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केरल में कांग्रेस ने वीडी सतीशन को बनाया सीएम फेस, खत्म हुआ सस्पेंस

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केरल में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर जारी सस्पेंस खत्म हो गया है। कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन को सीएम फेस घोषित किया है। UDF की जीत के बाद पार्टी में चल रही अंदरूनी खींचतान पर अब विराम लग गया है।

केरल की राजनीति में पिछले कई दिनों से मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहा सस्पेंस आखिरकार समाप्त हो गया है। कांग्रेस हाईकमान ने गुरुवार को वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस घोषणा के साथ ही पार्टी के भीतर लंबे समय से जारी अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लग गया है। कांग्रेस महासचिव दीपा दासमुंशी ने आधिकारिक रूप से उनके नाम की घोषणा की।

केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की बड़ी जीत के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया था। पार्टी के भीतर कई बड़े नेताओं के नाम सामने आ रहे थे और समर्थकों के बीच लगातार लॉबिंग भी चल रही थी। आखिरकार केंद्रीय नेतृत्व ने विचार-विमर्श के बाद वीडी सतीशन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया।

वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगने के बाद कांग्रेस खेमे में उत्साह का माहौल देखने को मिला। पार्टी नेताओं का कहना है कि सतीशन संगठन पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेता हैं और विपक्ष के नेता के तौर पर उन्होंने पिछले वर्षों में सरकार के खिलाफ प्रभावी भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में पार्टी ने केरल में अपनी स्थिति मजबूत की और जनता के बीच सरकार विरोधी माहौल तैयार करने में सफलता हासिल की।

केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस गठबंधन UDF ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया। 140 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन ने 102 सीटें जीतकर एलडीएफ सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। पिछले दस वर्षों से राज्य की सत्ता पर काबिज वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) इस बार जनता का भरोसा बरकरार नहीं रख सका। चुनाव परिणाम आने के बाद से ही कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई थीं।

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में वीडी सतीशन के अलावा केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम भी प्रमुखता से सामने आए थे। तीनों नेताओं के समर्थक लगातार अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे थे। पार्टी के भीतर कई दौर की बैठकों और विचार-विमर्श के बाद फैसला कांग्रेस हाईकमान पर छोड़ दिया गया था।

सूत्रों के अनुसार अंतिम निर्णय लेने में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी की भूमिका अहम रही। शीर्ष नेतृत्व ने संगठनात्मक मजबूती, जनस्वीकार्यता और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए वीडी सतीशन के नाम पर सहमति बनाई। पार्टी का मानना है कि सतीशन के नेतृत्व में सरकार और संगठन दोनों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।

नाम की घोषणा के बाद कांग्रेस नेताओं ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि वे पार्टी के फैसले का पूरा सम्मान करते हैं और सभी कार्यकर्ता मिलकर नए नेतृत्व के साथ आगे बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा के बाद निर्णय लिए जाते हैं और अंततः पार्टी हित सबसे ऊपर होता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री चेहरा बनाना कांग्रेस की नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा सकता है। वे अपेक्षाकृत युवा और आक्रामक छवि वाले नेता माने जाते हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता रहते हुए उन्होंने कई मुद्दों पर एलडीएफ सरकार को घेरा था और भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता तथा जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया था।

वीडी सतीशन का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। उन्होंने 1990 के दशक में केरल स्टूडेंट्स यूनियन और यूथ कांग्रेस के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा। धीरे-धीरे उन्होंने संगठन और जनता के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई। वे परावूर विधानसभा क्षेत्र से लगातार छह बार विधायक चुने जा चुके हैं, जो उनकी मजबूत जनाधार का संकेत माना जाता है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि केरल में कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती चुनावी जीत को स्थिर और प्रभावी शासन में बदलने की होगी। जनता ने लंबे समय बाद UDF को स्पष्ट जनादेश दिया है, इसलिए लोगों की अपेक्षाएं भी काफी बढ़ गई हैं। बेरोजगारी, महंगाई, बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर नई सरकार की परीक्षा होगी।

एलडीएफ की हार को भी केरल की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पिछले दस वर्षों में वाम मोर्चा सरकार ने कई योजनाएं लागू की थीं, लेकिन इस बार जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया। कांग्रेस अब इस जनादेश को राजनीतिक रूप से मजबूत आधार में बदलने की कोशिश करेगी।

वीडी सतीशन की छवि एक तेज-तर्रार वक्ता और आक्रामक नेता की रही है। पार्टी के भीतर भी उन्हें संगठनात्मक दृष्टि से मजबूत माना जाता है। उनके समर्थकों का कहना है कि वे युवाओं और आम कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं तथा सरकार चलाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

अब कांग्रेस की नजर सरकार गठन की प्रक्रिया और मंत्रिमंडल विस्तार पर रहेगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी विभिन्न सहयोगी दलों के साथ बातचीत कर मंत्रिमंडल के स्वरूप को अंतिम रूप दे सकती है। UDF में शामिल IUML, RSP और केरल कांग्रेस जैसे दल भी सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

फिलहाल केरल में वीडी सतीशन के नाम की घोषणा के साथ राजनीतिक सस्पेंस खत्म हो गया है। कांग्रेस अब एकजुटता के संदेश के साथ नई सरकार के गठन की तैयारी में जुट गई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सतीशन मुख्यमंत्री के तौर पर जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाते हैं और केरल की राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं।

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