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गुड़ vs चीनी: क्या वाकई गुड़ हेल्दी है? डायबिटीज और वजन घटाने वालों के लिए डॉक्टर की अहम चेतावनी

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क्या गुड़ चीनी का हेल्दी विकल्प है? डॉक्टरों के अनुसार गुड़ और चीनी शरीर पर लगभग समान असर डालते हैं। डायबिटीज और वजन घटाने वालों के लिए जरूरी सावधानी जानें।

पटना/आलम की खबर:भारतीय रसोई में चीनी और गुड़ दोनों का इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है। चाय से लेकर मिठाइयों तक मीठे स्वाद के लिए इन्हीं दो विकल्पों का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है। लेकिन बदलते समय के साथ जब लोग सेहत के प्रति जागरूक हो रहे हैं, तो गुड़ को चीनी का “हेल्दी विकल्प” माना जाने लगा है। यही वजह है कि आजकल डायबिटीज मरीज और वजन घटाने वाले लोग भी गुड़ को लेकर अधिक भरोसा दिखाने लगे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या गुड़ वास्तव में उतना ही हेल्दी है जितना माना जाता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, मीठे पदार्थों का शरीर पर प्रभाव उनके ग्लाइसेमिक इंडेक्स और शुगर कंटेंट पर निर्भर करता है। जब शरीर में कोई भी मीठा पदार्थ जाता है तो वह ग्लूकोज में बदल जाता है और सीधे ब्लड शुगर को प्रभावित करता है। इस प्रक्रिया में शरीर का पैंक्रियाज चीनी और गुड़ में कोई विशेष अंतर नहीं करता।

वरिष्ठ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी और गुड़ दोनों का शरीर पर प्रभाव लगभग समान ही होता है। अंतर केवल संरचना और खनिज तत्वों की मात्रा का होता है, लेकिन वह इतना अधिक नहीं कि इसे पूरी तरह “हेल्दी विकल्प” कहा जा सके।

चीनी और गुड़ का वैज्ञानिक फर्क

डॉक्टरों के अनुसार चीनी लगभग 100% सुक्रोज होती है, जिसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स करीब 65 होता है। वहीं गुड़ में 65 से 85 प्रतिशत तक सुक्रोज पाया जाता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 84 होता है। इसका मतलब यह है कि गुड़ चीनी की तुलना में ब्लड शुगर को और तेजी से बढ़ा सकता है।

ग्लाइसेमिक इंडेक्स वह पैमाना है जो यह बताता है कि कोई भी कार्बोहाइड्रेट कितनी तेजी से शरीर में शुगर बढ़ाता है। हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजें डायबिटीज मरीजों के लिए खतरनाक मानी जाती हैं।

गुड़ में पोषक तत्व कितने प्रभावी?

गुड़ में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और कुछ एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, लेकिन इनकी मात्रा उतनी अधिक नहीं होती जितनी अक्सर प्रचार में बताई जाती है। उदाहरण के तौर पर 100 ग्राम गुड़ में लगभग 11 मिलीग्राम आयरन होता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि लोग एक दिन में 100 ग्राम गुड़ नहीं खाते।

अधिकांश लोग 10 से 15 ग्राम गुड़ ही सेवन करते हैं, जिससे शरीर को सिर्फ लगभग 1 मिलीग्राम आयरन मिलता है। यह मात्रा इतनी कम है कि इसे आसानी से पालक या अन्य हरी सब्जियों से भी प्राप्त किया जा सकता है।

गुड़ को हेल्दी समझने की सबसे बड़ी भूल

विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग “नेचुरल” शब्द सुनकर इसे बिना सीमा के खाना शुरू कर देते हैं। एक शोध के अनुसार, जब किसी पैकेज पर “नेचुरल” लिखा होता है तो लोग उसे 30% से 40% तक ज्यादा मात्रा में सेवन करते हैं।

डॉक्टर स्पष्ट रूप से कहते हैं कि गुड़ और चीनी दोनों ही शरीर में समान रूप से ग्लूकोज बनाते हैं, जिससे फैटी लिवर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और पेट की चर्बी बढ़ने का खतरा रहता है।

डायबिटीज मरीजों के लिए चेतावनी

डायबिटीज मरीजों के लिए गुड़ को सुरक्षित विकल्प मानना सबसे बड़ी गलती हो सकती है। क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि डायबिटीज मरीज न तो चीनी का अधिक सेवन करें और न ही गुड़ का।

वजन घटाने में भी बाधा

जो लोग वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए भी गुड़ कोई जादुई विकल्प नहीं है। इसमें भी कैलोरी और शुगर की मात्रा अधिक होती है। अधिक सेवन से वजन बढ़ने की संभावना रहती है, खासकर जब इसे रोजाना अधिक मात्रा में लिया जाए।

बाजार में मिलने वाले गुड़ की सच्चाई

विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि बाजार में मिलने वाले कई गुड़ प्रोसेसिंग के दौरान केमिकल्स और अशुद्धियों से प्रभावित हो सकते हैं। इससे सेहत को और नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है।

कुछ लोगों में अधिक मात्रा में गुड़ के सेवन से गैस, अपच और एलर्जी जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं।

असली सीख क्या है?

डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि चीनी और गुड़ के बीच चुनाव करने से ज्यादा जरूरी यह है कि आप मात्रा पर नियंत्रण रखें। किसी भी मीठे पदार्थ का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।

एक साधारण नियम के अनुसार, कम मात्रा में चीनी या गुड़ दोनों का सीमित उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इन्हें “हेल्दी फूड” मानकर अधिक सेवन करना गलत है।

निष्कर्ष:

गुड़ को पूरी तरह हेल्दी मान लेना एक भ्रम है। यह चीनी से थोड़ा अलग जरूर है, लेकिन शरीर पर इसका प्रभाव लगभग समान ही होता है। असली स्वास्थ्य का राज किसी एक विकल्प को बदलने में नहीं, बल्कि संतुलित और नियंत्रित खानपान में छिपा है।

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