दरभंगा (जाले), 12 जनवरी 2026।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा पोषण सुरक्षा के साथ-साथ आय वृद्धि के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, जाले (दरभंगा) में मुर्गी पालन विषय पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन वरीय वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष की अध्यक्षता में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण युवक-युवतियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरीय वैज्ञानिक डॉ. दिव्यांशु शेखर ने कहा कि मुर्गी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का एक सरल, कम लागत वाला और लाभकारी साधन है। उन्होंने बताया कि घर के आंगन में देशी एवं ग्रामीण परिस्थितियों के अनुकूल मुर्गियों का पालन कर महिलाएं, भूमिहीन किसान एवं वंचित वर्ग के लोग आसानी से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। साथ ही यह परिवार की पोषण आवश्यकताओं को भी पूरा करने में सहायक है।
40 ग्रामीण युवक-युवतियों की सहभागिता
प्रशिक्षण कार्यक्रम की संचालिका इंजीनियर निधि कुमारी ने जानकारी दी कि इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण में कोयला स्थान, जोगियारा, भरवारा, जाले, केवटी, नरौछ धाम, भाट पोखर सहित आसपास के क्षेत्रों से लगभग 40 ग्रामीण युवक एवं युवतियाँ भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को मुर्गी पालन से जुड़ी व्यावहारिक और वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना है, ताकि वे इसे आजीविका के रूप में अपना सकें।
पहले दिन रोगों और देखभाल पर दी गई जानकारी
प्रशिक्षण के प्रथम दिन प्रथम सत्र में डॉ. दीपक कुमार ने मुर्गियों में होने वाली विभिन्न बीमारियों, उनके लक्षणों एवं रोकथाम के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने समय पर टीकाकरण, स्वच्छता और उचित प्रबंधन के महत्व पर विशेष बल दिया।
दूसरे सत्र में भीलवाड़ा के प्रगतिशील किसान अनिल कुमार ने प्रतिभागियों को मुर्गियों के रखरखाव, उचित देखभाल और प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक जानकारियाँ साझा कीं। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से बताया कि सही तरीके से देखभाल करने पर कम लागत में भी बेहतर उत्पादन और लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
आने वाले दिनों में मिलेंगी ये जानकारियाँ
प्रशिक्षण के आगामी सत्रों में प्रतिभागियों को मुर्गी पालन से संबंधित कई महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी जाएगी। इनमें मुर्गियों के लिए उपयुक्त सेड निर्माण, संतुलित आहार, विभिन्न बीमारियों के लक्षण एवं उपचार, बीमारियों के दौरान मुर्गियों के व्यवहार में होने वाले बदलाव, तथा मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी शामिल है।
कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों ने विश्वास जताया कि यह प्रशिक्षण ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का मजबूत आधार बनेगा और क्षेत्र में मुर्गी पालन को एक संगठित एवं लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने में सहायक सिद्ध होगा।