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Crime News: टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में ₹34 हजार और विदेश में नौकरी का लालच देने का आरोप, हैंडलर की तलाश तेज

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में आरोपियों को कथित तौर पर पैसे और विदेश में नौकरी का लालच देने की जांच हो रही है। जानिए हैंडलर, जांगी ऐप, QR कोड भुगतान और हथियारों की सप्लाई से जुड़े अहम पहलू।

20 अक्टूबर 2026, Alam Ki Khabar: मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई कथित फायरिंग के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब कथित साजिश के पीछे मौजूद लोगों, पैसों के लेन-देन और हथियारों की व्यवस्था से जुड़ी कड़ियों की पड़ताल कर रही है। जांच से जुड़ी रिपोर्टों में आरोपियों को करीब 34 हजार रुपये देने और विदेश में नौकरी दिलाने का लालच दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन दावों और कथित नेटवर्क के सभी पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।


पैसे और विदेश में नौकरी का कथित लालच


जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपियों को कथित तौर पर टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने के बदले रकम देने का वादा किया गया था। इसके साथ ही विदेश में नौकरी दिलाने का लालच भी दिए जाने का आरोप है। पुलिस की जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित तौर पर निर्देश किसने दिए, रकम का इंतजाम कहां से हुआ और आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन लोग थे।


अनिल पंडित नाम के व्यक्ति का नाम भी कथित हैंडलर के तौर पर सामने आया है। उसके कैलिफोर्निया से नेटवर्क चलाने के संदेह की चर्चा है, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी जरूरी है। किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।


जांगी ऐप और QR कोड भुगतान की जांच


रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों और कथित संपर्कों के बीच जांगी ऐप के जरिए बातचीत होने की बात सामने आई है। भुगतान के लिए स्थानीय दुकानदारों या अन्य लोगों के QR कोड इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं कि किन खातों या डिजिटल भुगतान माध्यमों से रकम भेजी गई और उन लेन-देन का कथित घटना से क्या संबंध है।


डिजिटल बातचीत, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित मोबाइल फोन की जांच से कथित नेटवर्क की कड़ियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ऐप या QR कोड के इस्तेमाल से जुड़ी हर जानकारी को अभी जांच के दायरे में मौजूद दावा ही माना जाना चाहिए।


मुंबई से कोटा तक पहुंचने की कहानी


पुलिस के मुताबिक, कथित फायरिंग के बाद आरोपियों ने अपनी आवाजाही के लिए अलग-अलग परिवहन साधनों का इस्तेमाल किया। जांच में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, वे मुंबई से निकलकर सूरत होते हुए ट्रेन से आगे बढ़े और राजस्थान के कोटा में पकड़े गए। पुलिस ने उनकी यात्रा के दौरान इस्तेमाल किए गए रास्तों और संपर्कों की भी पड़ताल की है।


रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने पहचान छिपाने के लिए कपड़े बदले और बाल कटवाए। उनके पास से हथियार बरामद नहीं होने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए हथियार कहां गए और उन्हें किसने उपलब्ध कराया था।


हथियारों की सप्लाई और छिपाकर रखने का आरोप


जांच से जुड़ी जानकारी में आरोपियों को हथियार उपलब्ध कराने के लिए संपर्कों और तय स्थानों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई गई है। कथित तौर पर हथियार किसी जगह छिपाकर रखे जाते थे और फिर उनकी लोकेशन आरोपियों तक पहुंचाई जाती थी। इस दावे की पुष्टि के लिए पुलिस को बरामदगी, डिजिटल साक्ष्य और आरोपियों के बयानों की जांच करनी होगी।


फिलहाल हथियारों की आपूर्ति करने वाले लोगों और कथित हैंडलर की भूमिका इस मामले के प्रमुख जांच बिंदुओं में शामिल है।


दूसरे हमले से संबंध की भी पड़ताल


रिपोर्टों में अमृतसर के एक कारोबारी पर हुए कथित हमले का जिक्र भी किया गया है। रेहान और फूल सिंह नाम के आरोपियों के संबंध में सामने आए इस दावे की जांच के जरिए पुलिस यह जानने की कोशिश कर सकती है कि दोनों घटनाओं के बीच कोई वास्तविक कड़ी है या नहीं। केवल नाम सामने आने से किसी दूसरे मामले में उनकी भूमिका साबित नहीं होती।


पुलिस जांच में आगे क्या होगा?


मुंबई पुलिस की जांच अब कथित साजिश की तैयारी, आरोपियों की गतिविधियों, डिजिटल भुगतान, हथियारों के स्रोत और संभावित सहयोगियों पर केंद्रित है। जांच एजेंसियों के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि फायरिंग की योजना किसने बनाई और इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।


फिलहाल मामले में सामने आए कई विवरण सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी है। जांच आगे बढ़ने और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही कथित नेटवर्क की वास्तविक भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।


यह भी पढ़ें: देश की प्रमुख अपराध खबरों और पुलिस जांच से जुड़े ताजा अपडेट के लिए Alam Ki Khabar पढ़ते रहें।

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