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Entertainment News: दुर्गा पूजा में क्यों छाया है श्रेया घोषाल का 'ढाक बजा कांसोर बजा'? जानिए खासियत

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | Shreya Ghoshal का बंगाली गीत Dhak Baja Kashor Baja दुर्गा पूजा के उत्सव में खास पहचान रखता है। जानिए गीत, संगीत और धुनुची नाच से जुड़ी दिलचस्प बातें।

दुर्गा पूजा के उत्सव में बंगाली गीत की खास धूम


दुर्गा पूजा का त्योहार आते ही पंडालों में ढाक की थाप, शंख की गूंज और भक्ति से भरे गीतों का माहौल बनने लगता है। इस उत्सवी रंग में श्रेया घोषाल की आवाज में गाया गया बंगाली गीत 'ढाक बजा कांसोर बजा' भी खास पहचान रखता है। पारंपरिक धुनों और जोशीले संगीत से सजा यह गीत मां दुर्गा के स्वागत और उत्सव की उमंग को दर्शाता है।


क्या है 'ढाक बजा कांसोर बजा' की खासियत?


बंगाली दुर्गा पूजा में संगीत और नृत्य का अपना अलग महत्व है। 'ढाक बजा कांसोर बजा' गीत में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि और आधुनिक संगीत का मेल सुनाई देता है। इसकी लय ऐसी है कि पूजा पंडालों में लोग उत्साह के साथ नाचते-गाते नजर आते हैं।


गीत का शीर्षक भी बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा है। ढाक एक पारंपरिक ढोल है, जबकि कांसर कांस्य से बना वाद्य है, जिसे पूजा और उत्सव के दौरान बजाया जाता है। शंखनाद और महिलाओं की शुभ ध्वनि के साथ ये आवाजें दुर्गा पूजा के माहौल को और खास बनाती हैं।


श्रेया घोषाल की आवाज ने गीत को दी अलग पहचान


इस गीत को मशहूर गायिका श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी है। संगीतकार जीत गांगुली और गीतकार प्रिय चटर्जी का नाम भी इस गीत से जुड़ा है। इन कलाकारों के योगदान से गीत में बंगाली उत्सव की ऊर्जा और आधुनिक संगीत का रंग दिखाई देता है।


दुर्गा पूजा के दौरान ऐसे गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं होते, बल्कि लोगों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का काम भी करते हैं। इसी वजह से उत्सव के दिनों में इनकी लोकप्रियता फिर चर्चा में आ जाती है।


क्या होता है आगमोनी गीत?


बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा में 'आगमोनी' गीतों का विशेष स्थान है। इन गीतों में मां दुर्गा के मायके आगमन और उनके स्वागत की भावनाएं व्यक्त की जाती हैं। बंगाली संस्कृति में मां दुर्गा को बेटी के रूप में देखने की परंपरा भी इस भाव को खास बनाती है।


ढाक, शंख और कांसर की ध्वनियां इसी स्वागत की भावना को उत्सव में बदल देती हैं। 'ढाक बजा कांसोर बजा' जैसे गीत इसी सांस्कृतिक माहौल की याद दिलाते हैं।


धुनुची नाच से बढ़ती है पंडालों की रौनक


दुर्गा पूजा के दौरान बंगाल में धुनुची नाच का खास आकर्षण रहता है। इसमें श्रद्धालु धुनुची नाम के पारंपरिक पात्र को हाथ में लेकर ढाक की ताल पर नृत्य करते हैं। पूजा पंडालों में यह नृत्य भक्ति और उत्साह का सुंदर संगम बन जाता है।


तेज लय वाले बंगाली पूजा गीत इस माहौल को और जीवंत बना देते हैं। महिलाएं और पुरुष पारंपरिक पोशाकों में नृत्य करते हुए उत्सव की खुशियां साझा करते हैं।


बॉलीवुड सितारों में भी दुर्गा पूजा का उत्साह


दुर्गा पूजा का उत्साह बंगाल तक सीमित नहीं है। देश के कई शहरों में बड़े पूजा पंडाल सजते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अभिनेत्री काजोल, सुष्मिता सेन और बिपाशा बसु जैसी हस्तियां भी दुर्गा पूजा समारोहों में शामिल होने के लिए जानी जाती हैं।


गीत-संगीत, पारंपरिक पूजा और सामूहिक उत्सव इस पर्व को खास बनाते हैं। श्रेया घोषाल का यह बंगाली गीत भी इसी उत्सवी माहौल की याद दिलाता है, जहां संगीत के साथ भक्ति और सांस्कृतिक पहचान का मेल देखने को मिलता है।

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