक ऑफ बड़ौदा: 7.20 प्रतिशत

- केनरा बैंक: 7.40 प्रतिशत


ये दरें ग्राहक की पात्रता, बैंक की शर्तों और लागू स्प्रेड के अनुसार अलग हो सकती हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित बैंक से वर्तमान दर की पुष्टि करना जरूरी है।


EMI पर क्या पड़ सकता है असर?


लेंडिंग दरों में बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक की EMI तुरंत बढ़ जाएगी। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उसका लोन किस बेंचमार्क से जुड़ा है और ब्याज दर रीसेट होने की तारीख क्या है। कुछ मामलों में EMI बढ़ सकती है, जबकि अन्य में लोन चुकाने की अवधि में बदलाव हो सकता है।


नया होम लोन लेने वाले ग्राहकों को केवल कम शुरुआती ब्याज दर देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। ब्याज दर के साथ प्रोसेसिंग फीस, अन्य शुल्क और लोन की शर्तों की तुलना करना भी जरूरी है।

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