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SIR Phase 3: देशभर में वोटर लिस्ट का महाअभियान, दिल्ली-महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में घर-घर पहुंचेगी चुनाव आयोग की टीम

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चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तीसरे चरण की घोषणा कर दी है। दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में घर-घर सर्वे होगा। जानिए क्या है पूरा अभियान, क्यों जरूरी है और इसका चुनावी असर क्या पड़ेगा।

देशभर में मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। बिहार और पश्चिम बंगाल में शुरू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को अब तीसरे चरण में पूरे देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित कर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का मकसद मतदाता सूची से फर्जी, डुप्लीकेट और अयोग्य नामों को हटाकर चुनाव प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाना है। तीसरे चरण में दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, ओडिशा और कर्नाटक समेत कई बड़े राज्यों को शामिल किया गया है।

चुनाव आयोग के इस फैसले को आगामी चुनावी तैयारियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। आयोग का दावा है कि यह अभियान देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में सबसे बड़े सत्यापन अभियानों में से एक होगा। इस चरण के पूरा होने के बाद लगभग पूरा देश SIR प्रक्रिया के दायरे में आ जाएगा। हालांकि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को फिलहाल इस चरण से बाहर रखा गया है।

घर-घर जाकर होगी मतदाताओं की जांच

चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 30 मई से 14 अक्टूबर तक देशभर में घर-घर सर्वे अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी (BLO) तैनात किए जाएंगे, जो सीधे मतदाताओं के घर पहुंचकर उनकी जानकारी का सत्यापन करेंगे। आयोग के अनुसार इस चरण में करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं से संपर्क स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी पूरी प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

आयोग का कहना है कि इस बार प्रक्रिया को पहले से अधिक तकनीकी और व्यवस्थित बनाया गया है ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न हटे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न रह सके। BLO मतदाताओं के पते, पहचान और अन्य जरूरी जानकारियों का भौतिक सत्यापन करेंगे। जिन मतदाताओं के दस्तावेज अधूरे होंगे या जिनके बारे में संदेह होगा, उनके मामलों की अलग से समीक्षा की जाएगी।

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट भी होगी प्रकाशित

SIR Phase 3 के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 5 जुलाई से 21 अक्टूबर के बीच प्रकाशित की जाएगी। इस दौरान आम नागरिकों और राजनीतिक दलों को आपत्ति या सुधार दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। आयोग ने कहा है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएगी और सभी दावों एवं आपत्तियों का विधिसम्मत निपटारा किया जाएगा।

चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे प्रत्येक मतदान केंद्र पर अपने BLA नियुक्त करें ताकि सत्यापन प्रक्रिया पर सभी पक्षों की नजर बनी रहे। आयोग का मानना है कि राजनीतिक दलों की भागीदारी से मतदाता सूची को लेकर विवादों की संभावना कम होगी और चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बढ़ेगा।

किन राज्यों में चलेगा अभियान

तीसरे चरण में जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है उनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड प्रमुख हैं। इन राज्यों में विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में कई राज्यों में चुनाव होने हैं, ऐसे में चुनाव आयोग किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जी मतदान की आशंकाओं को पहले ही खत्म करना चाहता है। पिछले कुछ वर्षों में मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम, मृत मतदाताओं के नाम और गलत पते जैसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में SIR अभियान को चुनावी सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पहले दो चरणों में क्या हुआ

आयोग के अनुसार पहले और दूसरे चरण में 13 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 59 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया गया था। इस दौरान 6.3 लाख से अधिक BLO और 9.2 लाख BLA इस अभियान से जुड़े थे। चुनाव आयोग का दावा है कि पहले दो चरणों में लाखों ऐसे नामों की पहचान हुई जो या तो डुप्लीकेट थे या नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए।

सूत्रों के अनुसार आयोग अब इस प्रक्रिया को और अधिक डिजिटल बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। कई जगहों पर टैबलेट और मोबाइल ऐप के जरिए डेटा अपडेट किया जा रहा है ताकि रिकॉर्ड में पारदर्शिता बनी रहे और गलतियों की संभावना कम हो।

बिहार से शुरू हुआ था अभियान

विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत पिछले वर्ष बिहार से की गई थी। बिहार में इस अभियान के दौरान कई जिलों में मतदाता सूची की व्यापक जांच हुई थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में भी इसे लागू किया गया। अब तीसरे चरण के जरिए आयोग पूरे देश में मतदाता सूची को एक समान मानकों के अनुसार अपडेट करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से पूरा होता है तो इससे चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता काफी बढ़ सकती है। हालांकि विपक्षी दलों की ओर से समय-समय पर इस तरह के अभियानों को लेकर सवाल भी उठाए जाते रहे हैं। कई दलों का आरोप रहा है कि सत्यापन के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। ऐसे में आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती पारदर्शिता बनाए रखना होगी।

लोकतंत्र को मजबूत करने की कवायद

चुनाव आयोग का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए शुद्ध और अद्यतन मतदाता सूची बेहद जरूरी है। आयोग का मानना है कि यदि मतदाता सूची त्रुटिरहित होगी तो चुनाव प्रक्रिया पर जनता का विश्वास और मजबूत होगा। यही कारण है कि SIR अभियान को सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतांत्रिक सुधार अभियान के रूप में देखा जा रहा है।

आने वाले महीनों में BLO की टीम जब घर-घर पहुंचेगी तो करोड़ों मतदाताओं को अपनी जानकारी सत्यापित कराने का मौका मिलेगा। आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करें और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराएं ताकि उनका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित बना रहे।

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