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आरसीपी सिंह के एक जवाब ने बढ़ाई सियासी हलचल, जेडीयू में वापसी को लेकर अटकलें तेज

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पटना।बिहार की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कभी जेडीयू के रणनीतिक चेहरा माने जाने वाले आरसीपी सिंह के हालिया बयान ने सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। जेडीयू में संभावित वापसी को लेकर पूछे गए सवाल पर उनका छोटा सा जवाब— “आपको पता चलेगा”— फिलहाल बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में आरसीपी सिंह ने अपने पुराने राजनीतिक रिश्तों का जिक्र करते हुए भावनात्मक लहजे में कहा कि वे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अलग-अलग नहीं हैं। उन्होंने इशारों में यह जताने की कोशिश की कि दोनों के बीच दशकों पुराना भरोसा और समझ रही है। उनके इस बयान को सीधे तौर पर नीतीश कुमार के साथ संबंधों से जोड़कर देखा जा रहा है।
जब पत्रकारों ने उनसे खरमास के बाद जेडीयू ज्वाइन करने को लेकर सीधा सवाल किया, तो उन्होंने न तो इनकार किया और न ही हामी भरी। हल्की मुस्कान के साथ दिया गया उनका जवाब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। राजनीति में ऐसे अस्पष्ट बयान अक्सर आने वाले बड़े फैसलों की भूमिका माने जाते हैं।
फिलहाल आरसीपी सिंह प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी से जुड़े हुए हैं। इस नए राजनीतिक मंच के जरिए उन्होंने एक नई शुरुआत करने की कोशिश की थी। हालांकि हालिया विधानसभा चुनाव में जन सुराज का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। पार्टी न तो कोई सीट जीत पाई और न ही राजनीतिक प्रभाव छोड़ सकी।
इस चुनाव में आरसीपी सिंह की बेटी भी जन सुराज के टिकट पर मैदान में उतरी थीं, लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों के बाद यह साफ हो गया कि जन सुराज को बिहार की राजनीति में खुद को स्थापित करने के लिए लंबा संघर्ष करना होगा।
पुराने रिश्ते, नए संकेत
आरसीपी सिंह लंबे समय तक जेडीयू के सबसे भरोसेमंद और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। संगठन से लेकर सरकार तक, उन्होंने पार्टी के कई अहम फैसलों में भूमिका निभाई। बाद के वर्षों में मतभेद उभरे और उन्हें जेडीयू से अलग होना पड़ा। अब, जब उनका नया सियासी प्रयोग अपेक्षित सफलता नहीं पा सका और उन्होंने सार्वजनिक रूप से नीतीश कुमार से अपने रिश्तों पर जोर दिया है, तो वापसी की अटकलें और मजबूत हो गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू इस समय संगठन को नए सिरे से मजबूती देने में जुटी है। ऐसे में अनुभव और प्रशासनिक पकड़ रखने वाले नेताओं की वापसी पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकती है। अगर आरसीपी सिंह दोबारा जेडीयू में लौटते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
आगे की तस्वीर
फिलहाल आरसीपी सिंह ने अपने इरादों को पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया है। लेकिन उनका बयान यह जरूर संकेत देता है कि सियासी समीकरण बदल सकते हैं। अब निगाहें खरमास के बाद के घटनाक्रम पर टिकी हैं। क्या आरसीपी सिंह एक बार फिर नीतीश कुमार के साथ राजनीतिक सफर शुरू करेंगे या कोई नया रास्ता चुनेंगे— इसका जवाब आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।

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