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संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन भी गतिरोध, नीट और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष का हंगामा

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संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन लोकसभा और राज्यसभा में नीट विवाद, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित रही। जानिए पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट।

नई दिल्ली, 23 जुलाई।संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन भी सरकार और विपक्ष के बीच टकराव कम होने के बजाय और तेज हो गया। सुबह 11 बजे दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने नीट परीक्षा विवाद, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई तथा अन्य मुद्दों को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। अंततः लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्ष का कहना है कि नीट परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों के साथ हुई कथित सख्त कार्रवाई जैसे मामलों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। विपक्षी दलों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि जब तक इस पर सरकार स्पष्ट रुख नहीं अपनाती, तब तक सदन की सामान्य कार्यवाही संभव नहीं होगी।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष चर्चा से पीछे नहीं हट रहा है, लेकिन पहले सरकार को शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर निर्णय लेना चाहिए। उनका कहना था कि इसके बाद ही सदन में सार्थक चर्चा आगे बढ़ सकती है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने आरोप लगाया कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उनके साथ कठोर व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि युवाओं के आक्रोश को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है और सरकार को केवल चर्चा तक सीमित रहने के बजाय ठोस निर्णय लेने चाहिए। उनके अनुसार शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस दिशा में पहला कदम हो सकता है।

इधर, गृह मंत्रालय द्वारा दिल्ली पुलिस आयुक्त को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत निरोधात्मक कार्रवाई से संबंधित अधिकार दिए जाने के फैसले पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे युवाओं को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध प्रदर्शनों को कानून-व्यवस्था के बजाय सुरक्षा के नजरिए से देख रही है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

संसद के भीतर जारी लगातार हंगामे के कारण प्रश्नकाल और अन्य महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हुए। सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बनने से दोनों सदनों में सामान्य कामकाज सुचारु रूप से नहीं चल सका। संसदीय कार्यों पर गतिरोध का असर लगातार चौथे दिन भी दिखाई दिया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच जल्द सहमति नहीं बनी तो आगामी दिनों में भी संसद की कार्यवाही बाधित रह सकती है। ऐसे में महत्वपूर्ण विधेयकों और अन्य सरकारी कार्यों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।

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विशेष टिप्पणी

संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा और समाधान की अपेक्षा की जाती है। लगातार बाधित होती कार्यवाही न केवल संसदीय समय की हानि है बल्कि जनता की अपेक्षाओं पर भी असर डालती है। सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि संवेदनशील मुद्दों पर संवाद का रास्ता निकालें ताकि संसद अपनी संवैधानिक भूमिका प्रभावी ढंग से निभा सके।

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