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SEO Title: Pandavani Singer Teejan Bai Death: पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का 70 वर्ष की उम्र में निधन, CM Samrat Choudhary ने जताया शोक

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Alam Ki Khabar: प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित तीजन बाई का 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त करते हुए भारतीय लोक संस्कृति में उनके योगदान को याद किया।

भारतीय लोक संस्कृति की सबसे सशक्त आवाजों में शुमार, पद्म विभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहीं तीजन बाई ने रायपुर स्थित एम्स (AIIMS) में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ भारतीय लोककला जगत ने अपनी एक ऐसी विरासत खो दी, जिसने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पंडवानी शैली को गांवों की चौपाल से उठाकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उनके निधन की खबर से देशभर के कला, साहित्य और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला, सशक्त स्वर और समर्पण से भारतीय लोक संस्कृति को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

दुर्ग जिले से ताल्लुक रखने वाली तीजन बाई ने बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अपनी प्रतिभा के दम पर देश और दुनिया में अलग पहचान बनाई। पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला है, जिसमें महाभारत की कथाओं को गायन, अभिनय और संगीत के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता है। तीजन बाई ने इस कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और इसे वैश्विक पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली मंच प्रस्तुति और जीवंत अभिनय शैली ने लाखों दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। भारत ही नहीं बल्कि यूरोप, अमेरिका, एशिया और दुनिया के कई देशों में उन्होंने पंडवानी की प्रस्तुति देकर भारतीय लोक परंपरा का गौरव बढ़ाया। उनकी कला ने यह साबित किया कि लोक संस्कृति की ताकत सीमाओं से कहीं बड़ी होती है।

भारतीय लोककलाओं में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुए। उनकी उपलब्धियां भारतीय लोककला इतिहास का स्वर्णिम अध्याय मानी जाती हैं।

करीब डेढ़ महीने से वह अस्वस्थ थीं और रायपुर एम्स में उनका इलाज चल रहा था। चिकित्सकों के अनुसार रविवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही कला प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया।

तीजन बाई केवल एक लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की जीवंत पहचान थीं। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से नई पीढ़ी को लोक परंपराओं से जोड़ने का काम किया। उनका संघर्ष, समर्पण और कला के प्रति जुनून आने वाले कलाकारों के लिए सदैव प्रेरणा बना रहेगा।

उनके निधन से भारतीय लोक संस्कृति को अपूरणीय क्षति हुई है। हालांकि उनकी प्रस्तुतियां, उनका स्वर और उनकी सांस्कृतिक विरासत आने वाले वर्षों तक लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।

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लोक संस्कृति की अमर आवाज को श्रद्धांजलि

तीजन बाई ने यह साबित किया कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। उन्होंने लोककला को वैश्विक मंच दिलाकर भारतीय संस्कृति का सम्मान बढ़ाया। उनका निधन केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है।

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