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उम्र का संयोग या रणनीतिक संदेश? 45 की भाजपा ने 45 साल के नितिन पर जताया भरोसा

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पटना।
भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक बदलाव के संकेत देते हुए युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का बड़ा फैसला किया है। पांच बार के विधायक और बिहार सरकार में अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे नितिन नवीन को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। इस फैसले ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि इस दौड़ में कई कद्दावर नेताओं के नाम चर्चा में थे।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि नितिन नवीन ने जमीनी संगठन से लेकर सरकार तक संतुलन बनाकर काम किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नितिन नवीन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने एक कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है और संगठनात्मक अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

दिग्गजों को पीछे छोड़कर मिला भरोसा

सूत्रों के मुताबिक, कार्यकारी अध्यक्ष पद के लिए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास और संगठन के रणनीतिकार सुनील बंसल जैसे नामों पर भी विचार हुआ। लेकिन अंततः पार्टी ने अपेक्षाकृत युवा चेहरे नितिन नवीन पर भरोसा जताया। इसी कारण राजनीतिक विश्लेषक उन्हें भाजपा का “डार्क हॉर्स” भी बता रहे हैं।

भाजपा और नितिन—उम्र का दिलचस्प संयोग

भाजपा की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई थी और नितिन नवीन का जन्म 23 मई 1980 का है। यानी जिस वर्ष पार्टी अस्तित्व में आई, उसी वर्ष नितिन नवीन भी जन्मे। आज दोनों की उम्र 45 वर्ष है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह संयोग नहीं, बल्कि युवाओं को संदेश देने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी यह संकेत देना चाहती है कि आने वाले चुनावों में नई पीढ़ी को नेतृत्व में बड़ी भूमिका मिलेगी।

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की अटकलें तेज

भाजपा के अंदरखाने में यह चर्चा भी तेज है कि आगे चलकर नितिन नवीन को पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। पहले भी जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। यदि ऐसा होता है, तो नितिन नवीन भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष और इस पद तक पहुंचने वाले पहले बिहारी नेता होंगे।

आगामी चुनावों में बड़ी भूमिका

बंगाल समेत कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2029 की तैयारियों के लिहाज से यह नियुक्ति अहम मानी जा रही है। संगठन को मजबूत करना, बूथ स्तर पर समन्वय और युवाओं को जोड़ना—इन सभी मोर्चों पर नितिन नवीन से बड़ी भूमिका की उम्मीद की जा रही है।

भाजपा के इस फैसले को संगठन में पीढ़ीगत बदलाव और भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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