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राजगीर में टूटा वर्षों पुराना प्रोटोकॉल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अंदाज़ ने खींचा सियासी ध्यान

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राजगीर।सरकारी प्रोटोकॉल आमतौर पर बेहद सख्त और स्पष्ट होते हैं, खासकर तब जब बात पुलिस परेड के निरीक्षण जैसी औपचारिक प्रक्रिया की हो। वर्षों से चली आ रही परंपरा यही रही है कि मुख्यमंत्री के साथ निरीक्षण जीप पर केवल पुलिस महानिदेशक (DGP) मौजूद रहते हैं। लेकिन शुक्रवार को राजगीर स्थित बिहार पुलिस अकादमी में जो दृश्य सामने आया, उसने इस स्थापित व्यवस्था को अचानक सुर्खियों में ला दिया।

जैसे ही परेड निरीक्षण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हुई, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्य के डीजीपी विनय कुमार निरीक्षण जीप पर सवार हुए। सब कुछ नियमों के अनुरूप चल रहा था। तभी मुख्यमंत्री ने ऐसा कदम उठाया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को स्पष्ट निर्देश देते हुए निरीक्षण जीप पर आने को कहा। मुख्यमंत्री की आवाज़ में आदेश था और मंच पर मौजूद अधिकारी व नेता चौंक उठे।

सम्राट चौधरी के जीप पर चढ़ते ही मामला यहीं नहीं रुका। इसके बाद मुख्यमंत्री ने संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार को भी बुलाया। श्रवण कुमार ने पहले शालीनता के साथ हाथ जोड़कर दूरी बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री के बार-बार कहने पर अंततः उन्हें भी जीप पर सवार होना पड़ा।

प्रोटोकॉल से आगे निकलता सत्ता का संदेश

इस तरह परेड निरीक्षण के दौरान एक ही जीप पर मुख्यमंत्री, डीजीपी और तीन मंत्री मौजूद रहे—एक ऐसा दृश्य जो वर्षों पुराने प्रोटोकॉल से बिल्कुल अलग था। यह केवल एक औपचारिक चूक नहीं, बल्कि सत्ता के संचालन को लेकर एक सशक्त राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में अब इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं। कुछ इसे मुख्यमंत्री का सहज और अनौपचारिक अंदाज़ बता रहे हैं, तो कुछ इसे एक स्पष्ट संदेश मान रहे हैं—कि सरकार, प्रशासन और पुलिस एक साझा मंच पर खड़े हैं और नेतृत्व पूरी तरह कमान अपने हाथ में रखे हुए है।

नीतीश कुमार का आदेशात्मक और आत्मविश्वासी रूप

राजगीर में दिखा नीतीश कुमार का यह रूप सिर्फ प्रोटोकॉल से हटकर नहीं था, बल्कि उनके नेतृत्व शैली को भी उजागर करता है। एक ऐसा मुख्यमंत्री, जो नियमों की सीमाओं से ऊपर उठकर अपनी टीम को साथ खड़ा करना जानता है और मौके पर ही सत्ता का संदेश देने से नहीं हिचकता।

जो भी निष्कर्ष निकाला जाए, इतना तय है कि राजगीर में हुआ यह निरीक्षण केवल परेड तक सीमित नहीं रहा। यह सत्ता, व्यवस्था और नेतृत्व के संतुलन पर एक नई राजनीतिक बहस की शुरुआत बन गया है—और नीतीश कुमार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं।

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