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ISRO Latest News: गगनयान मिशन के बीच वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर सख्ती, अब अंतरिक्ष विभाग करेगा अंतिम फैसला

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गगनयान समेत राष्ट्रीय महत्व के मिशनों के बीच ISRO में वैज्ञानिकों के बढ़ते इस्तीफों पर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब अहम परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे और VRS पर अंतिम निर्णय अंतरिक्ष विभाग करेगा।

नई दिल्ली, 16 जुलाई।भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन और अन्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष परियोजनाओं के बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिकों के लगातार बढ़ते इस्तीफों और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के मामलों ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी को देखते हुए अंतरिक्ष विभाग ने नई व्यवस्था लागू करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब गगनयान तथा अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े ग्रुप ‘A’ के वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे या VRS को संबंधित केंद्र सीधे मंजूरी नहीं देंगे। ऐसे सभी मामलों में अंतिम फैसला अंतरिक्ष विभाग स्तर पर लिया जाएगा।

नए निर्देश के तहत यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC), विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC), सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC), लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC), स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC), ISTRAC और मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी (MCF) समेत प्रमुख संस्थानों को आदेश जारी किया गया है कि वैज्ञानिकों के इस्तीफे की फाइलें निदेशक की अनुशंसा के साथ सीधे अंतरिक्ष विभाग भेजी जाएं।

हाल के वर्षों में 100 से अधिक वैज्ञानिक और इंजीनियर ISRO छोड़ चुके हैं। इनमें कई वरिष्ठ अधिकारी निजी अंतरिक्ष कंपनियों से जुड़े हैं। वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोले जाने और नई भारतीय अंतरिक्ष नीति लागू होने के बाद स्पेस स्टार्टअप्स के तेजी से विस्तार ने अनुभवी वैज्ञानिकों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

इधर ISRO के सामने आने वाले वर्षों में गगनयान, चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और मंगलयान-2 जैसे कई बड़े मिशनों की जिम्मेदारी है। ऐसे में अनुभवी वैज्ञानिकों का संगठन में बने रहना इन परियोजनाओं की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी कारण सरकार ने इस्तीफों की प्रक्रिया पर अतिरिक्त निगरानी का निर्णय लिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रशासनिक नियंत्रण से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। वैज्ञानिकों को संगठन में बनाए रखने के लिए बेहतर करियर ग्रोथ, आधुनिक अनुसंधान सुविधाएं, प्रतिस्पर्धी वेतन और निजी क्षेत्र के समान अवसर उपलब्ध कराना भी आवश्यक होगा।

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भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। ऐसे समय में अनुभवी वैज्ञानिकों का संगठन छोड़ना चिंता का विषय है। सरकार का नया फैसला तत्काल राहत दे सकता है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान बेहतर कार्य वातावरण, शोध सुविधाओं और आकर्षक करियर अवसरों से ही निकलेगा। यदि इन पहलुओं पर ध्यान दिया गया तो ISRO भविष्य की चुनौतियों का और अधिक मजबूती से सामना कर सकेगा।

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