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बीजेपी नेता जॉर्ज कुरियन का केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा, राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद हुई कार्रवाई

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भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के बाद राष्ट्रपति ने उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया।

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।

जॉर्ज कुरियन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी केंद्र सरकार में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने जून 2024 में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद उन्हें अल्पसंख्यक मामलों के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद जॉर्ज कुरियन ने करीब एक साल तक सरकार में अपनी जिम्मेदारी निभाई। हालांकि राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद मंत्री पद पर बने रहने की संवैधानिक स्थिति समाप्त हो गई, जिसके बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया।

जॉर्ज कुरियन बीजेपी के पुराने और अनुभवी नेताओं में शामिल रहे हैं। वह पार्टी की स्थापना के शुरुआती दौर से ही संगठन से जुड़े हुए हैं। साल 1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन के समय से ही वह पार्टी के सदस्य रहे हैं और लंबे समय तक संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं।

केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन का जन्म 20 सितंबर 1960 को कोट्टायम जिले में हुआ था। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने से पहले सामाजिक तथा संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे। बीजेपी में उनकी पहचान एक समर्पित कार्यकर्ता और संगठन के भरोसेमंद चेहरे के रूप में रही है।

केंद्रीय मंत्री बनने से पहले भी जॉर्ज कुरियन कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार में तत्कालीन रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में भी काम किया था।

बीजेपी संगठन में भी जॉर्ज कुरियन की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। केरल जैसे राज्य में पार्टी के विस्तार के दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए लंबे समय तक काम किया। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनके बेहतर संबंध रहे हैं और वह दक्षिण भारत में बीजेपी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि केरल की राजनीति में पार्टी के प्रदर्शन और आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजे जाने का मौका नहीं मिला। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा ऐसे समय में हुआ है जब केंद्र सरकार में मंत्रियों और सांसदों की संवैधानिक स्थिति को लेकर प्रक्रियाएं लगातार पूरी की जा रही हैं। राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद मंत्रिपद पर बने रहने के लिए संवैधानिक प्रावधानों का पालन करना जरूरी होता है।

केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अब उनकी आगे की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। बीजेपी में लंबे समय से काम करने वाले जॉर्ज कुरियन संगठन के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं और आने वाले समय में पार्टी उन्हें किसी अन्य जिम्मेदारी में शामिल कर सकती है।

फिलहाल राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उनका इस्तीफा प्रभावी हो गया है। केंद्र सरकार की ओर से आगे मंत्रिमंडल में किसी बदलाव या नई जिम्मेदारी को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।

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किसी भी सरकार में मंत्रियों का पद संवैधानिक नियमों और राजनीतिक परिस्थितियों दोनों से जुड़ा होता है। जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है, जहां राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा।

जॉर्ज कुरियन बीजेपी के पुराने नेताओं में शामिल हैं और उन्होंने संगठन से लेकर सरकार तक कई जिम्मेदारियां निभाई हैं। खासकर केरल जैसे राज्य में पार्टी की गतिविधियों को मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

राजनीति में पदों का आना-जाना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन लंबे समय तक संगठन के लिए काम करने वाले नेताओं की उपयोगिता बनी रहती है। अब देखना होगा कि बीजेपी उन्हें भविष्य में कौन सी नई जिम्मेदारी देती है।

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