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Business News: कच्चे तेल की कीमत 98 डॉलर से नीचे, भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। 7 नवंबर को ब्रेंट क्रूड 97.76 डॉलर और WTI 90.24 डॉलर पर रहा। जानिए भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की कितनी संभावना है।

7 नवंबर 2026, Alam Ki Khabar: अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में इस सप्ताह बड़ी हलचल देखने को मिली है। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। बाजार में अब ईरान के साथ जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने और खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है।


शुक्रवार, 6 नवंबर के कारोबार के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 97.76 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड 90.24 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। 7 नवंबर शनिवार होने के कारण इन आंकड़ों को पिछले कारोबारी सत्र का भाव समझना चाहिए। इस सप्ताह की शुरुआत में तेल की कीमतें इससे काफी ऊंचे स्तर पर थीं।


अमेरिकी चुनाव का तेल बाजार पर असर


अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बढ़त हासिल कर ली है। इस नतीजे से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए संसद में अपनी नीतियों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। चुनावी नतीजों के बाद निवेशकों के बीच यह उम्मीद बनी है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर अमेरिका बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपना सकता है।


तेल बाजार में कीमतें केवल मांग और आपूर्ति से ही तय नहीं होतीं, बल्कि युद्ध, प्रतिबंध और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसी परिस्थितियों का भी बड़ा प्रभाव पड़ता है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आवाजाही में रुकावट की आशंका ने पहले कीमतों को ऊपर पहुंचाया था। अब आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद से बाजार में दबाव दिखाई दे रहा है।


ट्रंप के रुख से भी बदला बाजार का मिजाज


चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप प्रशासन के ईरान को लेकर अगले कदम पर निवेशकों की नजर है। ट्रंप की ओर से तत्काल बड़े हमले की योजना नहीं होने के संकेतों और अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स की बढ़त ने तनाव कम होने की उम्मीदों को बल दिया है।


हालांकि, डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल करने का मतलब यह नहीं है कि युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के पास विदेश नीति और सैन्य कार्रवाई से जुड़े कई अधिकार बने रहते हैं। इसलिए तेल की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है।


क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?


अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत मिलने की संभावना जरूर बनती है, लेकिन इसका असर पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों पर तुरंत दिखाई देना जरूरी नहीं है। तेल कंपनियों की खरीद लागत के साथ रुपये-डॉलर की विनिमय दर, टैक्स, परिवहन और अन्य खर्च भी ईंधन की कीमत तय करने में भूमिका निभाते हैं।


यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में तेल कंपनियों की लागत घट सकती है। ऐसी स्थिति में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की गुंजाइश बन सकती है। फिलहाल किसी तत्काल कटौती की पुष्टि नहीं है।


7 नवंबर को प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम


शहर| पेट्रोल (₹/लीटर)| डीजल (₹/लीटर)

नई दिल्ली| 102.12| 95.20

मुंबई| 111.21| 97.83

कोलकाता| 113.51| 99.82

चेन्नई| 107.76| 99.55


इन शहरों में 7 नवंबर को जारी दरों के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स और अन्य स्थानीय शुल्क के कारण ईंधन के दाम अलग रहते हैं।


कुल मिलाकर, अमेरिकी चुनाव के बाद कच्चे तेल में आई गिरावट भारत के लिए राहत की उम्मीद जरूर जगाती है। लेकिन आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल सस्ता होने के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट का लगातार बने रहना और घरेलू स्तर पर तेल कंपनियों की ओर से कीमतों में संशोधन का इंतजार करना होगा।


पूरी खबर पढ़ने के लिए Alam Ki Khabar पढ़ें।

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