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आईपीएल में ‘ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड’ नियम फिर विवादों में: अंगकृष रघुवंशी आउट से उठा बड़ा सवाल, जानिए पूरा इतिहास

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आईपीएल 2026 में अंगकृष रघुवंशी के ‘ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड’ आउट ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। जानिए इस दुर्लभ नियम का पूरा इतिहास, कैसे तय होता है इरादा और आईपीएल में इससे जुड़े बड़े विवादित मामले।

आईपीएल का रोमांच हर सीजन के साथ बढ़ता जा रहा है, लेकिन कई बार मैच के दौरान ऐसे फैसले सामने आते हैं जो सिर्फ स्कोरबोर्ड ही नहीं, बल्कि पूरे क्रिकेट जगत की बहस का विषय बन जाते हैं। आईपीएल 2026 के 38वें मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स के युवा बल्लेबाज अंगकृष रघुवंशी का ‘ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड’ के तहत आउट होना भी ऐसा ही एक मामला बन गया है। इस फैसले ने एक बार फिर इस दुर्लभ लेकिन बेहद संवेदनशील नियम को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

लखनऊ सुपर जाएंट्स के खिलाफ खेले गए इस मैच में रघुवंशी ने 9 गेंदों पर 8–9 रन बनाए थे, लेकिन एक रन लेते समय हुई स्थिति में अंपायर ने उन्हें फील्डिंग में बाधा डालने का दोषी मानते हुए आउट करार दे दिया। थर्ड अंपायर द्वारा रीप्ले देखने के बाद यह फैसला लिया गया, जिसके बाद मैदान से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छिड़ गई कि क्या यह सच में जानबूझकर की गई बाधा थी या केवल एक सामान्य रनिंग मूवमेंट।

कोलकाता नाइट राइडर्स के सपोर्ट स्टाफ और कई क्रिकेट एक्सपर्ट्स ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं और इसे “नेचुरल मूवमेंट” बताया है, जबकि अंपायरिंग निर्णय को नियमों के आधार पर सही ठहराया गया है।

क्या होता है ‘ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड’ नियम?

क्रिकेट के नियमों में लॉ 37 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि यदि कोई बल्लेबाज जानबूझकर फील्डिंग टीम के प्रयास में बाधा डालता है तो उसे आउट दिया जा सकता है। इसमें कई परिस्थितियां शामिल होती हैं जैसे—

थ्रो की दिशा में जानबूझकर आ जाना

रन-आउट से बचने के लिए लाइन बदलना

कैच या थ्रो में जानबूझकर बाधा डालना

गेंद को बैट के अलावा किसी और तरीके से रोकना

लेकिन इस पूरे नियम की सबसे महत्वपूर्ण और विवादित बात “इरादा” यानी INTENT है। अंपायर को यह तय करना होता है कि क्या बल्लेबाज ने जानबूझकर ऐसा किया या वह केवल खेल की सामान्य स्थिति थी।

आईपीएल में कब-कब हुआ यह बड़ा विवाद?

आईपीएल इतिहास में यह नियम बहुत कम बार लागू हुआ है, लेकिन जब भी हुआ है, इसने क्रिकेट जगत को हिला दिया है।

1. यूसुफ पठान (2013)

आईपीएल में यह नियम पहली बार बड़े स्तर पर यूसुफ पठान के खिलाफ लागू हुआ था। कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेलते हुए उन्होंने पुणे वॉरियर्स के खिलाफ 72 रनों की शानदार पारी खेली, लेकिन रन लेने के दौरान गेंद की दिशा में आने और पैर से गेंद रोकने की स्थिति में उन्हें आउट कर दिया गया। यह फैसला आज भी क्रिकेट फैंस के बीच बहस का विषय बना हुआ है।

2. अमित मिश्रा (2019)

दिल्ली कैपिटल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के मैच में अमित मिश्रा रन लेते समय थ्रो की लाइन में आ गए थे। अंपायर ने इसे जानबूझकर बाधा मानते हुए उन्हें आउट दिया। हालांकि मैच दिल्ली ने जीत लिया, लेकिन यह फैसला लंबे समय तक चर्चा में रहा।

3. रवींद्र जडेजा (2024)

चेन्नई सुपर किंग्स के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच में आउट दिया गया था। रन लेते समय उनकी स्थिति थ्रो की लाइन में आ गई और गेंद उनके शरीर से टकरा गई। थर्ड अंपायर ने इसे फील्डिंग में बाधा मानते हुए आउट करार दिया, जिससे भारी विवाद हुआ।

4. अंगकृष रघुवंशी (2026)

ताजा मामले में रघुवंशी का विकेट सबसे ज्यादा चर्चा में है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी मूवमेंट नेचुरल थी, जबकि अंपायर ने इसे बाधा मानते हुए आउट दिया। इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या तकनीक और रीप्ले के बावजूद इरादे को सही तरीके से तय किया जा सकता है।

क्यों हर बार विवाद में आता है यह नियम?

इस नियम की सबसे बड़ी समस्या “इरादा” है। मैदान पर कोई भी तकनीक सीधे खिलाड़ी के मन को नहीं पढ़ सकती। ऐसे में निर्णय पूरी तरह अंपायर की व्याख्या और रीप्ले पर निर्भर करता है।

हर मामले में ये सवाल उठते हैं—

क्या बल्लेबाज ने जानबूझकर रास्ता बदला?

क्या वह सिर्फ संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा था?

या यह केवल खेल का सामान्य हिस्सा था?

इन्हीं सवालों के कारण हर बार यह नियम विवादों में आ जाता है और फैसले पर अलग-अलग राय बनती है।

क्रिकेट का सबसे संवेदनशील नियम

‘ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड’ क्रिकेट के सबसे कम इस्तेमाल होने वाले लेकिन सबसे संवेदनशील नियमों में से एक है। यह केवल तकनीकी नहीं बल्कि मानसिक निर्णय भी है। इसमें खेल की भावना, खिलाड़ी की मंशा और स्थिति का पूरा विश्लेषण शामिल होता है।

यही वजह है कि हर बार जब यह नियम लागू होता है, तो क्रिकेट विशेषज्ञों, पूर्व खिलाड़ियों और फैंस के बीच लंबी बहस शुरू हो जाती है। कुछ लोग इसे सही फैसला मानते हैं, तो कुछ इसे खेल की भावना के खिलाफ बताते हैं।

निष्कर्ष

आईपीएल 2026 का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि क्रिकेट सिर्फ रन और विकेट का खेल नहीं, बल्कि नियमों की व्याख्या और इरादों की परीक्षा भी है। अंगकृष रघुवंशी का विकेट भले ही स्कोरकार्ड पर एक साधारण आउट दिखे, लेकिन इसके पीछे की बहस क्रिकेट इतिहास में एक और बड़ा अध्याय जोड़ गई है।

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