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Jharkhand News: कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो? JPSC-JSSC आंदोलन से झारखंड की राजनीति में बढ़ी चर्चा

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Alam Ki Khabar: Jharkhand News में जानिए कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो। JPSC, JSSC और CGL परीक्षा विवाद को लेकर रांची में छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे JLKM नेता की पूरी कहानी, सोनम वांगचुक से बातचीत और आंदोलन की बड़ी बातें।

रांची, 5 अगस्त। आलम की खबर: झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों छात्र आंदोलन का केंद्र बनी हुई है। राज्य की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर हजारों अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के बीच जिस नाम की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, वह है झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो। कई दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे महतो अब राज्यभर के छात्रों के बीच परीक्षा सुधार और पारदर्शिता की मांग का प्रमुख चेहरा बन चुके हैं।

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे आंदोलन में शामिल छात्रों का आरोप है कि JPSC, JSSC और CGL जैसी भर्ती परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां हो रही हैं, जिससे मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं।

इसी आंदोलन को नई दिशा देने के लिए देवेंद्र नाथ महतो ने आमरण अनशन शुरू किया। उन्होंने घोषणा की थी कि जब तक प्रसिद्ध शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक उनसे मिलने रांची नहीं आते, तब तक वह अनशन समाप्त नहीं करेंगे। इस घोषणा के बाद आंदोलन की चर्चा पूरे देश में होने लगी।

बाद में सोनम वांगचुक ने फोन पर देवेंद्र महतो से बातचीत की। उन्होंने महतो से स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी आंदोलन की सफलता के लिए आंदोलनकारी का स्वस्थ रहना जरूरी है। वांगचुक ने पानी, शहद और नींबू लेने की सलाह दी, जिसके बाद देवेंद्र महतो ने पानी ग्रहण कर अपना कठोर उपवास आंशिक रूप से समाप्त किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

देवेंद्र नाथ महतो लंबे समय से झारखंड में छात्र और युवा मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। वह स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया में सुधार जैसे मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले बड़ी संख्या में युवा उन्हें अपनी आवाज मानते हैं।

आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के कारण योग्य उम्मीदवारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो युवाओं का सरकारी भर्ती प्रक्रिया से भरोसा उठ जाएगा। इसी कारण बड़ी संख्या में छात्र लगातार आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।

रांची में चल रहा यह आंदोलन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी छात्रों की मांगों का समर्थन कर रहे हैं। इससे सरकार पर समाधान निकालने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देवेंद्र नाथ महतो ने शांतिपूर्ण आंदोलन के जरिए खुद को झारखंड के छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल कर लिया है। भूख हड़ताल और सोनम वांगचुक से हुई बातचीत ने उनके आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना दिया है।

फिलहाल छात्र संगठन अपने आंदोलन पर कायम हैं और सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार परीक्षा सुधार और छात्रों की मांगों को लेकर क्या फैसला लेती है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

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