:
Breaking News

Indian Politics: SIR को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह के गंभीर सवाल, Form 6 में बदलाव पर भी उठाई आपत्ति

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने SIR की कानूनी प्रक्रिया, Form 6 में बदलाव और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मत बताया है।

नई दिल्ली, 29 सितंबर: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रही बहस के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अपने खुले पत्र में सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और देशव्यापी SIR की कानूनी प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां दर्ज की हैं। उन्होंने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर कदम उठाने की अपील भी की है।

आरके सिंह का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है। उन्होंने Representation of the People Act, 1950 की धारा 21 का हवाला देते हुए सवाल किया कि देशभर में SIR लागू करने के लिए वह विशेष आधार क्या था, जिसे चुनाव आयोग ने अपनाया।

Form 6 में बदलाव पर भी सवाल

आरके सिंह ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा संबंधी प्रावधान पर भी सवाल उठाया है।

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक Form 6 में ऐसा हिस्सा जोड़ा गया था, जिसमें आवेदक से पिछली SIR अवधि के दौरान अपने या माता-पिता के नाम मतदाता सूची में होने से संबंधित जानकारी मांगी गई। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं।

आरके सिंह ने इसी संदर्भ में सवाल उठाया कि यदि आयोग के भीतर इस बदलाव को लेकर आपत्तियां थीं, तो इसे लागू करने का निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया गया।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग ने अलग पक्ष रखा है। आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR समेत उसके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि चुनाव आयुक्तों की ओर से किसी प्रस्ताव या प्रक्रिया के मसौदा चरण में सवाल, सुझाव या टिप्पणियां देना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।

यानी एक तरफ आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जबकि आयोग का आधिकारिक पक्ष यह है कि अंतिम निर्णयों में सभी आयुक्तों की सहमति थी। दोनों दावों के बीच का अंतर SIR विवाद का महत्वपूर्ण पहलू बन गया है।

पश्चिम बंगाल की अपील प्रक्रिया पर भी सवाल

आरके सिंह ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े करीब 16.10 लाख मामलों की अपील प्रक्रिया का भी उल्लेख किया है। उनके पत्र में इस बात पर सवाल उठाया गया है कि जिन मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखने का निर्णय लिया गया था, उनके खिलाफ अपील किसके अधिकृत किए जाने पर दाखिल की गई।

यह मुद्दा चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची से संबंधित निर्णयों और अपील प्रक्रिया को लेकर सामने आई चर्चाओं से भी जुड़ा हुआ है।

CEC और चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई मांगें

आरके सिंह ने अपने पत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की मांग पर भी टिप्पणी की है। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीतिक संख्या बल को देखते हुए ऐसा कदम व्यावहारिक रूप से प्रभावी नहीं होगा। इसके बजाय उन्होंने CEC के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग रखी है।

उन्होंने यह भी कहा है कि जिन राज्यों में मतदाता सूची से संबंधित अपीलें लंबित थीं, वहां हुए चुनावों की वैधता की समीक्षा की जानी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की वकालत की है।

सुप्रीम कोर्ट में भी SIR से जुड़ा मामला

SIR और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर कानूनी स्तर पर भी मामला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के कामकाज और SIR से जुड़े फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। याचिका में आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और SIR की वैधता से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।

हालांकि, इन कानूनी दावों और आरके सिंह की आपत्तियों का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। इसलिए SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों और आयोग के जवाब को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।

आरके सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि

आरके सिंह पूर्व आईएएस अधिकारी हैं और केंद्र सरकार में गृह सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह आरा से लोकसभा सांसद रहे और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री भी रहे। नवंबर 2025 में उन्होंने बीजेपी से अलग होने की घोषणा की थी। मौजूदा विवाद में उनके बयान एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व नौकरशाह के रूप में सामने आए हैं।

SIR, Form 6 में बदलाव और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अब राजनीतिक और कानूनी बहस आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में अदालतों और चुनाव आयोग की ओर से होने वाली कार्रवाइयों से इन सवालों की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

यह भी पढ़ें

SIR को लेकर चुनाव आयोग ने दी सफाई, सभी फैसले सर्वसम्मति से लेने की बात कही

चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों पर उठ रहे सवालों के बीच कहा है कि आयोग के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने आंतरिक टिप्पणियों और अंतिम निर्णय के बीच अंतर स्पष्ट किया है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *