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Sports News: 12 साल बाद खेल रत्न के बिना राष्ट्रीय खेल पुरस्कार, 17 खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 में इस बार किसी खिलाड़ी को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न नहीं दिया गया। 17 खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया, जिसमें दिव्या देशमुख, विदित गुजराती और तेजस्विन शंकर शामिल हैं।

नई दिल्ली, 18 अगस्त। आलम की खबर: राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 की घोषणा के साथ इस बार एक ऐसा बदलाव सामने आया है, जिसने खेल जगत का ध्यान खींचा है। 12 साल बाद पहली बार किसी खिलाड़ी को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया है। इससे पहले 2014 में ऐसा हुआ था। इस साल 17 खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है, जिनमें शतरंज, एथलेटिक्स और बैडमिंटन सहित कई खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं।

अर्जुन पुरस्कार के लिए चुने गए खिलाड़ियों में शतरंज की युवा प्रतिभा दिव्या देशमुख, अनुभवी ग्रैंडमास्टर विदित गुजराती, हाई जंप एथलीट तेजस्विन शंकर, बैडमिंटन खिलाड़ी गायत्री गोपीचंद और तृषा जॉली जैसे नाम प्रमुख हैं।

खेल रत्न के लिए इस बार कोई नाम नहीं

राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न देश का सर्वोच्च खेल सम्मान है। इस बार चयन समिति की ओर से किसी खिलाड़ी का नाम खेल रत्न के लिए नहीं चुना गया। 2014 के बाद यह पहली बार है जब पुरस्कारों की सूची में खेल रत्न का नाम नहीं है।

खेल रत्न पुरस्कार की शुरुआत 1991-92 में तत्कालीन सरकार ने की थी। शुरुआत में इसका नाम राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार था। वर्ष 2021 में इसका नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कर दिया गया।

दिव्या देशमुख की उपलब्धि ने दिलाया अर्जुन सम्मान

शतरंज में दिव्या देशमुख का चयन इस साल के अर्जुन पुरस्कार के प्रमुख आकर्षणों में है। उन्होंने वर्ष 2025 में FIDE Women's World Cup का खिताब जीतकर भारतीय शतरंज में बड़ी उपलब्धि हासिल की थी।

दिव्या की उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि महिला शतरंज में भारत लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। उनके प्रदर्शन ने युवा खिलाड़ियों के लिए भी नई उम्मीद पैदा की है।

वहीं ग्रैंडमास्टर विदित गुजराती को भी अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। विदित लंबे समय से भारतीय शतरंज के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं।

पिता की इच्छा के खिलाफ एथलेटिक्स चुना, अब अर्जुन अवॉर्ड

हाई जंप एथलीट तेजस्विन शंकर की कहानी भी इस पुरस्कार सूची में खास है। शुरुआती दौर में उनके पिता चाहते थे कि तेजस्विन पढ़ाई पर अधिक ध्यान दें। यदि खेल में जाना ही हो तो क्रिकेट को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई थी।

लेकिन स्कूल के कोच ने उनकी एथलेटिक क्षमता पहचानी। इसके बाद तेजस्विन ने हाई जंप को अपना मुख्य खेल बना लिया। कम उम्र में ही उन्होंने शानदार प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।

बताया जाता है कि करीब 15 साल की उम्र में तेजस्विन ने अपने पिता को भावुक पत्र लिखकर एथलेटिक्स जारी रखने की अनुमति मांगी थी। पिता ने उनकी इच्छा स्वीकार कर ली। इसके कुछ समय बाद ही उनके पिता का निधन हो गया।

तेजस्विन ने इसके बाद हाई जंप में लगातार अपनी पहचान मजबूत की। 17 साल की उम्र में उन्होंने 2.26 मीटर की छलांग लगाकर सीनियर नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा था।

कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले विवाद और फिर कोर्ट का आदेश

तेजस्विन के करियर में 2022 एक अहम मोड़ साबित हुआ। उन्होंने 2.27 मीटर का कॉमनवेल्थ गेम्स क्वालिफाइंग मार्क हासिल किया था और उस समय इस मानक को पूरा करने वाले वह इकलौते भारतीय थे।

इसके बावजूद उनका बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय टीम में चयन नहीं हुआ। तेजस्विन ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। अदालत के आदेश के बाद उन्हें टीम में शामिल किया गया।

बर्मिंघम में तेजस्विन ने 2.22 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता। अब राष्ट्रीय खेल पुरस्कार में अर्जुन अवॉर्ड के लिए उनका चयन उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि बन गया है।

बैडमिंटन में गायत्री और तृषा को सम्मान

बैडमिंटन में गायत्री गोपीचंद और तृषा जॉली को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। महिला डबल्स में दोनों खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मजबूत दावेदारी पेश की है।

दोनों की जोड़ी ने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अर्जुन पुरस्कार के लिए उनका चयन महिला बैडमिंटन में भारत की बढ़ती ताकत को भी दर्शाता है।

84 साल के फुटबॉल दिग्गज को लाइफटाइम अर्जुन अवॉर्ड

राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में इस बार एक बेहद वरिष्ठ खिलाड़ी का नाम भी खास चर्चा में है। 84 वर्षीय आई. अरुमायनायगम को अर्जुन पुरस्कार की लाइफटाइम कैटेगरी के लिए चुना गया है।

अरुमायनायगम उस भारतीय फुटबॉल टीम का हिस्सा रहे थे जिसने 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। उनके लंबे खेल योगदान को देखते हुए उन्हें लाइफटाइम कैटेगरी में सम्मानित करने का फैसला किया गया है।

यह सम्मान भारतीय फुटबॉल के उस दौर की उपलब्धियों को भी याद करने का अवसर है, जब एशियाई स्तर पर भारतीय टीम ने अपनी मजबूत पहचान बनाई थी।

अर्जुन पुरस्कार की सूची ने बढ़ाया सम्मान

इस साल अर्जुन पुरस्कार के लिए चुने गए खिलाड़ियों में अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं। इससे राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के जरिए क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी पहचान मिलने का संदेश गया है।

खेल रत्न के लिए इस बार कोई नाम नहीं चुना गया, लेकिन अर्जुन पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों की सूची में युवा और अनुभवी दोनों तरह के खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व दिखाई देता है।

राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों का उद्देश्य देश के उन खिलाड़ियों को सम्मान देना है जिन्होंने अपने प्रदर्शन के जरिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल जगत में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

इस बार दिव्या देशमुख, विदित गुजराती, तेजस्विन शंकर, गायत्री गोपीचंद और तृषा जॉली जैसे नामों का चयन भारतीय खेलों की विविधता को सामने लाता है। वहीं आई. अरुमायनायगम को लाइफटाइम कैटेगरी में सम्मान मिलना भारतीय खेल इतिहास की पुरानी उपलब्धियों को नई पीढ़ी से जोड़ने वाला फैसला है।

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खेल पुरस्कारों में इस बार का संदेश

राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों की इस साल की सूची को केवल सम्मान पाने वाले खिलाड़ियों के नामों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें भारतीय खेलों की बदलती तस्वीर भी दिखाई देती है। शतरंज से लेकर एथलेटिक्स और बैडमिंटन तक अलग-अलग क्षेत्रों के खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है।

दिव्या देशमुख जैसी युवा खिलाड़ी का सम्मान बताता है कि भारत में शतरंज की नई पीढ़ी तेजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना रही है। वहीं तेजस्विन शंकर की कहानी संघर्ष, परिवार और खेल के प्रति समर्पण का उदाहरण है।

गायत्री गोपीचंद और तृषा जॉली का चयन महिला बैडमिंटन के बढ़ते स्तर को रेखांकित करता है। दूसरी ओर आई. अरुमायनायगम को लाइफटाइम अर्जुन पुरस्कार मिलना पुराने दौर के खिलाड़ियों के योगदान को सम्मान देने की परंपरा को मजबूत करता है।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रहेगी कि इस बार खेल रत्न किसी खिलाड़ी को नहीं मिला। यह 12 वर्षों में पहली ऐसी स्थिति है। हालांकि इससे अर्जुन पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों की उपलब्धि कम नहीं होती। आने वाले समय में यही खिलाड़ी अपने प्रदर्शन के जरिए देश के सर्वोच्च खेल सम्मान की दौड़ में भी शामिल हो सकते हैं।

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