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Entertainment News: राम कपूर ने पिता के आखिरी दिनों का खोला राज, अंतिम इच्छा पूरी करने की कीमत परिवार से दूरी बनाकर चुकाई

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | अभिनेता राम कपूर ने अपने पिता अनिल बीली कपूर के कैंसर से लंबे संघर्ष, अंतिम दिनों और उनकी आखिरी इच्छा को लेकर खुलासा किया है। अभिनेता के मुताबिक इस फैसले के बाद उनके परिवार में गहरी दूरी पैदा हो गई।

मुंबई, 2 सितंबर। अभिनेता राम कपूर ने अपने पिता अनिल बीली कपूर के निधन से जुड़े उस बेहद निजी और भावुक दौर के बारे में विस्तार से बात की है, जिसके बारे में अब तक उन्होंने सीमित जानकारी ही साझा की थी। एक हालिया इंटरव्यू में राम कपूर ने बताया कि उनके पिता लंबे समय तक कैंसर से जूझते रहे और बीमारी के दोबारा गंभीर होने के बाद उन्होंने अपने बेटे के सामने अपनी आखिरी इच्छा रखी थी। अभिनेता का कहना है कि पिता की इच्छा का सम्मान करने का फैसला उनके लिए आसान नहीं था और इसकी वजह से उनके अपने परिवार के साथ रिश्तों में भी गहरी दरार आ गई।

राम कपूर ने यह खुलासा नयनदीप रक्षित को दिए इंटरव्यू में किया। इससे पहले रियलिटी शो 'लॉकअप सीजन 2' के दौरान भी उन्होंने अपने पिता की मृत्यु से जुड़े एक बेहद निजी राज का जिक्र किया था। अब उन्होंने उस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि और अपने पिता के अंतिम दिनों के बारे में विस्तार से बताया है।

दस साल तक कैंसर से लड़े पिता

राम कपूर के अनुसार उनके पिता अनिल बीली कपूर को 63 वर्ष की उम्र में पैंक्रियाटिक कैंसर का पता चला था। डॉक्टरों ने उस समय बीमारी को गंभीर और इलाज के लिहाज से कठिन बताया था। इसके बावजूद इलाज कराया गया और उन्होंने करीब 18 दौर की कीमोथेरेपी का सामना किया।

इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और उन्होंने बीमारी को पीछे छोड़ते हुए लगभग एक दशक तक सामान्य जीवन बिताया। परिवार के लिए यह समय किसी बड़ी राहत से कम नहीं था। लेकिन करीब 73 वर्ष की उम्र में कैंसर ने दोबारा उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

दूसरी बार बीमारी पहले से ज्यादा गंभीर थी। कोरोना महामारी के दौर में अनिल कपूर सिंगापुर में थे और उनकी स्वास्थ्य स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। राम कपूर के मुताबिक उस समय इलाज के विकल्प बेहद सीमित रह गए थे।

पिता ने बेटे से रखी थी आखिरी इच्छा

राम कपूर ने बताया कि इसी कठिन दौर में उनके पिता ने उनसे फोन पर बात की। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने बेटे के सामने अपनी ऐसी इच्छा रखी, जिसे सुनना किसी भी संतान के लिए बेहद मुश्किल हो सकता है।

अभिनेता के मुताबिक उनके पिता अब लंबे इलाज और लगातार बढ़ती तकलीफ से थक चुके थे। वह नहीं चाहते थे कि उनकी जिंदगी के आखिरी दिन केवल दर्द और मेडिकल प्रक्रियाओं के बीच गुजरें। उन्होंने राम से अपने अंतिम समय में उनके साथ रहने और उनकी इच्छा का सम्मान करने को कहा।

राम कपूर ने बताया कि उनके पिता चाहते थे कि यह बात परिवार में पहले से सार्वजनिक न हो। वह अपने बेटे को अपने पास रखना चाहते थे और अकेले मृत्यु का सामना नहीं करना चाहते थे। अभिनेता के अनुसार उनके पिता मौत से डरते नहीं थे, लेकिन अंतिम क्षणों में अकेले रहने की आशंका उन्हें परेशान करती थी।

अंतिम संस्कार को लेकर भी थी पिता की खास इच्छा

राम कपूर ने इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता ने अपनी विदाई को लेकर भी कुछ इच्छाएं व्यक्त की थीं। वह चाहते थे कि उनके निधन के बाद परिवार अत्यधिक शोक में न डूबे और अंतिम संस्कार उसी दिन कर दिया जाए।

