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Political News: शरद पवार से मुलाकात के बाद NCP विलय की चर्चा तेज, 10 नवंबर की बैठक पर टिकी नजरें

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की मुलाकात के बाद एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की अटकलें तेज हो गई हैं। सुनील तटकरे के बयान, अमित शाह से नेताओं की बैठक और 10 नवंबर के बाद संभावित बातचीत पर जानिए पूरी राजनीतिक हलचल।

7 नवंबर 2026, Alam Ki Khabar: महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर हलचल तेज हो गई है। एनसीपी (SP) प्रमुख शरद पवार की तबीयत खराब होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोन, प्रफुल्ल पटेल की अस्पताल में मुलाकात और सुनील तटकरे के बदले रुख ने राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है। अब सबकी नजर 10 नवंबर के बाद होने वाली संभावित बैठक पर है।


शरद पवार को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनकी हालत स्थिर बताई थी। शनिवार, 7 नवंबर को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस बीच, एनसीपी के दोनों गुटों के नेताओं के बीच हुई मुलाकातों ने पार्टी के भविष्य और संभावित एकीकरण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।


पीएम मोदी ने फोन कर जाना था शरद पवार का हाल


शरद पवार के करीबी विट्ठल मनियार के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन कर उनका हालचाल जाना और उन्हें आराम करने की सलाह दी। मनियार ने बताया कि बातचीत के दौरान मोदी ने सुप्रिया सुले का जिक्र करते हुए कहा था कि अब वह तैयार हैं और वे मिलकर देश की जिम्मेदारी संभालेंगे। प्रधानमंत्री ने पवार से अपनी सेहत पर ध्यान देने की अपील की थी।


इस बातचीत को लेकर महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह के कयास लगाए गए। हालांकि, इस फोन कॉल को एनसीपी के विलय या किसी राजनीतिक समझौते का संकेत मानने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


प्रफुल्ल पटेल की मुलाकात से बढ़ी चर्चा


5 नवंबर को एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचकर शरद पवार से मुलाकात की थी। पटेल ने इसे शिष्टाचार भेंट और स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए की गई मुलाकात बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल में राजनीतिक बातचीत नहीं हुई।


हालांकि, इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच 10 नवंबर के बाद फिर बैठकर चर्चा करने की बात सामने आई। बताया गया कि शरद पवार ने 10 नवंबर के बाद मिलने का प्रस्ताव रखा था और पटेल ने मुंबई में उपलब्ध रहने की बात कही थी। इसी घटनाक्रम के बाद दोनों एनसीपी गुटों के एक होने की अटकलें तेज हो गईं।


सुनील तटकरे के बयान से बदला राजनीतिक माहौल


एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा है कि फिलहाल दोनों गुटों के विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं चल रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अजित पवार के जीवित रहने पर दोनों पार्टियों का एक साथ आना संभव था। तटकरे के मुताबिक, अजित पवार ने विलय की प्रक्रिया और 12 फरवरी की तारीख को लेकर चर्चा की थी। उनके निधन के बाद यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।


तटकरे के इस बयान पर एनसीपी (SP) के नेता अनिल देशमुख ने सवाल उठाए। देशमुख ने कहा कि जब अजित पवार जीवित थे, तब दोनों दलों के एक होने का फैसला हो चुका था और तारीख भी तय की गई थी। लेकिन उस समय तटकरे ने ऐसी किसी बातचीत से इनकार किया था। अब उनके बयान में बदलाव क्यों आया है और पहले किसके दबाव में उन्होंने विलय की चर्चा से इनकार किया था, यह सवाल उठता है।


रोहित पवार ने भी उठाए सवाल


एनसीपी (SP) नेता रोहित पवार का दावा है कि दोनों गुटों के विलय को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी और अजित पवार परिवार को एकजुट देखना चाहते थे। उन्होंने तटकरे के पहले और अब के बयानों में अंतर पर सवाल उठाया है।


वहीं, एनसीपी (SP) नेता अनीश गवांडे ने कहा कि उनकी पार्टी में शामिल होने के इच्छुक किसी भी नेता का स्वागत है। इन बयानों से साफ है कि विलय को लेकर दोनों खेमों में अलग-अलग राजनीतिक संदेश दिए जा रहे हैं।


अमित शाह से मुलाकात के बाद NCP में अंदरूनी चर्चा


इस पूरे घटनाक्रम के बीच अजित पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी गुट के छह वरिष्ठ नेताओं की 2 नवंबर को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी चर्चा में है। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ, दिलीप वलसे पाटिल और धनंजय मुंडे शामिल बताए गए।


रिपोर्टों के मुताबिक, इस बैठक में पार्टी के सामूहिक नेतृत्व, आंतरिक विचार-विमर्श और पार्थ पवार की बढ़ती भूमिका को लेकर चिंता जताई गई थी। बैठक में सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार की गैरमौजूदगी ने भी अटकलों को हवा दी। हालांकि, एनसीपी की ओर से किसी भी आंतरिक विवाद से इनकार किया गया और बैठक को पहले से तय बताया गया।


क्या दोनों गुटों का विलय संभव है?


एनसीपी के दोनों गुटों के बीच एकता की चर्चा नई नहीं है। वर्ष 2023 में पार्टी के विभाजन के बाद से ही समय-समय पर दोनों खेमों के नेताओं के बीच नजदीकी और बातचीत की खबरें आती रही हैं। अब अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं।


एक तरफ सुनील तटकरे ने पुराने विलय प्रयासों की बात स्वीकार की है, तो दूसरी ओर प्रफुल्ल पटेल ने शरद पवार से मुलाकात को गैर-राजनीतिक बताया है। ऐसे में 10 नवंबर के बाद होने वाली संभावित बातचीत अहम हो सकती है।


फिलहाल दोनों गुटों के विलय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शरद पवार की अगुवाई में एनसीपी फिर एकजुट होगी या दोनों गुट अपनी अलग राजनीतिक राह पर आगे बढ़ेंगे।

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