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Indian Politics: SIR के बाद वोटर लिस्ट से छूटे नाम जुड़ेंगे, 20 राज्यों में विशेष अभियान; Form 6 से मिलेगा मौका

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | SIR के बाद मतदाता सूची से छूटे योग्य लोगों के नाम जोड़ने के लिए 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। सामान्य Form 6 से आवेदन किया जा सकेगा।

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर आलम की खबर: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के बाद अगर किसी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है, तो उसके लिए अब दोबारा पंजीकरण का रास्ता उपलब्ध रहेगा। निर्वाचन आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस अभियान में छूटे हुए योग्य मतदाताओं के साथ 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके नए और पहली बार मतदान के पात्र युवाओं को भी मतदाता सूची में शामिल करने पर जोर रहेगा।

आयोग के निर्देश के मुताबिक इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगातार मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए सामान्य Form 6 का इस्तेमाल किया जा सकेगा। SIR के दौरान इस्तेमाल किया गया अतिरिक्त घोषणा पत्र अब उन राज्यों में जरूरी नहीं होगा, जहां SIR पूरा हो चुका है।

SIR के बाद Form 6 से आवेदन का रास्ता

मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए Form 6 पहले से निर्धारित सामान्य आवेदन प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने अब स्पष्ट किया है कि SIR की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद उन राज्यों में नाम जोड़ने के लिए इसी सामान्य प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाएगा।

इसका सीधा मतलब यह है कि यदि कोई व्यक्ति मतदाता बनने की पात्रता रखता है, लेकिन SIR के दौरान उसका नाम सूची में शामिल नहीं हो सका, तो वह सामान्य Form 6 के माध्यम से नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकता है। SIR के दौरान मांगा गया अतिरिक्त घोषणा पत्र इस प्रक्रिया में अनिवार्य नहीं रहेगा।

आयोग का यह निर्देश मतदाता सूची के लगातार अपडेट की व्यवस्था के तहत आया है। इसका एक उद्देश्य ऐसे पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करना भी है, जो किसी कारण से SIR के दौरान प्रक्रिया से बाहर रह गए।

20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलेगा अभियान

निर्वाचन आयोग ने 29 सितंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश भेजे थे। इसके बाद 1 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी इस व्यवस्था को दोहराया गया।

SIR जहां पूरा हो चुका है, वहां मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी मिलकर विशेष अभियान को आगे बढ़ाएंगे। इसका फोकस दो वर्गों पर विशेष रूप से रहेगा—SIR के दौरान छूटे योग्य मतदाता और ऐसे युवा जो पहली बार मतदाता बनने के योग्य हुए हैं।

इस प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची को लगातार अपडेट करने की व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाएगा।

पुराने और नए वोटर रोल का होगा मिलान

आयोग ने अधिकारियों को SIR से पहले और उसके बाद तैयार हुई मतदाता सूचियों का मिलान करने को भी कहा है। इसका उद्देश्य उन नामों की पहचान करना है, जो पहले की सूची में मौजूद थे लेकिन बाद की सूची में दिखाई नहीं दे रहे हैं।

ऐसे मामलों में अधिकारियों को यह पता लगाने के लिए प्रक्रिया अपनानी होगी कि नाम हटने की वजह क्या रही। खास तौर पर उन मामलों को देखा जाएगा जहां संबंधित व्यक्ति किसी अन्य मतदाता सूची में भी दर्ज नहीं है।

इस तरह की पहचान के बाद पात्र व्यक्ति को दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

BLO घर तक पहुंचकर कर सकते हैं मदद

विशेष अभियान में बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। अधिकारियों को ऐसे पात्र मतदाताओं की पहचान और नामांकन प्रक्रिया में सहायता करने के लिए कहा गया है।

जरूरत पड़ने पर BLO संबंधित मतदाता के घर तक पहुंचकर Form 6 उपलब्ध कराने और आवेदन प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं। आयोग ने राजनीतिक दलों और उनके बूथ लेवल एजेंटों की भागीदारी का भी निर्देश दिया है, ताकि SIR के बाद छूटे योग्य मतदाताओं की पहचान में सहयोग मिल सके।

इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल नए मतदाताओं का पंजीकरण करना नहीं है, बल्कि उन लोगों तक भी पहुंचना है जो पहले मतदाता सूची में थे या SIR के दौरान पात्र होने के बावजूद सूची में शामिल नहीं हो सके।

पहली बार वोट देने वालों के लिए भी मौका

विशेष अभियान का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके युवा हैं। ऐसे लोग जो पहली बार मतदान के लिए पात्र हुए हैं और अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, उनके नाम भी लगातार अपडेट की प्रक्रिया के तहत जोड़े जाएंगे।

इससे उन युवाओं को भी मतदाता सूची में शामिल होने का अवसर मिलेगा जो SIR के दौरान पंजीकरण प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाए थे।

निर्वाचन आयोग के अनुसार पात्र भारतीय नागरिक, जो निर्धारित आयु पूरी कर चुके हैं और कानून के तहत अयोग्य नहीं हैं, मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए पात्र होते हैं।

गोवा के मामलों से समझिए प्रक्रिया

गोवा में SIR के बाद छूटे कुछ मतदाताओं के मामलों ने इस प्रक्रिया का एक उदाहरण सामने रखा है। 97 ऐसे लोगों की पहचान हुई थी जिन्हें योग्य पाया गया, लेकिन उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके थे।

