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India News: असम में एक्टिविस्ट पर NSA को लेकर सियासत तेज, कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

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असम में सामाजिक कार्यकर्ता प्रणब डोले पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने सरकार पर कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने कार्रवाई को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए जरूरी बताया।

नई दिल्ली डेस्क, 2 अगस्त। असम में भूमि अधिकारों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता प्रणब डोले पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाए जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए भाजपा सरकार पर विरोध की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया है। वहीं असम सरकार का कहना है कि यह फैसला सार्वजनिक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने कहा कि जिला अदालत से जमानत मिलने के एक दिन बाद ही डोले पर NSA लागू कर दिया गया। उनके अनुसार यह निवारक हिरासत संबंधी कानूनों के दुरुपयोग का उदाहरण है और इससे न्यायिक प्रक्रिया की भावना प्रभावित होती है।

प्रणब डोले पिछले कई वर्षों से Kaziranga National Park के निकट प्रस्तावित एक फाइव स्टार होटल परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि परियोजना से स्थानीय ग्रामीणों की जमीन, पर्यावरण और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन भी होते रहे हैं।

जानकारी के अनुसार डोले को 13 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। बाद में जिला अदालत ने उन्हें जमानत दे दी, लेकिन रिहाई से पहले ही राज्य सरकार ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर दिया। इसके चलते उनकी रिहाई फिलहाल टल गई।

कांग्रेस का दावा है कि अदालत ने जमानत देते समय पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को महत्व देने की बात कही थी। पार्टी का आरोप है कि इसके बावजूद NSA लागू कर सरकार ने असहमति की आवाज़ को दबाने की कोशिश की है।

दूसरी ओर असम सरकार का कहना है कि उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर यह आशंका जताई गई कि संबंधित व्यक्ति की गतिविधियां सार्वजनिक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा पर असर डाल सकती हैं। इसी आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 की धारा 3(2) के तहत हिरासत का आदेश जारी किया गया।

असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Gaurav Gogoi ने भी राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की सरकार अपने फैसले को कानून के अनुरूप और आवश्यक बता रही है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर निवारक हिरासत कानूनों के इस्तेमाल, नागरिक अधिकारों और पर्यावरणीय आंदोलनों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस मामले पर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।

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