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राहुल गांधी का कोटा दौरा: छात्रों से संवाद, शिक्षा व्यवस्था और करियर विकल्पों पर बड़ी चर्चा

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कोटा दौरे पर राहुल गांधी ने छात्रों से बातचीत करते हुए करियर विकल्प, शिक्षा व्यवस्था और मानसिक तनाव जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने राजस्थान के कोटा में छात्रों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, करियर विकल्पों की सीमित सोच और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर विस्तार से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक चर्चा के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह छात्रों के भविष्य और उनकी समस्याओं को समझने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी यात्राओं के दौरान हजारों युवाओं से मुलाकात की है और अधिकतर छात्रों से यही जवाब मिला कि वे इंजीनियर, डॉक्टर, आईएएस, आईपीएस या सशस्त्र बलों में जाना चाहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर करियर के विकल्प केवल इन कुछ गिने-चुने क्षेत्रों तक ही क्यों सीमित हैं और अन्य क्षेत्रों को उतना महत्व क्यों नहीं दिया जाता।

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने छात्राओं से बातचीत की तो कई ने बताया कि वे लेखक, वैज्ञानिक, कलाकार, डिजाइनर या अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में जाना चाहती हैं, लेकिन सामाजिक दबाव और पारंपरिक सोच के कारण वे सीमित रास्तों की ओर बढ़ने को मजबूर हो जाती हैं। राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाएं बहुत व्यापक हैं, लेकिन शिक्षा प्रणाली उन्हें एक तय ढांचे में बांध देती है।

राहुल गांधी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान देशभर में छात्रों से बातचीत की और यह महसूस किया कि शिक्षा व्यवस्था में कई गंभीर कमियां हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने की बजाय कई जगह यह कमजोर होती जा रही है, जिससे छात्रों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक उदाहरण भी साझा किया, जिसमें उन्होंने एक छात्रा आकांक्षा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आकांक्षा डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन परिस्थितियों और परीक्षा से जुड़ी समस्याओं के चलते उसका सपना अधूरा रह गया और उसने आत्महत्या कर ली। राहुल गांधी ने कहा कि यह घटना केवल एक परिवार की नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है।

उन्होंने बताया कि आकांक्षा ने अपने पत्र में लिखा था कि उसने सब कुछ खो दिया, जबकि वास्तविकता यह थी कि यह उसकी गलती नहीं थी, बल्कि सिस्टम की कमियों का परिणाम था। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को ऐसी बनानी होगी जिसमें किसी भी छात्र को इस तरह के मानसिक दबाव का सामना न करना पड़े।

राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी दिलाना नहीं होना चाहिए, बल्कि छात्रों को उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने के अवसर देना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें सही दिशा और अवसरों की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सीमित विकल्पों की सोच के कारण कई छात्र मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। इस स्थिति को बदलना केवल सरकार का नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।

कार्यक्रम में राहुल गांधी ने यह स्पष्ट किया कि यह बैठक किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को समझना और एक बेहतर सिस्टम की दिशा में काम करना है।

उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए तो छात्र केवल पांच पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि विज्ञान, कला, खेल, तकनीक और नवाचार जैसे कई क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं।

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