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Rajasthan School News: मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद भी नहीं शुरू हुआ स्कूल भवन का काम, जर्जर इमारत बनी सबसे बड़ी अड़चन

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | राजस्थान के रामपुरा-कंवरपुरा सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत के निर्माण का मामला फिर चर्चा में है। 1 सितंबर से काम शुरू होना था, लेकिन पुरानी इमारत नहीं हटने के कारण निर्माण अटक गया।

जयपुर, 2 सितंबर। राजस्थान के जयपुर जिले के सांगानेर ब्लॉक स्थित रामपुरा-कंवरपुरा गांव का सरकारी प्राथमिक विद्यालय एक बार फिर चर्चा में है। करीब एक सप्ताह पहले जर्जर स्कूल भवन को लेकर उठा विवाद इतना बढ़ा कि राज्य सरकार को नए भवन के निर्माण की तारीख घोषित करनी पड़ी, लेकिन 1 सितंबर को तय समय पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। अब सामने आया है कि नए भवन के निर्माण के लिए पैसा और वर्क ऑर्डर जारी होने के बावजूद पुरानी जर्जर इमारत को हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी।

यह स्कूल बगरू विधानसभा क्षेत्र में आता है और जयपुर शहर से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। विद्यालय की हालत लंबे समय से खराब बताई जा रही थी। भवन को पहले ही तकनीकी रूप से असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद नया भवन तैयार होने तक बच्चों को वैकल्पिक स्थान पर पढ़ाई करनी पड़ रही है।

21 अगस्त को मामला उस समय सार्वजनिक चर्चा में आया, जब कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका अपने कार्यकर्ताओं के साथ स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि जर्जर स्कूल भवन का मुद्दा उठाने के दौरान ग्रामीणों के एक समूह ने टीम का विरोध किया और मारपीट तथा पथराव की स्थिति बनी।

घटना के बाद स्कूल की तस्वीरें और वहां बच्चों के लिए की गई वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। विवाद के दौरान स्कूल के लिए इस्तेमाल की जा रही जगह की स्थिति पर भी चर्चा हुई। प्रशासन ने तत्काल बच्चों की पढ़ाई के लिए नजदीक के एक ग्रामीण के घर में व्यवस्था कर दी।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य सरकार की ओर से 22 अगस्त की रात मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी सूचना में कहा गया कि रामपुरा-कंवरपुरा के जर्जर विद्यालय भवन की जगह नया भवन बनाया जाएगा और निर्माण कार्य 1 सितंबर 2026 से शुरू किया जाएगा। सरकार ने बताया कि भवन निर्माण के लिए आवश्यक वित्तीय स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है।

नए भवन के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट यानी डीएमएफटी से 12 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई है। इसके अलावा विधायक कोष से 6 लाख रुपये दिए गए हैं। इस तरह विद्यालय भवन के निर्माण के लिए कुल 18 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार स्कूल भवन की खराब स्थिति कोई नई बात नहीं थी। समग्र शिक्षा के तहत जयपुर जिले के 37 विद्यालयों की इमारतों को 13 सितंबर 2025 को असुरक्षित घोषित किया गया था। इन विद्यालयों की सूची में रामपुरा का यह प्राथमिक विद्यालय भी शामिल था। तकनीकी जांच में भवन की मरम्मत को व्यवहारिक नहीं माना गया था और इसे विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिहाज से जोखिमपूर्ण बताया गया था।

विद्यालय की स्थापना 1985 में हुई थी। पुराने भवन में दो कमरे, बरामदा और शौचालय जैसी सुविधाएं थीं। कई वर्षों तक इस्तेमाल के बाद भवन की स्थिति लगातार कमजोर होती गई। स्कूल में फिलहाल 18 विद्यार्थियों का नामांकन बताया गया है और दो महिला शिक्षक यहां कार्यरत हैं।

सरकार की ओर से 1 सितंबर से निर्माण शुरू करने की घोषणा के बाद स्थानीय स्तर पर भी निर्माण की तैयारी शुरू हुई। पंचायत समिति सांगानेर ने 24 अगस्त को भवन निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की और 31 अगस्त को संबंधित फर्म को काम का आदेश भी जारी कर दिया गया।

लेकिन निर्माण एजेंसी के सामने एक बड़ी समस्या पहले से मौजूद थी। जिस जगह नया भवन बनना है, वहां पुरानी जर्जर इमारत अभी खड़ी थी। उसे हटाए बिना नए निर्माण की शुरुआत संभव नहीं थी।

सांगानेर पंचायत समिति की विकास अधिकारी ज्योति प्रजापति के अनुसार, पंचायत समिति की ओर से निर्माण के लिए वर्क ऑर्डर जारी किया जा चुका है, लेकिन पुरानी इमारत को गिराने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग से जुड़ी प्रक्रिया के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका।

