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शिक्षा विभाग घोटाला: किशनगंज के पूर्व DEO पर कार्रवाई, निलंबन अवधि के लाभ पर रोक

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पटना/किशनगंज:बिहार के शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई का असर अब साफ दिखने लगा है। किशनगंज जिले में बेंच-डेस्क खरीद से लेकर विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी गड़बड़ी सामने आने के बाद चार वरिष्ठ अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई की गई थी। अब विभागीय जांच पूरी होने के बाद एक अधिकारी को दंड भी दिया गया है।

डीएम रिपोर्ट से खुला था पूरा मामला

21 जून 2024 को किशनगंज के जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग को एक विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने कई योजनाओं में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि की। जांच में सामने आया कि जिले में बेंच-डेस्क योजना, विद्यालय जीर्णोद्धार, प्री-फैब स्ट्रक्चर निर्माण, आईसीटी लैब स्थापना, नाइट गार्ड बहाली, पेयजल और हाउसकीपिंग योजनाओं में नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किया गया।

चार अफसर निलंबित, DEO पर विभागीय कार्रवाई

जांच रिपोर्ट के बाद तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी सुभाष कुमार गुप्ता, उस समय किशनगंज में पदस्थापित जिला शिक्षा पदाधिकारी मोतिउर रहमान, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) राजेश कुमार सिंह और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा) सूरज कुमार झा को निलंबित किया गया था।
मोतिउर रहमान को 1 जुलाई 2024 को निलंबित किया गया था। करीब एक वर्ष बाद 30 जून 2025 को उन्हें निलंबन से मुक्त किया गया, लेकिन विभाग ने उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही जारी रखी।

प्रशासनिक चूक साबित, वेतन में कटौती का दंड

विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मोतिउर रहमान से प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक हुई थी। आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने उन्हें कालमान वेतन में एक निम्नतर प्रक्रम पर अवनति की सजा सुनाई।

सेवानिवृत्त अधिकारी को अतिरिक्त लाभ नहीं

अब जबकि मोतिउर रहमान सेवा निवृत्त हो चुके हैं, शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किया है कि निलंबन अवधि के दौरान उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता के अलावा कोई अतिरिक्त वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, निलंबन की अवधि को पेंशन गणना में शामिल किया जाएगा।

अन्य मामलों की भी निगरानी

शिक्षा विभाग के स्तर पर संकेत मिले हैं कि इस प्रकरण से जुड़े अन्य मामलों की भी समीक्षा की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर आगे और कार्रवाई हो सकती है।

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