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CUET-UG 2026 में तकनीकी गड़बड़ी पर सियासी बवाल, केजरीवाल ने पीएम मोदी पर साधा निशाना, NTA ने TCS को बताया जिम्मेदार

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CUET-UG 2026 परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी के बाद कई केंद्रों पर देरी हुई। अरविंद केजरीवाल ने सरकार पर निशाना साधा, जबकि NTA ने TCS की तकनीकी खामी को जिम्मेदार बताया।

देशभर में आयोजित CUET-UG 2026 परीक्षा के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कई परीक्षा केंद्रों पर सर्वर फेल होने और सिस्टम में देरी के कारण छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद राजनीतिक स्तर पर भी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश को अब एक “पढ़े-लिखे प्रधानमंत्री” की आवश्यकता है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

यह टिप्पणी तब आई जब आप नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री Atishi Marlena ने वाराणसी के एक परीक्षा केंद्र से जुड़ी तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि परीक्षा समय पर शुरू नहीं हो सकी। बताया गया कि सुबह 9 बजे शुरू होने वाली परीक्षा कई घंटों की देरी से प्रभावित हुई, जिससे छात्रों को परेशानी उठानी पड़ी।

इस पूरे मामले पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने भी आधिकारिक बयान जारी किया है। एजेंसी ने स्वीकार किया कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हुईं, जिसकी वजह से परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हुई।

National Testing Agency ने स्पष्ट किया कि यह तकनीकी समस्या उसके सर्विस प्रोवाइडर Tata Consultancy Services के सिस्टम में आई खामी के कारण हुई। हालांकि एजेंसी ने कहा कि समस्या को तुरंत ठीक कर लिया गया और प्रभावित छात्रों को अतिरिक्त समय देकर परीक्षा पूरी कराई गई।

एनटीए के अनुसार, सुबह की पाली में सभी अभ्यर्थियों को पूरा समय दिया गया ताकि किसी का नुकसान न हो। वहीं दोपहर की पाली की परीक्षा का समय भी संशोधित किया गया। छात्रों को निर्धारित समय से पहले रिपोर्ट करने के लिए कहा गया और परीक्षा थोड़ी देरी से शुरू की गई।

एजेंसी ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी तकनीकी समस्याओं से बचने के लिए सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है। साथ ही छात्रों और अभिभावकों से इस असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया गया है।

इस घटना ने एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षाओं में इस तरह की तकनीकी गड़बड़ी स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Arvind Kejriwal का यह बयान आगामी राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है, खासकर शिक्षा और परीक्षा प्रणाली जैसे संवेदनशील मुद्दों पर।

फिलहाल एनटीए ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है और दावा किया है कि सभी प्रभावित छात्रों को न्यायसंगत अवसर दिया जाएगा। लेकिन इस घटना के बाद परीक्षा प्रबंधन प्रणाली की तैयारी पर गंभीर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।

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