नई दिल्ली।भारत का सालाना बजट सिर्फ सरकारी खर्च और टैक्स नीति का दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसके साथ जुड़ी कई ऐतिहासिक और रोचक कहानियां भी हैं। वित्त वर्ष 2026 का बजट न केवल अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा, बल्कि राजनीतिक और ऐतिहासिक नजरिए से भी इसे बेहद अहम माना जा रहा है।
बजट पेश करने वाले नेताओं के रिकॉर्ड
बजट पेश करना सिर्फ कागज पर आंकड़े पेश करना नहीं होता, यह देश की आर्थिक और विकास प्राथमिकताओं को सीधे जनता के सामने रखने का मौका होता है। भारतीय राजनीति में कुछ नेता ऐसे रहे हैं जिन्होंने बार-बार बजट पेश करके अपने अनुभव और विश्वसनीयता का प्रमाण दिया:
पी. चिदंबरम: उन्होंने अपने राजनीतिक और वित्तीय करियर में 9 बजट पेश किए, जो उन्हें इस क्षेत्र के सबसे सक्रिय नेताओं में से एक बनाता है।
प्रणब मुखर्जी: 8 बजट प्रस्तुत करने वाले प्रणब मुखर्जी ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला।
डॉ. मनमोहन सिंह: वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने 1991 से 1995 तक लगातार 5 बजट पेश किए। इनमें 1991 का बजट विशेष रूप से ऐतिहासिक माना जाता है, क्योंकि इसी के जरिए भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था में लिबरलाइजेशन और सुधारों की शुरुआत की थी।
यह आंकड़े केवल तथ्य नहीं हैं, बल्कि यह दिखाते हैं कि बजट पेश करने का अनुभव और नीति निर्माण में नेतृत्व का महत्व कितना बड़ा होता है।
बजट भाषणों के रोचक रिकॉर्ड
बजट केवल संख्याओं और योजनाओं का विवरण नहीं होता। इसके भाषण भी अक्सर इतिहास में याद किए जाते हैं:
सबसे लंबा बजट भाषण: 1 फरवरी 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया, जो 2 घंटे 40 मिनट तक चला। यह भाषण न केवल लंबाई में बल्कि महत्वपूर्ण घोषणाओं और नीति संकेतों के कारण भी चर्चित रहा।
सबसे छोटा बजट भाषण: 1977 में हिरुभाई मुलजीभाई पटेल ने पेश किया, केवल 800 शब्दों का अंतरिम बजट। यह भाषण अपने संक्षिप्तता के कारण ऐतिहासिक रूप से याद रखा जाता है।
बजट 2026 का महत्व
इस साल का बजट न सिर्फ आर्थिक आंकड़े पेश करेगा, बल्कि यह सरकार की प्राथमिकताओं और विकास की दिशा का संकेत भी होगा। यह देखा जाएगा कि निवेश, उद्योग, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में कौन सी नई नीतियां लागू की जाएंगी।
विशेष रूप से, बजट 2026 में आम जनता के लिए टैक्स राहत, रोजगार सृजन और सामाजिक योजनाओं पर ध्यान देने की उम्मीद है। साथ ही, यह आर्थिक विशेषज्ञों और उद्योग जगत के लिए भी यह संकेत देगा कि आने वाला वित्तीय वर्ष विकास और निवेश की दृष्टि से कैसे तैयार किया गया है।
इसलिए, बजट 2026 सिर्फ एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।