पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर उठ रही चर्चाओं के बीच जेडीयू के भीतर एक नई सियासी बहस तेज हो गई है। पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता अब नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाने की खुलकर मांग कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद यह मांग और भी मुखर हो गई है।
जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, मार्च महीने में दिल्ली में होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक अहम साबित हो सकती है। माना जा रहा है कि इसी मंच से निशांत कुमार की राजनीतिक भूमिका को लेकर कोई संकेत दिया जा सकता है। हालांकि अभी तक पार्टी या परिवार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
चुनाव नतीजों के बाद निशांत कुमार की सार्वजनिक मौजूदगी पर भी लोगों की नजरें गईं। गांधी मैदान में नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान वे पहली पंक्ति में नजर आए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने राजनीति को लेकर सीधे तौर पर कुछ कहने से बचते हुए मुस्कान के साथ सवाल टाल दिया, लेकिन इसके बाद से अटकलों का बाजार और गर्म हो गया।
पटना समेत कई जिलों में जेडीयू समर्थकों ने पोस्टर-बैनर लगाकर ‘नीतीश सेवक, मांगे निशांत’ और ‘2026: नेतृत्व परिवर्तन का साल’ जैसे नारे बुलंद किए हैं। सोशल मीडिया पर भी निशांत को पार्टी का भविष्य बताने वाले अभियान चल रहे हैं। समर्थकों का दावा है कि बड़ी संख्या में लोग उन्हें सक्रिय राजनीति में देखना चाहते हैं।
कौन हैं निशांत कुमार?
निशांत कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इकलौती संतान हैं। 50 वर्षीय निशांत अब तक राजनीति की चकाचौंध से दूर रहे हैं। सादगीपूर्ण जीवन, शांत स्वभाव और निजी दुनिया तक सीमित रहना उनकी पहचान रही है। उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और आईटी सेक्टर में काम किया, लेकिन कभी किसी बड़े कारोबारी या राजनीतिक मंच पर खुद को आगे नहीं बढ़ाया।
परिवारवाद के खिलाफ नीतीश कुमार की स्पष्ट सोच भी अब तक निशांत की राजनीति से दूरी की बड़ी वजह मानी जाती रही है। खुद निशांत भी सार्वजनिक सवालों से बचते रहे हैं और राजनीति में आने के प्रश्न पर कभी खुलकर हामी नहीं भरी।
पार्टी के भीतर समर्थन और असमंजस
जेडीयू के कई वरिष्ठ और युवा नेता खुलकर निशांत के समर्थन में सामने आ रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि निशांत की एंट्री से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी। वहीं, कुछ नेताओं को आशंका है कि इससे नीतीश कुमार की परिवारवाद विरोधी छवि पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
नीतीश कुमार ने हालिया शपथ ग्रहण के दौरान निशांत का जिक्र किया था, जिसे सियासी गलियारों में एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अब सवाल यही है कि क्या निशांत कुमार अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए आगे आएंगे, या फिर जेडीयू में यह चर्चा केवल समर्थकों की मांग बनकर रह जाएगी।
फिलहाल बिहार की राजनीति की निगाहें मार्च में होने वाली जेडीयू की राष्ट्रीय बैठक पर टिकी हैं, जहां से इस सस्पेंस पर पर्दा उठने की उम्मीद की जा रही है।