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ATM से पैसे नहीं निकले लेकिन खाते से कट गए? कोर्ट के फैसले ने बैंक ग्राहकों को दिया बड़ा अधिकार

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दिल्ली की एक महिला ने एटीएम ट्रांजैक्शन फेल होने के बाद बैंक के खिलाफ उपभोक्ता अदालत में केस जीत लिया। कोर्ट ने बैंक को पैसे लौटाने के साथ मुआवजा देने का आदेश दिया। जानिए RBI के नियम और ग्राहकों के अधिकार।

आज के दौर में डिजिटल बैंकिंग और एटीएम ट्रांजैक्शन आम लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लोग रोजाना नकदी निकालने, पैसे ट्रांसफर करने और बैंकिंग सेवाओं के लिए एटीएम का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कई बार तकनीकी खराबी या नेटवर्क समस्या की वजह से ऐसी परेशानियां सामने आ जाती हैं, जब एटीएम मशीन से पैसे नहीं निकलते लेकिन ग्राहक के खाते से रकम कट जाती है। ऐसे मामलों में ज्यादातर लोग बैंक के चक्कर लगाते रहते हैं और लंबे समय तक परेशान होते हैं। अब दिल्ली की एक महिला को उपभोक्ता अदालत से मिले इंसाफ ने ऐसे लाखों बैंक ग्राहकों को बड़ा कानूनी सहारा दिया है।

राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में रहने वाली एक महिला ने एटीएम ट्रांजैक्शन से जुड़ी समस्या को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार अदालत से राहत हासिल की। अदालत ने बैंक की लापरवाही को गंभीर मानते हुए न सिर्फ ग्राहक के पैसे लौटाने का आदेश दिया, बल्कि मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के लिए मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मामला मई 2022 का बताया जा रहा है। महिला ने एक एटीएम से 10 हजार रुपये निकालने की कोशिश की थी। ट्रांजैक्शन प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन मशीन से कैश बाहर नहीं आया। कुछ ही सेकंड बाद उनके मोबाइल फोन पर खाते से 10 हजार रुपये कटने का मैसेज पहुंच गया। पहले तो उन्हें लगा कि शायद कुछ देर में पैसा वापस आ जाएगा, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी खाते में रकम वापस नहीं आई।

इसके बाद महिला ने बैंक शाखा में जाकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने लिखित आवेदन भी दिया और लगातार बैंक अधिकारियों से संपर्क करती रहीं। लेकिन आरोप है कि बैंक की ओर से उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्हें बार-बार इंतजार करने को कहा गया और मामला लंबे समय तक लटका रहा। आखिरकार परेशान होकर उन्होंने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया।

जिला उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने बैंकिंग नियमों और ग्राहक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए पूरे मामले को गंभीरता से लिया। आयोग ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने एटीएम ट्रांजैक्शन से जुड़े मामलों के लिए पहले से स्पष्ट नियम बनाए हुए हैं। यदि एटीएम से पैसा नहीं निकलता लेकिन खाते से रकम कट जाती है, तो बैंक को तय समय के भीतर ग्राहक का पैसा लौटाना होता है। ऐसा नहीं करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि अदालत की ओर से नोटिस भेजे जाने के बावजूद संबंधित बैंकों की तरफ से कोई प्रतिनिधि पेश नहीं हुआ। इसके बाद आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाया। अदालत ने बैंक को ग्राहक के 10 हजार रुपये लौटाने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक तनाव और कानूनी लड़ाई के लिए अतिरिक्त मुआवजा देने को भी कहा गया।

इस फैसले के बाद एक बार फिर बैंक ग्राहकों के अधिकारों पर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश लोगों को यह जानकारी ही नहीं होती कि एटीएम ट्रांजैक्शन फेल होने पर उनके क्या अधिकार हैं। इसी वजह से कई लोग बैंक के चक्कर लगाते रहते हैं और समय पर न्याय नहीं मिल पाता।

दरअसल RBI ने एटीएम से जुड़ी समस्याओं के लिए पहले से स्पष्ट गाइडलाइन जारी कर रखी है। नियमों के अनुसार यदि एटीएम से पैसा नहीं निकलता लेकिन खाते से राशि कट जाती है, तो बैंक को अधिकतम पांच कार्यदिवस के भीतर ग्राहक के खाते में रकम वापस करनी होती है। इसे ऑटो रिवर्सल प्रक्रिया कहा जाता है। यदि बैंक तय समय सीमा के भीतर पैसा वापस नहीं करता, तो ग्राहक मुआवजे का हकदार बन जाता है।

RBI के नियमों के मुताबिक पांच दिन से ज्यादा देरी होने पर बैंक को ग्राहक को प्रतिदिन 100 रुपये के हिसाब से जुर्माना देना पड़ सकता है। खास बात यह है कि इसके लिए ग्राहक को अलग से लंबी प्रक्रिया अपनाने की जरूरत नहीं होती। यह उसका अधिकार माना जाता है और बैंक की जिम्मेदारी बनती है कि वह तय समय में समाधान करे।

बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी गड़बड़ी, सर्वर डाउन होने या नेटवर्क फेल होने जैसी समस्याओं के कारण एटीएम ट्रांजैक्शन फेल हो सकते हैं। हालांकि ऐसी स्थिति में ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि ग्राहक अपने ट्रांजैक्शन से जुड़े सभी सबूत संभालकर रखें। एटीएम स्लिप, मोबाइल मैसेज, बैंक अलर्ट और शिकायत नंबर जैसी चीजें आगे कानूनी प्रक्रिया में मददगार साबित हो सकती हैं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि आपके साथ ऐसी घटना होती है तो सबसे पहले बैंक के कस्टमर केयर नंबर पर शिकायत दर्ज करें। इसके बाद अपनी बैंक शाखा में लिखित शिकायत दें और उसकी रिसीविंग जरूर लें। यदि तय समय के भीतर पैसा वापस नहीं मिलता, तो आप बैंकिंग लोकपाल या उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

इस फैसले ने यह भी साफ कर दिया है कि बैंक ग्राहकों की शिकायतों को हल्के में नहीं ले सकते। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दौर में ग्राहकों की सुरक्षा और भरोसा बनाए रखना बैंकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि कोई बैंक लापरवाही करता है तो ग्राहक के पास कानूनी अधिकार मौजूद हैं और अदालतें भी ऐसे मामलों में सख्त रुख अपना रही हैं।

आज के समय में करोड़ों लोग रोजाना एटीएम और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यह फैसला आम लोगों के लिए जागरूकता का बड़ा संदेश माना जा रहा है। अब ग्राहक यह समझने लगे हैं कि बैंकिंग सेवाओं में गड़बड़ी होने पर वे सिर्फ शिकायत करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कानून भी उनके साथ खड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से बैंकिंग व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और ग्राहक सेवाओं को और बेहतर बनाने का दबाव भी बनेगा। साथ ही आम लोगों में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। यही कारण है कि इस मामले को बैंकिंग उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

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