अभिनेता के लिए यह पूरा समय बेहद भावनात्मक और मानसिक रूप से कठिन था। उन्होंने कहा कि पिता को गंभीर दर्द, बेचैनी और मानसिक उलझन के बीच देखना आसान नहीं था। ऐसे समय में बेटे के तौर पर उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वह अपने पिता का साथ कैसे बनाए रखें और उनकी इच्छा का सम्मान कैसे करें।

राम ने कहा कि पिता के अंतिम समय में उनके साथ रहना उनके लिए एक तरह से जिम्मेदारी थी। वह चाहते थे कि जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी अपनी शर्तों पर जी, उसकी अंतिम विदाई भी उसकी इच्छा और गरिमा के अनुरूप हो।

पिता की मौत के बाद क्यों महसूस हुई राहत?

राम कपूर ने अपने पिता की मृत्यु के बाद महसूस हुई भावनाओं के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय उन्हें केवल दुख ही नहीं हुआ, बल्कि एक तरह की राहत भी महसूस हुई।

इस राहत की वजह पिता का लंबे समय से झेल रहा असहनीय दर्द था। राम के लिए पिता का चले जाना जितना दुखद था, उतना ही यह सुकून देने वाला भी था कि अब उन्हें कैंसर की पीड़ा नहीं झेलनी पड़ेगी।

अभिनेता ने अपने पिता की जिंदगी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जिया था। इसलिए राम चाहते थे कि उनकी विदाई भी उसी गरिमा के साथ हो।

राम कपूर ने यह भी बताया कि इस अनुभव ने उनके भीतर मृत्यु को लेकर मौजूद डर को काफी हद तक बदल दिया। पिता के अंतिम समय को करीब से देखने के बाद मृत्यु उनके लिए पहले जैसी भयावह नहीं रही।

पिता के फैसले की जानकारी परिवार को बाद में हुई

इस पूरे मामले का सबसे कठिन असर राम कपूर के निजी जीवन पर पड़ा। अभिनेता के मुताबिक उनकी मां और बहन को पिता की उस अंतिम इच्छा के बारे में उनके निधन के बाद पता चला।

राम कपूर का कहना है कि उनके इस फैसले को लेकर परिवार में गंभीर मतभेद पैदा हुए। स्थिति इतनी बिगड़ी कि उनकी मां और बहन ने उनसे बातचीत करना बंद कर दिया। अभिनेता के मुताबिक यह दूरी पांच साल से ज्यादा समय से बनी हुई है।

परिवार से रिश्ते टूटने के बावजूद राम कपूर अपने फैसले को लेकर पछतावा महसूस नहीं करते। उनका मानना है कि पिता के अंतिम समय में उनके साथ रहना और उनकी इच्छा का सम्मान करना एक बेटे के रूप में उनका कर्तव्य था।

एक बेटे के लिए सबसे कठिन फैसला

राम कपूर की यह कहानी केवल एक अभिनेता के निजी जीवन का किस्सा नहीं है, बल्कि यह उस कठिन स्थिति की ओर भी ध्यान खींचती है, जब कोई परिवार किसी गंभीर और लाइलाज बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति की आखिरी इच्छाओं के सामने खड़ा होता है।

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में इलाज, दर्द, उम्मीद और मरीज की इच्छा के बीच परिवार अक्सर बेहद कठिन फैसलों से गुजरता है। ऐसे समय में हर सदस्य की भावनाएं अलग हो सकती हैं। राम कपूर ने अपने अनुभव के जरिए इसी व्यक्तिगत संघर्ष को सामने रखा है।

उनका बयान यह भी दिखाता है कि किसी व्यक्ति के अंतिम समय से जुड़े फैसले का असर सिर्फ उस क्षण तक सीमित नहीं रहता। कई बार उसका प्रभाव वर्षों तक परिवार के रिश्तों पर बना रहता है।

राम कपूर ने जिस तरह अपने पिता के अंतिम दिनों को याद किया, उसमें दुख के साथ-साथ यह भावना भी दिखाई देती है कि वह अपने पिता की इच्छा के साथ खड़े रहे। परिवार की नाराजगी और वर्षों की दूरी के बावजूद अभिनेता के अनुसार उन्हें अपने फैसले पर पछतावा नहीं है।

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