पंचायत समिति ने इस मामले में शिक्षा विभाग के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर जर्जर भवन को हटाने की प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया था। पत्र में कहा गया कि निर्माण स्थल पर मौजूद पुराने भवन को हटाने के बाद ही नई इमारत का काम शुरू कराया जा सकता है।

शिक्षा विभाग के सीबीईओ सीताराम गुप्ता के अनुसार, विभाग को पंचायत समिति का पत्र मिल गया है। उनका कहना है कि पहले जिन परिस्थितियों में निर्माण कार्य कराया जाता था, उनमें निर्माण का टेंडर लेने वाली एजेंसी ही पुरानी संरचना हटाकर नया भवन बनाती थी। लेकिन पंचायत समिति और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारियां अलग होने के कारण इस मामले में प्रक्रिया बदल गई है।

सीबीईओ के मुताबिक स्कूल की प्रधानाचार्य से भी बात की गई है और पुरानी इमारत को हटाने के लिए जेसीबी की व्यवस्था की जा रही है। उनका कहना है कि 2 सितंबर को जर्जर भवन को गिराने की कार्रवाई की जानी है। इसके बाद पंचायत समिति चाहे तो नए भवन का निर्माण शुरू करा सकती है।

हालांकि, पुराने भवन को हटाने के खर्च को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। शिक्षा विभाग के अधिकारी के अनुसार इसके लिए अलग से बजट उपलब्ध नहीं है। भवन गिराने में होने वाले खर्च की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर किए जाने की बात कही गई है।

एक अन्य प्रशासनिक अधिकारी ने यह भी बताया कि पुराने भवन के कमरों में स्कूल का काफी सामान रखा हुआ है। भवन गिराने से पहले इस सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाना भी जरूरी है। ऐसे में भवन हटाने की कार्रवाई के साथ-साथ सामान को स्थानांतरित करने की चुनौती भी बनी हुई है।

इस मामले ने सरकारी घोषणाओं और जमीन पर काम शुरू होने के बीच मौजूद प्रशासनिक अंतर को भी सामने ला दिया है। सरकार ने निर्माण की तारीख घोषित कर दी, राशि स्वीकृत हो गई, टेंडर भी हो गया और वर्क ऑर्डर भी जारी हो गया, लेकिन अलग-अलग विभागों के बीच जिम्मेदारी तय होने में हुई देरी के कारण निर्धारित तारीख पर निर्माण शुरू नहीं हो पाया।

स्थानीय स्तर पर इस देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब राजधानी जयपुर से कुछ ही दूरी पर मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी निर्माण कार्य तय तारीख पर शुरू नहीं हो पा रहा है, तो दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों में सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बगरू विधानसभा क्षेत्र के विधायक कैलाश वर्मा से भी इस मामले में प्रतिक्रिया ली गई। उन्होंने कहा कि यदि दस्तावेजी या प्रक्रिया संबंधी किसी परेशानी के कारण निर्माण में देरी हो रही है तो उसे दूर कराने का प्रयास किया जाएगा।

वहीं क्षेत्र की पूर्व कांग्रेस विधायक गंगा देवी ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि घोषणाओं के बजाय जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए। उनके मुताबिक केवल घोषणा कर देने से स्कूल की समस्या हल नहीं होती, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित भवन तैयार होना जरूरी है।

अब निगाह 2 सितंबर की कार्रवाई पर है। यदि पुरानी इमारत को हटाने का काम पूरा हो जाता है तो पंचायत समिति के सामने नए भवन का निर्माण शुरू कराने का रास्ता साफ हो सकता है। लेकिन इस पूरे मामले ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि जब स्कूल को पहले ही असुरक्षित घोषित किया जा चुका था, तब नए भवन की प्रक्रिया पूरी होने में इतना समय क्यों लगा और निर्माण की तारीख घोषित करने से पहले सभी विभागीय अड़चनें दूर क्यों नहीं की गईं।

यह सिर्फ एक स्कूल की इमारत का मामला नहीं है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा सीधे तौर पर प्रशासन की जिम्मेदारी से जुड़ी है। किसी भवन को असुरक्षित घोषित करने के बाद सबसे जरूरी कदम यही होना चाहिए कि बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा का स्थायी इंतजाम समयबद्ध तरीके से किया जाए। रामपुरा-कंवरपुरा स्कूल का मामला बताता है कि राशि स्वीकृत होना और घोषणा हो जाना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब बच्चे सुरक्षित और पक्के भवन में पढ़ाई शुरू कर सकें।

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