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Census 2026 Rules: गलत जानकारी देने पर 3 साल की सजा और जुर्माना, सरकार ने दी सख्त चेतावनी

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जनगणना 2026 के दौरान गलत जानकारी देने या तथ्य छिपाने पर 3 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। सरकार ने साफ किया है कि सभी जानकारी का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

देशभर में चल रही जनगणना 2026 के दौरान सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की गलत जानकारी देना या तथ्य छिपाना अब गंभीर कानूनी अपराध माना जाएगा। जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए प्रशासन ने सख्त चेतावनी जारी की है, जिसके तहत गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह प्रावधान जनगणना अधिनियम 1948 के तहत लागू है। अधिनियम की धारा 11 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाता है, तो उस पर एक हजार रुपये तक का जुर्माना और अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। यह नियम केवल नागरिकों पर ही नहीं, बल्कि जनगणना कार्य में लगे प्रगणकों पर भी समान रूप से लागू होगा।

जनगणना अभियान के तहत इस समय देश के विभिन्न हिस्सों में स्वगणना और घर-घर सर्वे का काम तेजी से चल रहा है। इस दौरान कई क्षेत्रों से यह शिकायतें सामने आई हैं कि कुछ लोग अपनी वास्तविक संपत्ति, परिवार की संख्या या अन्य जानकारी छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने निगरानी और जांच व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है।

अधिकारियों का कहना है कि जनगणना में एकत्र की जाने वाली जानकारी का हर स्तर पर भौतिक सत्यापन किया जाएगा। यदि किसी भी स्तर पर असमानता या गड़बड़ी पाई जाती है तो तत्काल पुनः जांच कराई जाएगी। इसका उद्देश्य केवल सटीक आंकड़े जुटाना है ताकि देश की वास्तविक जनसंख्या और सामाजिक संरचना का सही आकलन हो सके।

जनगणना कार्य में लगे अधिकारी लगातार घर-घर जाकर लोगों से जानकारी एकत्र कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में प्रगणक (enumerators) द्वारा हर विवरण की जांच की जा रही है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति के पास अधिक संपत्ति या वाहन हैं और वह कम जानकारी देता है, तो उसे रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन के आधार पर जांचा जाएगा।

इस संबंध में अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में यदि गंभीर अनियमितता पाई जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रगणक पर भी तय की जाएगी। वहीं किसी क्षेत्र में असामान्य रूप से कम या गलत आंकड़े दर्ज होने पर पुनः सर्वे किया जाएगा।

गोरखपुर के चार्ज अधिकारी और एसडीएम सदर Deepak Gupta ने बताया कि जनगणना टीम पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हर जानकारी मौके पर जाकर सत्यापित की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की गलती की गुंजाइश न रहे।

जिला जनगणना अधिकारी Vineet Kumar Singh ने लोगों से अपील की है कि वे बिना किसी डर के सही जानकारी दें। उन्होंने कहा कि जनगणना में दी गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और इसे किसी अन्य विभाग के साथ साझा नहीं किया जाता।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनगणना का संबंध किसी प्रकार की कर वसूली, संपत्ति जब्ती या सरकारी कार्रवाई से नहीं है। यह केवल देश की जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही डेटा तैयार करने के लिए किया जा रहा है।

इस बार जनगणना फॉर्म में कुल 34 प्रश्न शामिल किए गए हैं, जिनमें परिवार की संरचना, शिक्षा, आवास, रोजगार और अन्य सामाजिक पहलुओं से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं। कुछ सवालों ने लोगों के बीच चर्चा भी बढ़ा दी है, खासकर परिवार की संरचना और दंपति की संख्या से जुड़े प्रश्नों को लेकर।

अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की एक से अधिक पत्नियां हैं तो उसे अलग-अलग परिवार इकाई के रूप में दर्ज किया जाएगा। वहीं परिवार के मुखिया का निर्धारण लिंग या उम्र के आधार पर नहीं बल्कि परिवार के निर्णय के आधार पर किया जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि इस बार जनगणना का उद्देश्य केवल आंकड़े इकट्ठा करना नहीं बल्कि समाज की वास्तविक संरचना को समझना भी है। इसलिए हर प्रश्न को वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण से तैयार किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सटीक जनगणना किसी भी देश की नीति निर्माण प्रक्रिया की रीढ़ होती है। गलत आंकड़े न केवल योजनाओं को प्रभावित करते हैं बल्कि संसाधनों के वितरण में भी असंतुलन पैदा कर सकते हैं।

फिलहाल जनगणना टीम पूरे देश में सक्रिय है और हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सही जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है, ताकि देश का विकास सही दिशा में हो सके।

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