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वैभव सूर्यवंशी का तूफान, IPL में सबसे तेज 1000 रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज बने

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राजस्थान रॉयल्स के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ क्वालिफायर-2 में 96 रन की शानदार पारी खेलकर आईपीएल में 1000 रन पूरे किए। वह सबसे कम पारियों में यह उपलब्धि हासिल करने वाले भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं।

इंडियन प्रीमियर लीग के मौजूदा सीजन में अगर किसी युवा बल्लेबाज ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं तो वह नाम वैभव सूर्यवंशी का है। राजस्थान रॉयल्स के इस युवा विस्फोटक बल्लेबाज ने एक बार फिर अपनी बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। गुजरात टाइटंस के खिलाफ क्वालिफायर-2 मुकाबले में वैभव ने शानदार 96 रन की पारी खेलते हुए न सिर्फ अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया बल्कि आईपीएल इतिहास में एक नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। वैभव अब आईपीएल में सबसे तेज 1000 रन पूरे करने वाले भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं।

गुजरात टाइटंस के खिलाफ दबाव भरे मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स की शुरुआत बेहद खराब रही थी। टीम ने शुरुआती ओवरों में ही अपने दो महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए थे। ऐसे मुश्किल समय में वैभव सूर्यवंशी ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और मैच को पूरी तरह बदलकर रख दिया। उन्होंने संयम और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाते हुए ऐसी पारी खेली जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

वैभव ने इस मुकाबले में 47 गेंदों का सामना करते हुए 96 रन बनाए। उनकी इस पारी में आठ शानदार चौके और सात लंबे छक्के शामिल रहे। वह लगातार दूसरे मैच में शतक के करीब पहुंचे, लेकिन दुर्भाग्य से चार रन से अपना दूसरा लगातार शतक पूरा करने से चूक गए। हालांकि, उनकी इस पारी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने आईपीएल में अपने 1000 रन पूरे कर लिए।

युवा बल्लेबाज ने यह उपलब्धि सिर्फ 23 पारियों में हासिल की है। इसके साथ ही वह आईपीएल इतिहास में सबसे कम पारियों में 1000 रन बनाने वाले संयुक्त रूप से दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले वेस्टइंडीज के पूर्व बल्लेबाज लेंडिल साइमन्स ने भी 23 पारियों में यह मुकाम हासिल किया था। आईपीएल में सबसे तेज 1000 रन बनाने का रिकॉर्ड अब भी शॉन मार्श के नाम दर्ज है, जिन्होंने केवल 21 पारियों में यह कारनामा किया था। हालांकि भारतीय खिलाड़ियों की सूची में वैभव अब पहले स्थान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने इस मामले में साई सुदर्शन को पीछे छोड़ दिया, जिन्होंने 25 पारियों में 1000 रन पूरे किए थे।

मैच की बात करें तो राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। टीम को उम्मीद थी कि उनके सलामी बल्लेबाज तेज शुरुआत देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। यशस्वी जायसवाल शुरुआती ओवर में ही मोहम्मद सिराज का शिकार बन गए और केवल एक रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद ध्रुव जुरेल भी ज्यादा देर टिक नहीं सके और कगिसो रबाडा ने उन्हें सात रन के निजी स्कोर पर आउट कर दिया।

दो शुरुआती झटकों के बाद राजस्थान की स्थिति दबाव में आ गई थी। ऐसे समय में टीम प्रबंधन ने रणनीति बदलते हुए कप्तान रियान पराग की जगह अनुभवी रवींद्र जडेजा को बल्लेबाजी के लिए भेजा। जडेजा ने आते ही आक्रामक रुख अपनाया और दूसरे छोर पर मौजूद वैभव सूर्यवंशी को खुलकर खेलने का मौका दिया। दोनों बल्लेबाजों के बीच शानदार तालमेल देखने को मिला।

जहां जडेजा अनुभव के साथ खेल को संभाल रहे थे, वहीं वैभव ने अपनी स्वाभाविक आक्रामक शैली जारी रखी। दोनों के बीच तेज रफ्तार साझेदारी हुई जिसने राजस्थान को मुकाबले में वापस ला दिया। इस दौरान वैभव ने 31 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। दिलचस्प बात यह रही कि यह उनके आईपीएल करियर का सबसे धीमा अर्धशतक रहा। इससे पहले उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ 27 गेंदों में पचासा लगाया था।

हालांकि आंकड़ों के हिसाब से यह धीमा अर्धशतक था, लेकिन मैच की परिस्थिति को देखते हुए यह बेहद महत्वपूर्ण पारी साबित हुई। शुरुआती विकेट गिरने के बाद वैभव ने जोखिम भरे शॉट खेलने की बजाय पहले पारी को संभालने पर ध्यान दिया। जब सेट हो गए तो फिर उन्होंने बड़े शॉट्स लगाकर गुजरात के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया।

एलिमिनेटर मुकाबले में भी वैभव ने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ तूफानी बल्लेबाजी की थी। मुल्लांपुर के मैदान पर खेले गए उस मैच में उन्होंने केवल 29 गेंदों में 97 रन ठोक दिए थे। लगातार दो बड़े मुकाबलों में उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने साफ कर दिया है कि वह आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट के बड़े सितारे बन सकते हैं।

गुजरात के खिलाफ मुकाबले में वैभव और जडेजा के बीच 65 गेंदों पर 127 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने राजस्थान को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि बीच में जडेजा चोट के कारण रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर चले गए थे। इसके बाद कप्तान रियान पराग बल्लेबाजी के लिए आए, लेकिन वह बड़ी पारी नहीं खेल सके और 11 रन बनाकर आउट हो गए।

गुजरात टाइटंस के गेंदबाजों ने वापसी करने की कोशिश की। जेसन होल्डर ने लगातार विकेट निकालकर राजस्थान पर दबाव बढ़ाया। दासुन शनाका और जोफ्रा आर्चर भी जल्दी आउट हो गए। इसके बाद जडेजा दोबारा बल्लेबाजी करने लौटे और उन्होंने वैभव के साथ मिलकर फिर से रन गति तेज कर दी।

जब ऐसा लग रहा था कि वैभव अपना शतक पूरा कर लेंगे, तभी कगिसो रबाडा ने उन्हें आउट कर गुजरात को बड़ी सफलता दिलाई। वैभव के आउट होते ही पूरा स्टेडियम खड़ा होकर तालियां बजाने लगा। उनकी इस पारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह दबाव में भी बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं।

मौजूदा सीजन में यह वैभव का छठा 50 प्लस स्कोर रहा, जबकि आईपीएल करियर में वह आठवीं बार 50 से ज्यादा रन बनाने में सफल रहे हैं। इतनी कम उम्र में जिस तरह की बल्लेबाजी वह कर रहे हैं, उससे क्रिकेट विशेषज्ञ भी काफी प्रभावित हैं। कई पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि यदि वैभव इसी तरह निरंतर प्रदर्शन करते रहे तो वह जल्द ही भारतीय टीम के लिए भी मजबूत दावेदारी पेश कर सकते हैं।

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