:
Breaking News

Heatwave During Pregnancy | गर्भावस्था में भीषण गर्मी से बच्चों के दिमागी विकास पर असर, नए अध्ययन में बड़ा खुलासा

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

नए वैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया है कि गर्भावस्था और जन्म के शुरुआती महीनों में अत्यधिक गर्मी बच्चों के मस्तिष्क के विकास और भविष्य के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।

नई दिल्ली, 24 जुलाई।जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल मौसम और पर्यावरण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में सामने आया है कि गर्भावस्था और जन्म के बाद के शुरुआती महीनों में अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने वाले बच्चों के मस्तिष्क का विकास प्रभावित हो सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार जीवन के शुरुआती संवेदनशील दौर में लगातार अधिक तापमान रहने से दिमाग के उन हिस्सों पर असर पड़ सकता है जो सीखने, भावनाओं को समझने, निर्णय लेने और व्यवहार को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्ययन में यह भी संकेत मिला कि ऐसे बच्चों में आगे चलकर चिड़चिड़ापन, आक्रामक व्यवहार और सामाजिक नियमों का पालन करने में कठिनाई जैसी समस्याएं अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी गर्भवती महिलाओं में डिहाइड्रेशन, थकान, हीट स्ट्रेस और रक्तचाप में बदलाव जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा देती है। इससे प्लेसेंटा की कार्यप्रणाली, भ्रूण तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति तथा मस्तिष्क के विकास से जुड़े जैविक संकेत प्रभावित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि शरीर में बढ़ने वाला तनाव, सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अध्ययन के अनुसार लंबे समय तक रहने वाली हीटवेव नवजात और छोटे बच्चों के लिए भी अधिक जोखिम पैदा करती है क्योंकि उनके शरीर में तापमान नियंत्रित करने की क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती। अच्छी बात यह रही कि अध्ययन में कम तापमान या सामान्य ठंड के संपर्क से बच्चों के मस्तिष्क पर ऐसा प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया। वैज्ञानिकों ने गर्भवती महिलाओं को भीषण गर्मी के दौरान पर्याप्त पानी पीने, तेज धूप से बचने, हल्के कपड़े पहनने और किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की सलाह दी है।

यह भी पढ़ें:

देशभर में मानसून फिर सक्रिय, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

बिहार में गर्मी और बारिश के बदलते मौसम पर IMD की चेतावनी

विशेष टिप्पणी

जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बन चुका है। गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की सुरक्षा के लिए हीटवेव के दौरान विशेष सावधानी, जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता समय की जरूरत है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *