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Kharif Crops MSP 2026-27: धान, कपास और मक्का समेत कई फसलों का MSP बढ़ा, किसानों को बड़ी राहत

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केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। धान, कपास, मक्का, बाजरा, मूंग और सूरजमुखी समेत कई फसलों के समर्थन मूल्य में इजाफा किया गया है। Ashwini Vaishnaw ने फैसले की जानकारी दी।

केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन से पहले किसानों को बड़ी राहत देते हुए वर्ष 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में इस महत्वपूर्ण फैसले पर मुहर लगाई गई। सरकार का दावा है कि MSP में यह बढ़ोतरी किसानों की आय बढ़ाने, खेती को अधिक लाभकारी बनाने और कृषि क्षेत्र को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

इस फैसले के तहत धान, कपास, मक्का, बाजरा, अरहर, मूंग, तिल, सूरजमुखी और अन्य खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य में इजाफा किया गया है। सरकार के अनुसार इस बार सबसे अधिक बढ़ोतरी सूरजमुखी के MSP में की गई है, जिससे तेलहन फसलों की खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कृषि विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि MSP में बढ़ोतरी का असर सीधे किसानों की आय और बाजार में उनकी सौदेबाजी की क्षमता पर दिखाई देगा।

केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार लगातार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी लागत से अधिक लाभ मिले, यही सरकार की प्राथमिकता है। MSP बढ़ाने का उद्देश्य केवल समर्थन मूल्य बढ़ाना नहीं बल्कि खेती को स्थायी और लाभकारी बनाना भी है।

सरकार के मुताबिक सूरजमुखी के बीज के MSP में सबसे ज्यादा 622 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इसके अलावा कपास पर 557 रुपये, नाइजरसीड पर 515 रुपये और तिल पर 500 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। धान और अन्य प्रमुख फसलों के समर्थन मूल्य में भी इजाफा किया गया है, जिससे करोड़ों किसानों को फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, डीजल, मजदूरी और सिंचाई पर किसानों का खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ चुका है। ऐसे में MSP में बढ़ोतरी किसानों के लिए राहत लेकर आई है। खासकर छोटे और मध्यम किसानों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे बाजार में अपनी फसल अक्सर कम कीमत पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं।

सरकार ने यह भी दावा किया है कि उत्पादन लागत के मुकाबले मूंग की खेती करने वाले किसानों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। अनुमान के मुताबिक मूंग पर किसानों को लगभग 61 प्रतिशत तक लाभ मिल सकता है। इसके अलावा बाजरा और मक्का पर करीब 56 प्रतिशत तथा अरहर पर लगभग 54 प्रतिशत लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। सरकार का कहना है कि इससे किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ दलहन और तिलहन उत्पादन की ओर भी आकर्षित होंगे।

कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि MSP में बढ़ोतरी केवल आर्थिक फैसला नहीं बल्कि रणनीतिक कदम भी है। भारत लंबे समय से खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादन को मजबूत करने पर जोर देता रहा है। ऐसे में दलहन और तिलहन जैसी फसलों को प्रोत्साहन देना जरूरी माना जा रहा है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके और घरेलू उत्पादन बढ़े।

हालांकि MSP बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार के फैसले का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही सवाल भी उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि केवल MSP घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है, जब तक कि किसानों की फसल की प्रभावी सरकारी खरीद सुनिश्चित न हो। कई राज्यों में किसान अब भी अपनी उपज MSP से कम कीमत पर बेचने को मजबूर होते हैं। ऐसे में खरीद प्रणाली को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।

दूसरी ओर सरकार का दावा है कि किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए कई योजनाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। केंद्र सरकार डिजिटल कृषि, आधुनिक तकनीक, सिंचाई योजनाओं और कृषि बाजार सुधारों के जरिए खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में प्रयास कर रही है। सरकार का मानना है कि MSP में बढ़ोतरी से किसानों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

देशभर के किसान संगठनों की प्रतिक्रिया भी इस फैसले पर सामने आने लगी है। कई किसान संगठनों ने MSP बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया है और इसे सकारात्मक कदम बताया है। हालांकि कुछ संगठनों ने यह भी कहा कि यदि MSP के साथ मजबूत खरीद व्यवस्था लागू की जाए, तो किसानों को वास्तविक लाभ मिल सकेगा। उनका कहना है कि कई बार MSP घोषित होने के बावजूद किसानों को बाजार में कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ती है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ सीजन से पहले MSP बढ़ाने का फैसला किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित करेगा। इससे धान, मक्का, दलहन और तिलहन उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना भी जताई जा रही है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं, क्योंकि किसानों की आमदनी बढ़ने का असर स्थानीय बाजारों पर भी पड़ता है।

फिलहाल केंद्र सरकार के इस फैसले को किसानों के लिए बड़ी राहत और महत्वपूर्ण आर्थिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि बढ़े हुए MSP का लाभ उन्हें जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से मिल पाता है।

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