:
Breaking News

Indian Politics: Form 6 को लेकर चुनाव आयोग का फैसला बदला, SIR वाले राज्यों तक सीमित रहेगा अतिरिक्त घोषणा पत्र

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | Form 6 को लेकर चुनाव आयोग ने व्यवस्था स्पष्ट की है। SIR वाले राज्यों में अतिरिक्त घोषणा पत्र और अन्य राज्यों में पुराने Form 6 के इस्तेमाल को लेकर नया फैसला सामने आया है।

नई दिल्ली, 30 सितंबर, आलम की खबर: नए मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 को लेकर चुनाव आयोग ने व्यवस्था में बदलाव किया है। अब Form 6 के साथ जुड़ा अतिरिक्त घोषणा पत्र सभी राज्यों में अनिवार्य नहीं रहेगा। यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन्हीं राज्यों में लागू होगी, जहां मतदाता सूची का Special Intensive Revision यानी SIR चल रहा है।

SIR की प्रक्रिया वाले राज्यों में नए मतदाता को Form 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा देनी पड़ सकती है। वहीं, जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया नहीं चल रही है या पूरी हो चुकी है, वहां सामान्य Form 6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

Form 6 में क्या बदला

Form 6 का इस्तेमाल ऐसे नागरिकों के लिए किया जाता है, जो पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराना चाहते हैं। इसके जरिए आवेदक को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, पता, जन्मतिथि और अन्य आवश्यक विवरण उपलब्ध कराने होते हैं।

SIR की प्रक्रिया के दौरान Form 6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ा गया था। इस घोषणा में आवेदक से पुराने मतदाता रिकॉर्ड और परिवार के सदस्यों से संबंधित जानकारी मांगी जा रही थी। खास तौर पर माता-पिता या दादा-दादी के नाम को पिछली SIR मतदाता सूची से जोड़ने से संबंधित जानकारी इस व्यवस्था का हिस्सा बनी थी।

अब आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि इस अतिरिक्त घोषणा को सामान्य Form 6 की स्थायी अनिवार्य शर्त के तौर पर सभी राज्यों में लागू नहीं किया जाएगा।

SIR वाले राज्यों में ही अतिरिक्त घोषणा

चुनाव आयोग की नई व्यवस्था के अनुसार SIR चल रहे राज्यों में अतिरिक्त घोषणा पत्र की आवश्यकता बनी रह सकती है। इसका उद्देश्य SIR के दौरान पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी को प्रक्रिया में शामिल करना है।

इसके विपरीत, जिन राज्यों में SIR नहीं चल रहा है, वहां नए मतदाता सामान्य Form 6 के जरिए आवेदन कर सकेंगे। इसी तरह SIR की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद भी सामान्य मतदाता पंजीकरण व्यवस्था लागू होगी।

इससे नए मतदाताओं के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण हो गया है कि उनके राज्य में उस समय SIR की प्रक्रिया चल रही है या नहीं।

माता-पिता और दादा-दादी के पुराने रिकॉर्ड का मुद्दा

Form 6 से जुड़े अतिरिक्त घोषणा पत्र में परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी मांगे जाने को लेकर सवाल उठे थे। इसमें आवेदक को अपने या अपने परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड को पिछली SIR सूची से जोड़ने की जानकारी देनी होती थी।

इसी प्रावधान को लेकर यह सवाल सामने आया कि सामान्य मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित Form 6 में इस तरह की अतिरिक्त शर्त जोड़ने का वैधानिक आधार क्या है।

Form 6 Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है। इसी वजह से अतिरिक्त घोषणा पत्र को लेकर कानूनी प्रक्रिया और चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र पर भी चर्चा हुई।

पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक में हुआ फैसला

इस मामले को लेकर पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक में भी चर्चा हुई। बैठक के बाद यह तय किया गया कि SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा का इस्तेमाल उसी संदर्भ में किया जाएगा, जहां SIR की प्रक्रिया चल रही है।

इस फैसले के बाद सामान्य मतदाता पंजीकरण और SIR के दौरान होने वाली विशेष प्रक्रिया के बीच अंतर स्पष्ट हो गया है। यानी सामान्य परिस्थितियों में नए मतदाता को केवल इसलिए पुराने SIR रिकॉर्ड से अपने परिवार का विवरण जोड़ने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि वह Form 6 के जरिए नाम जुड़वा रहा है।

