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Yearender 2025: बिहार का साल – राजनीति, सामाजिक बदलाव और सांस्कृतिक उपलब्धियों की झलक

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पटना: साल 2025 का अंत बिहार के लिए यादगार घटनाओं और राजनीतिक हलचल के साथ हो रहा है। विधानसभा चुनाव से लेकर सामाजिक आंदोलनों और प्रशासनिक कदमों तक, बिहार इस साल बार-बार राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा।
विधानसभा चुनाव और एनडीए की जीत: 2025 के विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतदान हुआ और एनडीए ने स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जो देश में ऐसा करने वाले पहले नेता बने। जेडीयू और बीजेपी के गठबंधन ने महिलाओं के समर्थन और ग्रामीण-शहरी मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी से यह ऐतिहासिक जीत हासिल की।
महागठबंधन और राजद की हार: महागठबंधन, विशेषकर राजद, चुनाव में बड़ा झटका झेल गई। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद की सीटें 2020 की 75 से घटकर 25 रह गईं। कांग्रेस, सीपीआई एमएल, सीपीएम और आईआईपी को मिलाकर महागठबंधन मात्र 35 सीटों पर सिमट गया। राजद के प्रवक्ता ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची और आचार संहिता को लेकर सवाल उठाए।
प्रशासनिक और कानूनी सुधार: कानून-व्यवस्था में सख्ती जारी रही। बिहार STF ने 16 बड़े आपराधिक षड्यंत्र नाकाम किए, जिसमें 11 हत्याओं के मामले शामिल हैं। परिवहन विभाग ने संशोधित मोटर वाहन अधिनियम लागू कर सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक अनुशासन मजबूत किया, जिससे पटना समेत कई जिलों में करोड़ों रुपये वसूले गए।
डिजिटल आंदोलन और युवाओं की भागीदारी: 2025 में युवाओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से बेरोज़गारी, शिक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के खिलाफ डिजिटल आंदोलन चलाया। कई बार यह आंदोलन सड़क प्रदर्शन में भी तब्दील हुआ, जिससे सरकार और प्रशासन पर दबाव बना।
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ: 2025 में मधुबनी पेंटिंग ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट प्रस्तुति के दौरान मधुबनी साड़ी पहनकर बिहार की लोककला को वैश्विक ध्यान में लाया। अप्रैल में बिहार के 50 कलाकारों ने मिलकर 200 वर्ग फीट की मधुबनी पेंटिंग बनाई, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
आने वाले साल के लिए तैयारी: 2026 में बिहार सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के क्षेत्र में कई नई योजनाएं शुरू करने की योजना बना रही है।
सारांश: 2025 बिहार के लिए राजनीतिक स्थिरता, महिला सशक्तिकरण, प्रशासनिक सुधार और सांस्कृतिक उपलब्धियों का साल रहा। चुनाव, कानून-व्यवस्था और कला के क्षेत्र में यह वर्ष यादगार साबित हुआ।

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