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National News: UPI शुल्क को लेकर राहुल गांधी की मांग, केंद्र के फैसले पर सियासी बहस तेज

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | UPI के 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर 0.4% MDR को लेकर राहुल गांधी ने सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की है।

16 सितंबर 2026 को UPI के नए Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नए शुल्क व्यवस्था को वापस लेने की मांग की। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और आम लोगों के बीच होने वाले UPI भुगतान पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

राहुल गांधी ने क्या कहा

राहुल गांधी ने अपने वीडियो संदेश में UPI पर प्रस्तावित MDR को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक पुराने फैसले का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस फैसले को वापस लेने की अपील की।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि UPI पर शुल्क व्यवस्था लाने के पीछे अमेरिका का दबाव है। यह उनका राजनीतिक आरोप है; सरकार ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया है।

15 अक्टूबर से लागू होगी नई व्यवस्था

NPCI की घोषित व्यवस्था के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है।

इसका भुगतान सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले UPI लेनदेन पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। 2,000 रुपये तक के सामान्य मर्चेंट लेनदेन भी इस MDR से बाहर रहेंगे।

सरकार ने क्या स्पष्ट किया

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि MDR न तो टैक्स है और न ही सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क। इसके तहत मिलने वाली राशि बैंकों और पेमेंट ऐप सहित UPI इकोसिस्टम से जुड़े भागीदारों के बीच वितरित होगी। सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत P2M लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।

रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कुछ अन्य निर्धारित क्षेत्रों के 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन के लिए अलग से 5 रुपये का फ्लैट MDR तय किया गया है।

विवाद की मुख्य वजह क्या है

राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं का तर्क है कि भले ही शुल्क सीधे ग्राहक से न लिया जाए, लेकिन व्यापारी पर बढ़ने वाला खर्च आगे चलकर वस्तुओं या सेवाओं की कीमतों में शामिल हो सकता है। सरकार की ओर से इसके विपरीत जोर दिया गया है कि शुल्क का ढांचा ग्राहकों और छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त बोझ से बचाने के लिए तैयार किया गया है।

इस तरह फिलहाल विवाद दो अलग-अलग मुद्दों पर केंद्रित है—एक तरफ सरकार द्वारा घोषित MDR की वास्तविक संरचना और दूसरी तरफ विपक्ष द्वारा इसके संभावित आर्थिक प्रभाव तथा नीति के पीछे के कारणों को लेकर उठाए जा रहे सवाल।

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