बिहार से सामने आया था मामला

Form 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ने की व्यवस्था बिहार में SIR शुरू होने के दौरान प्रमुख रूप से सामने आई थी। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नए मतदाताओं और मतदाता सूची में नाम से संबंधित जानकारी की जांच के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया अपनाई गई थी।

इसके बाद यही व्यवस्था SIR के दूसरे चरणों में भी चर्चा में रही। व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दलों और अन्य पक्षों की ओर से सवाल उठाए गए थे।

विवाद का एक प्रमुख मुद्दा यह था कि क्या सामान्य Form 6 में अतिरिक्त घोषणा को शामिल करने के लिए अलग से नियमों में संशोधन आवश्यक था या आयोग अपनी प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ऐसा कर सकता था।

RTI के जरिए भी मांगी गई थी जानकारी

इस मामले में सूचना के अधिकार यानी RTI के माध्यम से भी जानकारी मांगी गई थी। इसमें यह जानने की कोशिश की गई थी कि क्या Form 6 या Registration of Electors Rules, 1960 में बदलाव के लिए कानून मंत्रालय के पास कोई प्रस्ताव भेजा गया था।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संबंधित विभाग ने ऐसा कोई प्रस्ताव उपलब्ध होने की जानकारी नहीं दी थी। इसके बाद Form 6 में जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा पत्र के कानूनी आधार को लेकर सवाल और चर्चा में आए।

नए मतदाताओं के लिए क्या मायने रखता है

नए मतदाता के लिए इस बदलाव का सीधा संबंध आवेदन की प्रक्रिया से है। यदि किसी राज्य में SIR नहीं चल रहा है, तो मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए निर्धारित Form 6 सामान्य तरीके से भरा जा सकता है।

वहीं, SIR की प्रक्रिया वाले राज्य में आवेदन करने पर अतिरिक्त घोषणा पत्र दिखाई दे सकता है। ऐसे मामलों में आवेदक को SIR से जुड़े अतिरिक्त विवरण भी उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं।

इसलिए Form 6 भरने से पहले आवेदक को अपने राज्य में लागू मौजूदा मतदाता पंजीकरण व्यवस्था की जानकारी देखना जरूरी होगा।

मतदाता पंजीकरण में नियमों की भूमिका

मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया केवल ऑनलाइन फॉर्म भरने तक सीमित नहीं है। आवेदन के बाद संबंधित चुनावी अधिकारी स्तर पर विवरण की जांच और निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जाती है।

Form 6 के माध्यम से आवेदन करने वाले व्यक्ति को सही जानकारी उपलब्ध करानी होती है। गलत जानकारी देने या जरूरी तथ्य छिपाने की स्थिति में आवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।

नए फैसले से यह संकेत मिलता है कि SIR के दौरान इस्तेमाल होने वाली विशेष प्रक्रिया को सामान्य मतदाता पंजीकरण व्यवस्था से अलग रखा जाएगा। इससे SIR वाले राज्यों और अन्य राज्यों में Form 6 की प्रक्रिया के बीच अंतर साफ हो गया है।

आगे भी व्यवस्था राज्य की SIR स्थिति पर निर्भर करेगी

Form 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र को लेकर चुनाव आयोग की नई व्यवस्था का मुख्य आधार SIR की स्थिति है। जहां SIR चल रहा है, वहां विशेष घोषणा की जरूरत हो सकती है। जहां SIR नहीं चल रहा है, वहां सामान्य Form 6 व्यवस्था लागू रहेगी।

इस बदलाव के बाद नए मतदाताओं के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आवेदन के समय उनके राज्य में SIR की प्रक्रिया किस चरण में है। चुनाव आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल पर उपलब्ध फॉर्म और निर्देशों के अनुसार ही आवेदन करना होगा।

यह भी पढ़ें:

SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया में क्या-क्या बदलता है?

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नए मतदाताओं के पंजीकरण और पुराने मतदाता रिकॉर्ड की जांच के लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। SIR और सामान्य मतदाता पंजीकरण के नियमों को अलग-अलग समझना नए आवेदकों के लिए महत्वपूर्ण है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *