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Cricket News: धोनी के संन्यास के कुछ पल बाद रैना ने भी लिया था बड़ा फैसला, माही बोले- ये क्या किया तूने?

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | सुरेश रैना ने 15 अगस्त 2020 को अपने संन्यास के फैसले और एमएस धोनी की प्रतिक्रिया का खुलासा किया। जानिए दोनों दिग्गजों की दोस्ती और क्रिकेट सफर से जुड़ी पूरी कहानी।

नई दिल्ली, 5 सितंबर। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 15 अगस्त 2020 का दिन दो बड़े नामों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई लेने के कारण हमेशा याद किया जाएगा। एमएस धोनी के संन्यास की घोषणा के कुछ ही देर बाद सुरेश रैना ने भी इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहने का ऐलान कर दिया था। दोनों के इस फैसले ने क्रिकेट प्रशंसकों को हैरान कर दिया था। अब रैना ने उस दौर को याद करते हुए बताया है कि उनके अचानक लिए गए फैसले पर धोनी का पहला रिएक्शन क्या था।

एमएस धोनी और सुरेश रैना के बीच सिर्फ मैदान का रिश्ता नहीं था। दोनों ने भारतीय टीम के अलावा Chennai Super Kings के लिए भी लंबे समय तक साथ क्रिकेट खेला। यही वजह है कि धोनी के बाद रैना का संन्यास लेना क्रिकेट जगत में एक भावुक पल बन गया।

15 अगस्त 2020 को बदला था क्रिकेट का एक अध्याय

15 अगस्त 2020 की शाम धोनी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। उन्होंने अपने संदेश में भारतीय समयानुसार शाम 7:29 बजे से खुद को रिटायर्ड मानने की बात कही थी।

धोनी के ऐलान के कुछ ही समय बाद रैना ने भी अपने अंतरराष्ट्रीय करियर पर विराम लगाने का फैसला कर लिया। दोनों उस समय चेन्नई सुपरकिंग्स के साथ जुड़े हुए थे और आईपीएल के लिए यूएई रवाना होने की तैयारियों में जुटे थे।

कोरोना महामारी के कारण 2020 का आईपीएल भारत की जगह यूएई में आयोजित किया गया था। ऐसे माहौल में दोनों खिलाड़ियों का एक साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर होना क्रिकेट प्रशंसकों के लिए बेहद भावुक क्षण था।

रैना ने बताया, धोनी को भी नहीं था अंदाजा

रैना ने हाल ही में आकाश चोपड़ा के पॉडकास्ट 'बैट एंड बॉल' में उस समय की बातचीत को याद किया। उनके मुताबिक, उन्होंने जब धोनी को बताया कि अब वह भी संन्यास लेने का फैसला कर चुके हैं तो माही इस निर्णय से चौंक गए थे।

रैना के मुताबिक धोनी की प्रतिक्रिया कुछ ऐसी थी कि उन्होंने उनसे सवाल किया कि उन्होंने यह क्या कर दिया।

रैना के लिए यह फैसला अचानक जरूर दिखाई देता है, लेकिन उनके भीतर काफी समय से क्रिकेट के अगले चरण को लेकर विचार चल रहा था। उनका कहना था कि खिलाड़ी अपने करियर के दौरान देश के लिए बहुत कुछ करता है और परिवार भी उसके लिए कई त्याग करता है। एक समय ऐसा आता है जब परिवार के साथ ज्यादा वक्त बिताने की इच्छा भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

उम्र और हालात ने भी किया प्रभावित

रैना ने बताया कि उस समय वह करीब 32-33 वर्ष के थे। क्रिकेट में इस स्तर पर पहुंचने के बाद फैसले केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं लिए जाते। खिलाड़ी की मानसिक स्थिति, परिवार, टीम के साथ संबंध और भविष्य की योजनाएं भी भूमिका निभाती हैं।

रैना के मुताबिक उन्हें उस समय लगा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला उनके लिए सही था। धोनी के संन्यास के बाद दोनों के बीच हुई बातचीत ने इस फैसले को और भावुक बना दिया।

धोनी ने रैना के लिए बदली थी अपनी बल्लेबाजी की भूमिका

रैना ने धोनी के साथ अपने क्रिकेट संबंध को याद करते हुए एक और महत्वपूर्ण बात बताई। उनके अनुसार धोनी ने कई मौकों पर टीम की जरूरत के मुताबिक अपनी बल्लेबाजी की स्थिति में बदलाव किया, ताकि दूसरे खिलाड़ियों को अपनी पसंद के क्रम पर खेलने का अवसर मिल सके।

रैना का मानना है कि धोनी ने सिर्फ कप्तान के तौर पर फैसले नहीं लिए बल्कि खिलाड़ियों की क्षमताओं पर भी भरोसा किया। टीम में युवराज सिंह और रैना जैसे खिलाड़ियों को ऊपर बल्लेबाजी का अवसर देने के लिए धोनी ने अपनी भूमिका के साथ समझौता किया।

रैना के लिए यह केवल बल्लेबाजी क्रम का बदलाव नहीं था। उन्हें लगता है कि जब कप्तान आपकी क्षमता पर खुद से ज्यादा भरोसा करता है तो उस भरोसे को प्रदर्शन के जरिए वापस करना खिलाड़ी की जिम्मेदारी बन जाती है।

'माही ने मुझ पर भरोसा किया'

रैना ने धोनी के नेतृत्व को याद करते हुए कहा कि जब किसी खिलाड़ी को कप्तान का इतना भरोसा मिलता है तो उसके अंदर टीम के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की भावना और मजबूत होती है।

उनके अनुसार बल्लेबाजी के अलावा गेंदबाजी और फील्डिंग में भी उन्होंने पूरी मेहनत करने की कोशिश की। उनका मानना था कि टीम के लिए खेलते समय केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों के बारे में नहीं सोचना चाहिए।

रैना और धोनी की साझेदारी भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित खिलाड़ी संबंधों में रही है। मैदान पर दोनों के बीच तालमेल और चेन्नई सुपरकिंग्स में लंबे समय तक साथ खेलने के कारण प्रशंसकों ने इस जोड़ी को विशेष पहचान दी।

क्रिकेट से आगे बढ़कर दोस्ती बनी मजबूत

रैना की बातों से साफ है कि धोनी के साथ उनका रिश्ता सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने माना कि जब कोई व्यक्ति आपके लिए लगातार समझौते करता है और आपकी क्षमता पर भरोसा दिखाता है तो उसके प्रति सम्मान और जुड़ाव स्वाभाविक रूप से गहरा होता जाता है।

यही वजह है कि धोनी और रैना की दोस्ती क्रिकेट से संन्यास के बाद भी प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है। दोनों ने भारतीय क्रिकेट और चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए कई यादगार मुकाबलों में साथ योगदान दिया।

रैना के मुताबिक, उनके रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत आपसी भरोसा रहा। उन्होंने यह भी माना कि किसी दोस्त या साथी के लिए सिर्फ भावनाएं काफी नहीं होतीं, बल्कि उसके विश्वास को अपनी क्षमता और प्रदर्शन से सम्मान देना भी जरूरी है।

दो संन्यास, एक यादगार तारीख

15 अगस्त 2020 भारतीय क्रिकेट के लिए इसलिए भी खास बन गया क्योंकि स्वतंत्रता दिवस के दिन देश के दो लोकप्रिय क्रिकेटरों ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को विराम दिया। धोनी ने पहले संन्यास का ऐलान किया और उसके कुछ ही समय बाद रैना ने भी वही रास्ता चुना।

धोनी का फैसला लंबे समय से संभावित माना जा रहा था, लेकिन रैना का उसी दिन संन्यास लेना प्रशंसकों के लिए भावनात्मक रूप से ज्यादा बड़ा झटका था। अब वर्षों बाद रैना द्वारा उस समय के धोनी के रिएक्शन को याद करना उस ऐतिहासिक दिन की कहानी में एक नया भावनात्मक पहलू जोड़ता है।

दोनों ने भारतीय क्रिकेट को अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी सेवाएं दीं। धोनी ने कप्तान और विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में कई ऐतिहासिक सफलताएं दिलाईं, जबकि रैना ने मध्यक्रम के आक्रामक बल्लेबाज, उपयोगी गेंदबाज और बेहतरीन फील्डर के तौर पर टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आज जब दोनों अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर हैं, तब भी उनकी साझेदारी और दोस्ती क्रिकेट प्रशंसकों की यादों में कायम है। रैना के खुलासे ने एक बार फिर यह दिखाया कि क्रिकेट के मैदान पर बने कुछ रिश्ते आंकड़ों और ट्रॉफियों से कहीं आगे निकल जाते हैं।

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भरोसे से बना था यह रिश्ता

धोनी और रैना की कहानी क्रिकेट में उस रिश्ते की मिसाल है, जिसमें कप्तान और खिलाड़ी के बीच भरोसा धीरे-धीरे व्यक्तिगत दोस्ती में बदल जाता है। रैना के खुलासे से यह भी समझ आता है कि किसी खिलाड़ी के करियर में कप्तान का विश्वास कितना बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

धोनी ने अपनी कप्तानी में कई खिलाड़ियों को उनकी क्षमता के मुताबिक मौके दिए। रैना के लिए यह अनुभव इसलिए खास रहा क्योंकि उन्हें लगा कि कप्तान उनके अंदर मौजूद प्रतिभा पर भरोसा करता है। बदले में रैना ने टीम के लिए अपनी भूमिका को पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश की।

शायद यही कारण है कि दोनों के संन्यास का दिन भी एक साथ याद किया जाता है। एक ने संन्यास का ऐलान किया और दूसरे ने कुछ देर बाद उसी राह पर चलने का फैसला कर लिया। क्रिकेट खत्म हुआ, लेकिन दोनों के बीच का रिश्ता खत्म नहीं हुआ। यही इस कहानी की सबसे खास बात है।

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