अमरदीप नारायण प्रसाद |
2022 में हो चुकी थी जांच, फिर क्यों दबा दी गई रिपोर्ट?
प्रशासनिक चुप्पी ने भू-माफियाओं के हौसले बढ़ाए**
समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अंचल में स्थित करीब 500 वर्ष पुराने कबीर मठ की बहुमूल्य जमीन में कथित फर्जीवाड़े का मामला अब प्रशासन के लिए गंभीर सवाल बन चुका है। जिस भूमि विवाद को लेकर हाल में जिला प्रशासन ने जांच समिति का गठन किया है, उसी मामले की वर्ष 2022 में जांच हो चुकी थी, लेकिन न तो दोषियों पर कोई कार्रवाई हुई और न ही मठ की जमीन को सुरक्षित किया गया।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जब जांच पहले ही पूरी हो गई थी, तो रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
2022 की जांच: तथ्य सामने आए, लेकिन नतीजा शून्य
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2022 में मठ प्रबंधन की लिखित शिकायत के बाद तत्कालीन अपर समाहर्ता स्तर से पूरे मामले की जांच कराई गई थी। जांच के दौरान
रजिस्टर-2 में ओवरराइटिंग
जमाबंदी में अनियमितता
भूमि रिकॉर्ड से छेड़छाड़
जैसे गंभीर बिंदु सामने आए थे।
इसके बावजूद—
न जमीन को प्रशासनिक रूप से सुरक्षित किया गया
न किसी अधिकारी या कर्मी पर कार्रवाई हुई
और न ही जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया
यह स्थिति प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े करती है।
रिपोर्ट दबाने के पीछे कौन?
अब यह सवाल लगातार उठ रहा है कि—
जांच रिपोर्ट अंचल कार्यालय में दबा दी गई?
जिला स्तर पर फाइल आगे क्यों नहीं बढ़ी?
या फिर किसी के संरक्षण में मामला जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया?
यदि जांच रिपोर्ट गलत थी, तो उसे औपचारिक रूप से खारिज क्यों नहीं किया गया?
और यदि रिपोर्ट सही थी, तो दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
प्रशासनिक निष्क्रियता से बढ़ता गया विवाद
स्थानीय लोगों और मठ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि 2022 में समय रहते कार्रवाई हो जाती, तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
प्रशासनिक निष्क्रियता का सीधा लाभ कथित तौर पर भू-माफियाओं को मिला, जिन्होंने विवादित जमीन पर अपना दावा और मजबूत कर लिया।
यह मामला अब सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि संरक्षण और मिलीभगत की ओर भी इशारा कर रहा है।
धार्मिक न्यास की भूमि पर उपयोग को लेकर सवाल
जानकारी के अनुसार, कबीर मठ की कुछ जमीन पूर्व में आयुर्वेद कॉलेज के लिए लीज पर दी गई थी। आरोप है कि बाद में लीज की शर्तों की अनदेखी कर वहां व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी गईं।
यह धार्मिक न्यास की भूमि के उपयोग से जुड़े नियमों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है।
दिशा समिति की बैठक के बाद फिर खुला मामला
हाल ही में दिशा समिति की बैठक में पूर्व मंत्री एवं कल्याणपुर विधायक महेश्वर हजारी द्वारा इस प्रकरण को उठाए जाने के बाद मामला दोबारा प्रशासन के संज्ञान में आया।
रोसड़ा विधायक वीरेंद्र पासवान ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद जिला प्रशासन ने नई चार सदस्यीय जांच समिति के गठन की घोषणा की।
नई जांच से उम्मीदें, लेकिन भरोसा कमजोर
जिलाधिकारी द्वारा गठित नई जांच समिति से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह
वर्तमान स्थिति की जांच करे
साथ ही 2022 की पुरानी जांच रिपोर्ट की भी समीक्षा करे
हालांकि, पिछली रिपोर्ट पर कार्रवाई न होने के कारण आम लोगों में यह आशंका भी है कि कहीं यह जांच भी केवल कागजी औपचारिकता बनकर न रह जाए।
अब भी अनुत्तरित सवाल
2022 की जांच रिपोर्ट किस स्तर पर लंबित रह गई?
रिपोर्ट पर कार्रवाई न होने के लिए कौन जिम्मेदार है?
क्या धार्मिक न्यास की भूमि को जानबूझकर असुरक्षित छोड़ा गया?
इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आए बिना यह मामला शांत होता नहीं दिख रहा।
प्रशासन का पक्ष
जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने कहा है कि गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
अब देखना यह होगा कि इस बार जांच सिर्फ फाइलों तक सीमित रहती है या वास्तविक कार्रवाई तक पहुंचती है।
अगर आप चाहें, तो इसी खबर की अगली कड़ी मैं ऐसे बना सकता हूँ:
“2022 की जांच रिपोर्ट किस अफसर की टेबल पर रुकी?”
“रोसड़ा अंचल में धार्मिक और सरकारी जमीनों की सुरक्षा पर सवाल”