इसके बाद BLO को इन लोगों तक पहुंचकर Form 6 उपलब्ध कराने और आवेदन प्रक्रिया में सहायता करने के निर्देश दिए गए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 26 सितंबर तक 97 में से 81 लोगों ने Form 6 भर दिया था। बाद में आयोग ने बताया कि 97 में से 88 लोग या तो Form 6 के लिए आवेदन कर चुके थे या उनके आवेदन स्वीकार किए जा चुके थे।

बाकी मामलों में तीन लोगों के पास पुर्तगाली पासपोर्ट और छह लोगों के भारत से बाहर रहने की जानकारी सामने आई थी। यह उदाहरण बताता है कि SIR के बाद भी पात्रता की जांच और आवेदन की सामान्य प्रक्रिया के जरिए नाम दर्ज कराने का रास्ता मौजूद है।

SIR के दौरान नाम हटना अंतिम स्थिति नहीं

मतदाता सूची की किसी एक अवस्था में नाम दिखाई नहीं देना और हमेशा के लिए मतदान के अधिकार से बाहर हो जाना एक ही बात नहीं है। पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकता है।

इसी वजह से SIR पूरा होने के बाद सामान्य Form 6 के जरिए नामांकन की सुविधा को महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। आयोग ने भी स्पष्ट किया है कि SIR के दौरान लागू अतिरिक्त घोषणा की आवश्यकता उस विशेष प्रक्रिया तक सीमित थी।

नाम छूटा है तो क्या करें?

यदि कोई व्यक्ति संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में SIR पूरा होने के बाद भी मतदाता सूची में अपना नाम नहीं देख पा रहा है, तो उसे पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह मतदाता बनने की निर्धारित पात्रता पूरी करता है।

इसके बाद सामान्य Form 6 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन या निर्धारित चुनावी अधिकारियों के माध्यम से पूरी की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर स्थानीय BLO से भी जानकारी और सहायता ली जा सकती है।

आवेदन करते समय नाम, पता, आयु और अन्य जरूरी विवरण सही तरीके से देना महत्वपूर्ण है, ताकि आवेदन की जांच के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

राजनीतिक दलों और BLO की भी होगी भूमिका

विशेष अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आयोग ने राजनीतिक दलों और उनके बूथ लेवल एजेंटों को भी प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए कहा है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर ऐसे लोगों की पहचान करना है जो पात्र होने के बावजूद मतदाता सूची में दर्ज नहीं हैं।

यह व्यवस्था खास तौर पर उन इलाकों में उपयोगी हो सकती है जहां बड़ी संख्या में मतदाता स्थान बदलते हैं, युवा पहली बार पात्र होते हैं या SIR के दौरान किसी कारण से आवेदन पूरा नहीं हो पाया।

अब विशेष अभियान के दौरान अधिकारियों के सामने चुनौती यही होगी कि पात्र नागरिकों की पहचान कर उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में शामिल किया जाए।

आगे क्या होगा?

SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अब मतदाता सूची के लगातार अपडेट की प्रक्रिया के तहत यह विशेष अभियान आगे बढ़ेगा। एक तरफ पहले से छूटे पात्र मतदाताओं को शामिल करने पर जोर होगा, वहीं दूसरी तरफ नए और पहली बार मतदान के योग्य युवाओं के नाम भी दर्ज किए जाएंगे।

इस पूरी प्रक्रिया में Form 6 अहम माध्यम रहेगा। साथ ही पुराने और नए मतदाता रोल के मिलान तथा BLO की सहायता से उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी, जिनके नाम किसी कारण से सूची में नहीं रह पाए।

इसलिए SIR के बाद मतदाता सूची में नाम नहीं दिखने वाले पात्र नागरिकों के लिए अगला कदम अपनी पात्रता की पुष्टि कर सामान्य Form 6 के जरिए आवेदन करना है।

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मतदाता सूची में नाम की अहमियत

मतदाता सूची लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया का आधार है। किसी पात्र नागरिक का नाम सूची में दर्ज होना उसके मतदान की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए जरूरी है। SIR जैसी पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है, लेकिन इसके साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि पात्र नागरिकों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया स्पष्ट और सुलभ बनी रहे।

निर्वाचन आयोग का ताजा विशेष अभियान इसी लगातार अपडेट की व्यवस्था का हिस्सा है। अब इसकी प्रभावशीलता इस बात से जुड़ी होगी कि स्थानीय स्तर पर छूटे हुए पात्र मतदाताओं तक सूचना और आवेदन की सुविधा कितनी आसानी से पहुंचती है।

संपादकीय

मतदाता सूची में शुद्धता के साथ पात्र नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी

मतदाता सूची तैयार करना केवल नाम जोड़ने या हटाने की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है। इसके साथ पात्र नागरिकों की चुनावी भागीदारी भी जुड़ी होती है। इसलिए किसी भी पुनरीक्षण अभियान में दो पहलुओं का संतुलन जरूरी रहता है—सूची में अपात्र या डुप्लीकेट नामों की पहचान और पात्र नागरिकों के नाम सुनिश्चित करना।

SIR के बाद छूटे मतदाताओं के लिए सामान्य Form 6 से आवेदन की सुविधा और विशेष अभियान की व्यवस्था इस प्रक्रिया का अगला चरण है। अब स्थानीय चुनाव अधिकारियों, BLO और संबंधित नागरिकों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा।

सबसे जरूरी बात यह है कि जिस व्यक्ति को लगता है कि वह पात्र होने के बावजूद मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, वह निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी लेकर समय पर आवेदन करे। इससे मतदाता सूची के अपडेट की प्रक्रिया भी मजबूत होगी और पात्र नागरिकों के लिए अपनी स्थिति स्पष्ट कराने का रास्ता भी उपलब्ध रहेगा।

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